उत्तराखंड चुनाव 2022: जानिए, चुनाव में हार का सामना करने वाले बड़े चेहरों के बारे में

सीएम, पूर्व सीएम, प्रदेश अध्यक्ष समेत कई दिग्गज शामिल

देहरादून, 11 मार्च। उत्तराखंड में सभी 70 सीटों के परिणाम सामने आ चुके हैं। इस बार चुनाव में जनता ने अपने वोट से कई रिकॉर्ड बनाए तो कई रिकॉर्ड टूटे भी हैं। लेकिन सबसे ज्यादा नजर वीआईपी सीट पर टिकी रही है। जिनमें से जो जीत गए उन्होंने तो रिकॉर्ड कायम रखा लेकिन जो हार गए उनकी भी चर्चा हो रही है। इस लिस्ट में मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष समेत लगातार 4 और 3 बार जीतने वाले दिग्गज भी शामिल हैं। नजर डालते हैं, उत्तराखंड के ऐसे दिग्गजों पर जो इस बार चुनाव हार गए।

सीएम पुष्कर सिंह धामी

सीएम पुष्कर सिंह धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा सीट से हैट्रिक नहीं बना पाए। साथ ही धामी मुख्यमंत्री रहते चुनाव जीतने का रिकॉर्ड नहीं बना पाए। हालां​कि भाजपा को जनता ने प्रचंड बहुमत दिया है। लेकिन वे अपनी सीट नहीं बचा पाए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस चुनाव अभियान की कमान संभाल रहे हरीश रावत को जनता ने फिर से नकार दिया। वे लालकुंआ से बुरी तरह से हारे हैं। ऐसे में साफ है​ कि कांग्रेस की इस हार और हरदा की चुनावी हार से कांग्रेस को एक बार फिर बड़े मंथन की आवश्यकता है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ​श्रीनगर सीट पर हुए कांटे के मुकाबले में चुनाव हार गए। गणेश गोदियाल को चुनाव से पहले ही कांग्रेस की कमान मिली थी। लेकिन वे अपनी सीट बचाने में कामयाब नहीं हो पाए। इस तरह कांग्रेस तो चुनाव हारी लेकिन उनके चुनाव कमांडर भी हार गए।

4 बार के विधायक कुंजवाल

4 बार के विधायक कुंजवाल

गोविंद सिंह कुंजवाल 2002 से ही कुंजवाल जागेश्वर सीट से विधायक जीतते आए। लेकिन इस बार भाजपा के मोहन सिंह ने उन्हें शिकस्त दी। कुंजवाल 2012 से 2017 तक कांग्रेस सरकार में स्पीकर भी रहे। लेकिन वे ​इस बार अपना किला बचाने में कामयाब नहीं रहे। कुंजवाल कांग्रेस के सबसे सीनियर नेताओं में गिने जाते हैं।

कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद

कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद

स्वामी यतीश्वरानंद भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे स्वामी यतीश्वरानंद हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव हार गए। वे मुख्यमंत्री के अलावा हारने वालों में एक मात्र कैबिनेट मंत्री हैं। ये उनका तीसरा चुनाव था। लेकिन वे हैट्रिक नहीं मार पाए। यतीश्वरानंद मुख्यमंत्री किचन कैबिनेट के सबसे करीबी रहे हैं। उन्होंने पिछले चुनावों में पूर्व सीएम हरीश रावत को हराया था, लेकिन इस बार वे हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत से हार गए।

हरक सिंह की बहू अनु​कृति गुंसाई रावत

हरक सिंह की बहू अनु​कृति गुंसाई रावत

अनु​कृति गुंसाई रावत हरक सिंह की ​राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए चुनाव में उतरी अनुकृति लैंसडाउन सीट से चुनाव हार गई। उन्हें भाजपा के दलिप रावत ने हराया है। हरक सिंह ने अपनी बहू अनुृकृति को टिकट दिलवाने के लिए पहले भाजपा छोड़ी इसके बाद कांग्रेस ने भी उन्हे टिकट न देकर अनुकृति को टिकट दिया लेकिन वे हार गई।

सिंगर जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल

सिंगर जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल

सिंगर जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल चकराता सीट से इतिहास नहीं बदल पाए। चकराता सीट से कांग्रेस के प्रीतम सिंह 5वीं बार लगातार जीतकर रिकॉर्ड बना चुके हैं। लेकिन भाजपा के टिकट पर लड़े रामशरण नौटियाल अपनी सीट नहीं बचा पाए हैं।

लिस्ट में ये भी शामिल
ये वो बड़े चेहरे हैं जिन पर सभी की निगाहें टिकी हुई थी, इसके अलावा आम आदमी पार्टी के सीएम प्रत्याशी कर्नल अजय कोठियाल, विधायक रह चुके कुंवर प्रणव चैंपियन की पत्नी देवयानी, यशपाल आर्य के बेटे संजीव आर्य, पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट, प्रकाश पंत की पत्नी चंद्रा पंत समेत कई दिग्गज भी चुनाव हार गए।

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