उत्तराखंड में शिक्षा विभाग का एक और कारनामा, परीक्षा में नंबर आए 76, मार्कशीट पर दिए 28, जानिए क्यों

बोर्ड परीक्षा में मार्कशीट में कम नंबर दर्ज करने का मामला

देहरादून, 16 अगस्त। उत्तराखंड में शिक्षा विभाग का एक और कारनामा सामने आया है। जिससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में एक छात्रा के मार्कशीट में कम नंबर दर्ज करने का मामला सामने आया है। विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी है। जांच में दोषी पाए जाने वाले परीक्षक पर कार्रवाई की भी तैयारी शुरू करने का दावा है।

Uttarakhand Education Department board exam the number 76 in the examination, 28 on the marksheet

परीक्षक ने छात्रा की मार्कशीट पर गलत नंबर चडवा दिए

उत्तराखंड का शिक्षा महकमा अपने कार्यप्रणाली को लेकर हमेशा से ही सवालों के घेरे में रहता है। हाल ही में मंथली पेपर में अंग्रेजी विषय में त्रुटियों के क्वेश्चन पेपर वायरल होने का मामला सामने आया था। जिससे शिक्षक की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठने लगे थे। अब उत्तराखंड बोर्ड से संबंधित एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिसमें परीक्षक ने छात्रा की मार्कशीट पर गलत नंबर चडवा दिए। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि
मार्कशीट में परीक्षक द्वारा ओएमआर शीट पर दर्ज किए गए नंबरों को ही लिया जाता है।

ये है मामला
जीआईसी बुल्लावाला की हाईस्कूल की छात्रा नेहा ममंगाई के विज्ञान विषय में काफी कम नंबर आए। छात्रा को अपने और पेपर को हल करने को लेकर पूरा विश्वास था। जिसमें छात्रा को अच्छे मार्क्स आने की उम्मीद थी। लेकिन नेहा की मार्कशीट में काफी कम नंबर बताए गए। जिस के बाद उसने अपनी कॉपी की छायाप्रति के लिए आवेदन किया। बोर्ड ने छात्रों को 400 रुपये का शुल्क जमा करा कर अपनी आंसर शीट देखने की सुविधा दी है। आंसर शीटर मिलने पर नेहा ने देखा कि उसके तो विज्ञान में 76 नंबर है। इसमें भी एक नंबर कम जोड़ा गया है। वर्ना 77 नंबर हो जाते। जबकि मार्कशीट पर उसके नंबर केवल 28 चढ़े हुए थे। जिसके बाद ये पूरा मामला परीक्षक की लापरवाही का माना जा रहा है। इससे छात्रा के भविष्य पर भी असर पडना तय है। इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने इसकी जांच बिठा दी है। विभागीय अधिकारियों ने इसे घोर लापरवाही माना है। इससे परीक्षक पर कार्रवाई होना तय है।

पहले भी आ चुका है प्रकरण
बोर्ड परीक्षा में छात्रों के अंकों में गड़बड़ी का यह पहला मामला नहीं है। इससे वर्ष 2015-16 के दौरान परीक्षकों की ओर से भारी गलतियों का मामला उजागर हुआ था। जिस पर उत्तराखंड बोर्ड के तत्कालीन सचिव ने इस मामले में 62 परीक्षकों को चिह्नित किया था। जिन पर कार्रवाई भी की गई। अब इस प्रकरण में संबंधित परीक्षक पर कब तक कार्रवाई होती है। इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

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