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UA board: 10वीं के टॉप थ्री में गुदड़ी के लाल, किसी के घरवालों ने खेती बाड़ी तो किसी ने फास्ट फूड बेचकर पढ़ाया

Uttarakhand Board Result 2023 में हाईस्कूल में सुशांत चंद्रवंशी ने 99 प्रतिशत के साथ टॉप, ऋषिकेश के आयुष सिंह और रूद्रपुर के रोहित पांडेय ने दूसरे और ​टिहरी की शिल्पी और काशीपुर के शौर्य नेतीसरे स्थान में जगह बनाई है।

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Uttarakhand Board Result 2023 में हाईस्कूल का रिजल्ट 85.17 प्रतिशत रहा है। हाईस्कूल में टिहरी के सुशांत चंद्रवंशी ने 99 प्रतिशत अंकों के साथ टॉप किया है। जबकि ऋषिकेश के आयुष सिंह रावत और रूद्रपुर के रोहित पांडेय ने 98.8 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरे और ​टिहरी की शिल्पी और काशीपुर के शौर्य ने 98.6 प्रतिशत अंकों के साथ तीसरे स्थान में जगह बनाई है।

चारों मेधावी छात्रों ने मिसाल पेश की
हाईस्कूल परीक्षा में टॉप थ्री में जगह बनाने वाले चारों मेधावी छात्रों ने ऐसे छात्रों के सामने मिसाल पेश की है जो घर में बेहतर संसाधन, ट्यूशन और सभी तरह की सुविधाएं होने के बाद भी खास प्रदर्शन नहीं कर पाए। ये चारों मेधावी छात्र ऐसे परिवार से आते हैं जहां घर वाले छोटे मोटे काम करके अपना गुजारा कर रहे हैं। किसी के पिता कारपेंटर तो किसी के रोडवेज बस चालक है। कोई खेती बाड़ी कर अपने परिवार को पाल रहे हैं तो कोई फास्ट फूड की दुकान से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इन बच्चों ने एक बार फिर उस मुहावरे गुदड़ी के लाल को सही साबित कर दिया, जिसपर अक्सर परीक्षाओं के परिणाम में सबकी निगाहें टिकी रहती हैं।

टॉपर 1: सुशांत चंद्रवंशी, पिता-कारपेंटर
सुशांत चंद्रवंशी ने हाईस्कूल टॉप किया है। सुशांत टिहरी के छाम ​स्कूल में पढ़ता है। पिता ध्रुव प्रसाद​ चिन्यालीसौड़ उत्तरकाशी में सालों से फर्नीचर का काम करते हैं। घर में मां गृहणी हैं और बड़ी बहन पॉलिटेक्निक कर रही हैं। पिता ध्रुव प्रसाद ने कड़ी मेहनत कर बेटे को पढ़ाया है। परिवार मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। लेकिन अब उत्तरकाशी में ही बस गए हैं। बेटे के बचपन से ही मेधावी होने पर पिता को गर्व है। अब बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहता है। कड़ी मेहनत कर बिना ट्यूशन के बेटे ने टॉप किया तो पिता की मेहनत भी रंग लाई है।

टॉपर 2: आयुष रावत, पिता-बस चालक
सरस्वती​ विद्या मंदिर ऋषिकेश के छात्र आयुष रावत ने हाईस्कूल में दूसरी रैंक हासिल की है। आयुष के पिता रोडवेज में बस चालक हैं। मां अनीता गृहणी हैं। बिना ट्यूशन और घर के कम संसाधनों और सुविधाओं को ध्यान में रखकर ही आयुष ने कड़ी मेहनत की। रोजाना खुद से मेहनत करते हुए 4 से 5 घंटे पढ़ाई की। अब हाईस्कूल में सेकेंड टॉपर बनकर परिवार को भी फक्र महसूस हो रहा है। आयुष का सपना प्रोफेसर बनने का है। ​

टॉपर 2: रोहित पांडेय, खेतीबाड़ी करते हैं माता पिता
अल्मोड़ा के रोहित पांडेय गरीबी के कारण घर से काफी दूर रुद्रपुर में अपने चाचा-चाची के साथ रहते हैं। पिता रमेश चंद्र और माता हेमा देवी गांव में खेती बाड़ी करते हैं। ​रोहित के परिवार में दो छोटी बहनें भी हैं। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है तो परिजनों ने अपने साथ रखकर पढ़ाया आज प्रदेशभर में दूसरा स्थान पाकर घर वालों को खुशी का मौका दे दिया। रोहित का सपना साइंटिस्ट बनने का है।

टॉपर 3: शिल्पी, पिता फास्ट फूड की दुकान चलाते
कंडीसौड़ टिहरी की रहने वाली शिल्पी ने प्रदेशभर में तीसरी रैंक हासिल की है। शिल्पी के पिता जोगेंद्र सिंह​ बिष्ट कंडीसौड़ में फास्ट फूड की दुकान चलाते हैं। मां गृहणी हैं। पांच बहनों में शिल्पी सबसे छोटी है। घर में पिता के पास इतने संसाधन नहीं कि बेटी को सारी खुशियां दे सके। लेकिन मेहनत करके बेटी को अच्छी पढ़ाई करवाने की पूरी कोशिश की। अब बेटी ने कड़ी मेहनत से पिता को टॉप थ्री में आकर सबसे अच्छा गिफ्ट दिया है। जिससे पूरा परिवार खुश है। अब शिल्पी का सपना आईएएस अफसर बनने का है।

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