श्रीनगर में धन सिंह और गणेश के बीच कड़ा मुकाबला, लैंसडाउन में हरक सिंह और कोटद्वार में खंडूरी की छवि दांव पर
श्रीनगर,लैंसडाउन,कोटद्वार पर दिग्गज नेताओं की साख दांव पर
देहरादून, 12 फरवरी। गढ़वाल की तीन सीटों पर दिग्गज नेताओं की साख दांव पर लगी हुई है। श्रीनगर सीट पर भाजपा की ओर से कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल में कड़ा मुकाबला है। जबकि लैंसडाउन सीट पर हरक सिंह की बहू अनुकृति के मैदान में आने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। कोटद्वार सीट पर भाजपा 2012 की हार का बदला लेने के लिए पूर्व सीएम बीसी खंडूरी की बेटी ऋतु खंडूरी भूषण को मैदान में उतारा है।

श्रीनगर में मोदी के सहारे धन सिंह, गणेश को सत्ता विरोधी लहर की उम्मीद
गढ़वाल की हॉट सीट में से एक महत्वपूर्ण सीट श्रीनगर है। इस सीट पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का मुकाबला भाजपा के कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत से है। इस सीट पर भाजपा और धन सिंह रावत ने पूरा जोर लगाया हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर कई वीआईपी इस सीट पर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश में जुटे हैं।इस सीट पर शुरूआत में सत्ता विरोधी लहर होने का दावा किया जा रहा था, लेकिन बीते कुछ दिनों से टक्कर आमने-सामने की हो गई है। श्रीनगर सीट 2002 और 2007 में अनुसूचित जाति के लिए रही। पहले कांग्रेस से सुंदरलाल मंद्रवाल और बाद में भाजपा से बृजमोहन कोटवाल विधायक बने। 2012 में सीट सामान्य होने के बाद पहली बार कांग्रेस के गणेश गोदियाल ने जीत दर्ज की और पिछले चुनाव 2017 में बीजेपी के धनसिंह रावत विधायक चुने गए। धन सिंह रावत पूरे 5 साल के कार्यकाल में मंत्री रहते हुए सीएम की रेस में रहे। हालांकि श्रीनगर में सीट निकालना इस बार उनके लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है। उनके सामने गणेश गोदियाल कड़ी चुनौती बने हुए हैं। इस सीट पर सबसे ज्यादा 65 परसेंट ठाकुर वोटर हैं। इसके बाद 22 परसेंट अनुसूचित जाति, 11 परसेंट ब्राह्मण जबकि 2 प्रतिशत मुस्लिम, सिख समेत अन्य वर्गों के वोटर शामिल हैं।श्रीनगर में एनआईटी, मेडिकल कॉलेज, सड़क, दूरसंचार समेत कई बड़ी समस्याएं आज भी बड़े मुद्दे बने हुए हैं।
लैंसडाउन में दिलीप की हैट्रिक रोकने को हरक मैदान में
लैंसडाउन सीट पर भाजपा के दिलीप रावत के सामने इस बार हैट्रिक लगाने का मौका है। लेकिन इस बार दिलीप रावत के सामने हरक सिंह रावत की बहू अनुकृति गुंसाई रावत मैदान में है। जो कि दिलीप रावत को कड़ी टक्कर दे रही हैं। लैंसडाउन सीट पर्यटन की दृष्टि से खासा महत्वपूर्ण सीट है। ऐसे में इस सीट पर सबकी नजर टिकी हुई है। इस सीट पर भाजपा के दिलीप रावत 2012 और 2017 दोनों बार विधायक जीतकर आए हैं। लेकिन इस बार दिलीप का मुकाबला सीधे हरक सिंह रावत से ही माना जा रहा है। हरक सिंह रावत ने बहू अनुकृति गुंसाई के लिए भाजपा छोड़ी, उसके बाद हरीश रावत से माफी मांगी। इतना ही नहीं कांग्रेस ज्वाइन करने के लिए कई दिन इंतजार भी किया। ऐसे में हरक सिंह रावत इस चुनाव को किसी हाल में हारना नहीं चाहेंगे। हरक सिंह खुद किसी भी सीट से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। ऐसे में उनकी प्रतिष्ठा बहू की सीट पर ही टिकी है। लैंसडाउन सीट पर हर जाति वर्ग के लोग रहते हैं। यहां राजपूत और ब्राह्मण मतदाताओं की तादाद अधिक है। साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग, पर्वतीय और अनुसूचित जाति जनजाति के मतदाता भी समीकरण बदलने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
कोटद्वार में हार का बदला लेने को बेताब बेटी, जाति समीकरण को साधना चुनौती
इस बार चुनाव में भाजपा ही नहीं पूरे उत्तराखंड की नजर कोटद्वार सीट पर लगी हुई है। 2012 में भाजपा के सीएम चेहरे बीसी खंडूरी कोटद्वार से चुनाव हार गए थे। जिसके बाद खंडूरी सक्रिय राजनीति से बाहर हो गए। तब कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह नेगी ने खंडूरी को चुनाव में हराया था। इस बार सुरेंद्र सिंह नेगी के सामने बीसी खंडूरी की बेटी ऋतु खंडूरी भूषण चुनावी मैदान में हैं। 2017 में कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह नेगी को भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हरक सिंह रावत ने शिकस्त दी और हरक सिंह विधायक बने। लेकिन इस बार हरक सिंह ने पहले ही कोटद्वार सीट से चुनाव न लड़ने की इच्छा जताई बाद में पार्टी को ही छोड़ दिया। भाजपा ने आखिरी समय में इस सीट पर यमकेश्वर की विधायक ऋतु खंडूरी भूषण को कोटद्वार से उतार दिया। कोटद्वार सीट पर हर जाति वर्ग के मतदाता अच्छी तादाद में है। यहां गढ़वाल के हर क्षेत्र के लोग हैं। राजपूत मतदाताओं के साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति जनजाति के मतदाता भी चुनाव परिणाम में इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इस सीट पर ठाकुर और ब्राह्मण के बीच सीधी लड़ाई मानी जा रही है।












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