उत्तराखंड में यहां शादी में शराब पर बैन, डीजे का टाइम और पिठाई भी की गई फिक्स, जानिए कहां
Uttarakhand Alcohol banned at weddings उत्तराखंड में अब शादियों और वैवाहिक कार्यक्रमों के दौरान शराब के चलन पर रोक लगाने की पहल की जा रही है। इसके लिए कई ग्राम पंचायतें आगे आ रही हैं। इसी क्रम में उत्तरकाशी के गोडर पट्टी के जांदणु गांव में मेहंदी में शराब को प्रतिबंधित कर दिया गया है।
साथ ही किसी भी समारोह में शराब परोसने पर रोक लगा दी गई है। ग्राम पंचायत ने ये भी फैसला लिया है कि मेंहदी की रस्म में अगर शराब परोसी गई तो परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। शादी वाले परिवार की तरफ से पिठाई की रस्म के दौरान दी जाने वाली धनराशि को भी कम कर 11 रुपये और 101 रुपये निश्चित किया गया है।

उत्तरकाशी के गोडर पट्टी के जांदणु गांव में ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान चमन लाल की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की। बैठक में गांव के 42 परिवारों ने सामूहिक बैठक के माध्यम से मेहंदी की रस्म में शराब के प्रचलन को समाप्त करने का फैसला लिया। इसके अलावा शादी में बजने वाले डीजे के लिए भी रात दो बजे तक का समय निर्धारित किया।
उसके बाद गांव में डीजे भी नहीं बजेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया है। जांदणु गांव के प्रधान चमन लाल ने बताया कि मेहंदी के दौरान शराब पर होने वाले अनावश्यक खर्चे की वजह से कई गरीब परिवार चिंतित रहते हैं। इसके साथ ही गांव में कई बार लड़ाई झगड़े भी होते हैं।
युवा पीढ़ी शराब के कारण अपना भविष्य खराब कर रही है. इन्हीं दुष्परिणामों को देखते हुए यह निर्णय लिए गए हैं।पिछले साल नवंबर में उत्तरकाशी के ही एक गांव लोदाड़ा गांव के ग्रामीणों ने नशामुक्त अभियान की शुरुआत की थी। शादी समारोह और अन्य कार्यक्रमों में शराब परोसने वालों पर 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। देहरादून के चकराता ब्लॉक में भी कई ग्राम पंचायतों ने मेंहदी और शादी समारोह में शराब को बैन कर दिया है।
इससे पहले देहरादून जिले के गड़ूल गांव की ग्राम प्रधान स्वीटी रावत ने शादी समारोह में कॉकटेल पार्टी नहीं करने वाले परिवार को 51 हजार रुपए की आर्थिक मदद करने का निर्णय लिया था। इस निर्णय के तहत प्रधान स्वीटी रावत अभी तक ऐसे दो परिवारों को 51-51 हजार-हजार रुपए का चेक भी दे चुकी हैं।












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