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7 साल बाद राजभवन से लौटा आंदोलनकारियों के 10 प्रतिशत आरक्षण का बिल, जानिए अब सरकार के पास क्या हैं विकल्प

उत्तराखंड में राज्य आंदोलनकारियों को 10%क्षैतिज आरक्षण मामला

देहरादून, 2 सितंबर। उत्तराखंड में राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने से संबंधित विधेयक को सात साल बाद राजभवन ने लौटा दिया है। जिस पर राज्य सरकार को पुनर्विचार करने को कहा गया है। सीएम धामी ने इस विधेयक पर राजभवन को विचार करने का अनुरोध किया था। अब धामी सरकार को इसे संसोधन के साथ भेजने की बात की जा रही है। दावा किया जा रहा है कि इसकी खामियों को दूर किया जाएगा। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि अब विशेष सत्र बुलाकर इसे पुनः विधानसभा से पास कराकर राजभवन भेजे तो सभी बेरोजगार राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा।

वर्ष 2004 में एनडी तिवारी सरकार ने शासनादेश जारी किया

वर्ष 2004 में एनडी तिवारी सरकार ने शासनादेश जारी किया

वर्ष 2004 में एनडी तिवारी सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों को नौकरी में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने के लिए शासनादेश जारी किया था। इस आदेश के आधार पर आंदोलनकारियों को सरकारी विभागों में नौकरी भी मिली थी। नैनीताल हाईकोर्ट ने वर्ष 2011 में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण पर रोक लगा दी थी।

 हाईकोर्ट ने आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया

हाईकोर्ट ने आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया

2015 में हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए इस आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया। तत्कालीन कांग्रेस की हरीश रावत सरकार ने वर्ष 2015 में विधानसभा में राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी विधेयक पारित कर राजभवन को भेजा था। तब से विधेयक राजभवन में लटका पड़ा था। जिसे लेकर राज्य आंदोलनकारी भी आंदोलनरत हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया था अनुरोध

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया था अनुरोध

इसी वर्ष बीते अप्रैल माह में सरकार ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर राज्य आंदोलनकारियों का आरक्षण देने की पैरवी की थी। हाईकोर्ट ने यह प्रार्थना पत्र भी अस्वीकार कर दिया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधेयक को लौटाने या इसे स्वीकृति देने का अनुरोध राजभवन से किया था। अब राजभवन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुरोध को स्वीकार कर इस विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा दिया। साथ में हाईकोर्ट के निर्णय को देखते हुए इस पर विचार करने को कहा है।

आरक्षण विधेयक पर पुनर्विचार, विधेयक की खामियों को दूर किया जाएगा

आरक्षण विधेयक पर पुनर्विचार, विधेयक की खामियों को दूर किया जाएगा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण विधेयक पर पुनर्विचार करेगी। विधेयक की खामियों को दूर किया जाएगा। सरकार आंदोलनकारियों को आरक्षण देने के बारे में कृतसंकल्प है।

आंदोलनकारी मंच की मांग, विशेष सत्र बुलाकर इसे पुनः राजभवन भेजे सरकार

आंदोलनकारी मंच की मांग, विशेष सत्र बुलाकर इसे पुनः राजभवन भेजे सरकार

उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच देहरादून के जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती ने राज्य सरकार से मांग की है कि अब विशेष सत्र बुलाकर इसे पुनः विधानसभा से पास कराकर राजभवन भेजे तो सभी बेरोजगार राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। प्रदीप कुकरेती ने बताया कि ये भी एक सुखद संयोग है कि खटीमा के शहीदों को श्रद्धा सुमन करने के बाद ही देर सांय राज्य आंदोलनकारियों के लिए एक सुखद समाचार मिला कि राजभवन से राज्य आंदोलनकारियो के 10 प्रतिशत आरक्षण का विधेयक जो 2015 से राजभवन में कैद था, लौटा दिया गया है। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच और मुख्यमंत्री के प्रयास के साथ ही राजभवन का धन्यवाद प्रेषित करता है। आखिर राज्य आंदोलनकारियों का संघर्ष पुनः रंग लाया और मुख्यमंत्री पुष्कर धामी हमारा विश्वास जीतने में कामयाब रहे। उन्होंने जो चुनाव से पहले वायदा किया था। वह पूरा किया है।

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