Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Triyuginarayan temple: वेडिंग डेस्टिनेशन में बुकिंग फुल, रजिस्ट्रेशन और प्रक्रियाएं,कैसे होती है यहां शादियां

Triyuginarayan temple: उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग जिले में त्रिजुगीनारायण (त्रियुगीनारायण) मंदिर वेडिंग डेस्टिनेशन के रुप में लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। नवंबर माह में मंदिर में 100 से अधिक शादियां सम्पन्न हुई। अब मंदिर में अप्रैल 2025 तक की सभी बुकिंग फुल बताई जा रही है। ऐसे में वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में ये पवित्र स्थल सब लोगों की पहली पसंद बताई जा रही है।

उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग जिले में त्रिजुगीनारायण (त्रियुगीनारायण) मंदिर स्थित है जो कि शिव पार्वती के विवाह स्थल के रूप में जाना जाता है। उत्तराखंड सरकार ने साल 2018 में वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में शुरूआत की।

Triyuginarayan temple Full booking registration procedures wedding destination kaise karein book

रुद्रप्रयाग जिले में त्रिजुगीनारायण (त्रियुगीनारायण) मंदिर में लोग दर्शन करने के साथ ही अपने शादीशुदा जिदंंगी की सुख शांति की कामना के लिए जरुर पहुंचते हैं। ये मंदिर अब वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी फेमस हो गया है। भगवान विष्णु को समर्पित होने के बावजूद मंदिर शिव पार्वती के विवाह और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में प्रसिद्ध है।

त्रियुगीनारायण मंदिर को उत्तराखंड सरकार ने साल 2018 में वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में शुरूआत की। जिसके बाद यहां देश विदेश से ​कई हस्तियां शादी करने पहुंच चुकी हैं। ​मंदिर में शादी करने के लिए पुरोहित समाज के ऑफिस में 1100 रुपए से रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है। शादी करने के इच्छुक जोड़े के ​माता पिता की सहमति के बाद ही मंदिर समिति शादी करवाती है।

इसके लिए पहले जोड़ों का आधार कार्ड और फोन नंबर भी मंदिर समिति के पास रजिस्टर्ड करवाना पड़ता है। शादी की तारीख तय होने के बाद ही मंदिर समिति तारीख और समय तय करती है। मुहूर्त को देखकर ही मंदिर में शादी तय होती है। लेकिन विजयदशमी और महाशिवरात्रि के दिन सबसे ज्यादा शादी की क्वेरी आती है।

त्रियुगीनारायण मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव ने हिमालय के मंदाकिनी क्षेत्र के त्रियुगीनारायण में माता पार्वती से विवाह किया था। यह मंदिर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का है। यहां जलने वाली अग्नि की ज्योति, जो त्रेतायुग से अब तक निरंतर जल रही है। पौराणिक मान्यता है कि इस हवन कुंड की अग्नि को साक्षी मान कर भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया था।

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती, पर्वतराज हिमावन की पुत्री थी। पार्वती के रूप में मां सती का पुनर्जन्म हुआ था। अपने इस जन्म में माता पार्वती ने कठिन ध्यान और साधना से भगवान शिव का वरण किया था। जिस स्थान पर मां पार्वती ने शिव जी को पाने के लिए कठोर साधना की, उस स्थान को गौरी कुंड कहते हैं।

बताते हैं कि भगवान शिव जी ने गुप्त काशी में माता पार्वती के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा था। भगवान विष्णु ने पार्वती के भाई की भूमिका निभाई थी। जबकि ब्रह्माजी पुरोहित बने थे। मंदिर की संरचना बिल्कुल केदारनाथ मंदिर के समान ही है। तीन युगों से इस अग्नि का अस्तित्व है, यही कारण है कि मंदिर त्रियुगीनारायण कहलाता है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+