समुद्रतल से करीब 14 हजार की ऊंचाई पर ट्रैकर्स साहसिक पर्यटन के रोमांच के साथ ले रहे योगा की क्लास, जानिए कहां
trekking with yoga: उत्तरकाशी के गोमुख-तपोवन की ट्रैकिंग पर हजारों पर्यटक पहुंच रहे हैं। ट्रैकिंग को नया स्वरूप देने के लिए योग से जुड़े युवा इसे खास बना रहे हैं। समुद्रतल से करीब 14 हजार की ऊंचाई पर ट्रैकर्स साहसिक पर्यटन के साथ ही योग का पाठ भी सीख रहे हैं। रोमांच और आध्यात्मिक के इस संगम में सबसे अधिक विदेशी पर्यटक इसका अनुभव ले रहे हैं।
गोमुख-तपोवन की ट्रैकिंग पर हर वर्ष हजारों लोग पहुंचते हैं। अब तक वे वहां पर प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ और रोमांच के अनुभव के साथ लौट जाते थे, लेकिन अब युवाओं ने इसमें योगा की क्लास को भी जोड़ दिया है। उन्होंने ट्रैकिंग को योग से जोड़ दिया है।

गोमुख और तपोवन के अलावा युवा हर्षिल घाटी की वादियों में भी योग की पाठशाला देश-विदेश के लोगों को दी जा रही है। इससे जहां एक ओर पर्यटक रोमांच का अनुभव कर रहे हैं, तो वहीं आध्यात्म की अनुभूति के साथ अपने स्वास्थ्य को लेकर भी जागरूक हो रहे हैं।
गंगोत्री में मुखबा गांव के विनीत सेमवाल ने बताया कि उन्होंने योग सीखा उसके बाद इसे ट्रैकिंग से जोड़ा। अब तक वे कई दलों को गोमुख-तपोवन में योगासन की क्लास दे चुके हैं। इस प्रकार की ट्रैकिंग के लिए सबसे अधिक विदेशी पर्यटकों में उत्साह देखने को मिल रहा है। क्योंकि ट्रैकर्स ट्रैकिंग करने के बाद थका हुआ लौटता है, लेकिन ट्रैक के साथ योगाभ्यास से पर्यटकों को नई अनुभूति मिलती है।
वहीं हिमालय को जानने का मौका मिलता है। साथ ही हर्षिल घाटी के मांगचुताल, सातताल आदि क्षेत्रों में भी ट्रैकिंग के साथ योग का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें उनके साथ कई युवा भी जुड़ गए हैं। जिन्हें अब इससे रोजगार भी मिल गया है। जिन युवाओं ने योग से ही कोर्स किया है।
वे अब इस स्वरोजगार को पंसद कर रहे हैं। इसमें घूमने फिरने रोमांच के साथ ही आर्थिकी भी मजबूत हो रही है। गंगोत्री नेशनल पार्क की ओर से गोमुख ट्रैक खोलने के बाद 15 दिनों में एक हजार से अधिक ट्रैकर्स, पर्वतारोही ओर पर्यटक गंगोत्री ग्लेशियर का दीदार कर चुके हैं। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पार्क प्रशासन उत्साहित नजर आ रहा है। इससे वे युवा भी उत्साहित हैं जो इस ट्रैकिंग रूट पर योगा की क्लास दे रहे हैं।












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