दायित्व की पोटली खुलते ही शुरू हुई दावदारों में दौड़, धामी सरकार में दायित्वधारियों की लिस्ट का इंतजार
पूर्व विधायक कैलाश गहतोड़ी को दायित्व मिलने के बाद चर्चा तेज
देहरादून, 18 जून। उत्तराखंड में एक बार फिर दायित्वधारियों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। चंपावत से पूर्व विधायक कैलाश गहतोड़ी को वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद भाजपा में अंदरखाने दायित्वों को लेकर चर्चा तेज हो गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर सीनियर विधायकों और कार्यकर्ताओं को दायित्व बांटने का दबाव बढ़ता जा रहा है। जिनमें कई दावेदार बताए जा रहे हैं। हालांकि शुरूआत में दर्जनभर ही दायित्वधारी बनाए जा सकते हैं।

100 से ज्यादा दावेदार, दर्जनभर की लॉटरी लगना तय
प्रचंड बहुमत की सरकार और रिकॉर्ड मतों से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चुनाव जीतने के बाद भाजपा में दायित्वों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। जिसमें कई सीनियर विधायक और पदाधिकारियों के नामों पर मंथन होने का दावा किया जा रहा है। दावा है कि ऐसे दायित्वधारियों के लिए 100 से ज्यादा लोगों की चर्चा है। लेकिन पहली लिस्ट में कितने कार्यकर्ताओं का नंबर आता है। इसके लिए फिलहाल इंतजार करना पड़ सकता है। सीएम धामी के लिए सीट छोड़ने वाले कैलाश गहतोड़ी को दायित्व का ईनाम मिलने के बाद भाजपा में दायित्वों के लिए फिर से लॉबिंग तेज हो गई है। इस बार दायित्व के लिए दर्जनभर से अधिक सीनियर विधायक भी लाइन में हैं जो कि कैबिनेट में जगह पाने में असफल रहे। इनमें बंशीधर भगत, विशन सिंह चुफाल, विनोद चमोली, अरविंद पांडेय, विनोद कंडारी, प्रीतम पंवार, मुन्ना सिंह चौहान, सहदेव पुंडीर, उमेश शर्मा काउ, खजानदास समेत कई अन्य विधायक भी रेस में है। जिन्हें प्रमुख आयोग या निगम की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसके अलावा संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कार्यकर्ताओं या पदाधिकारियों को भी दायित्व की आस जगी हुई है। जिन पर मुख्यमंत्री को जल्द ही फैसला लेना होगा।
संगठन के साथ समन्वय बनाने को जरुरी है दायित्व
बीते दिनों हल्द्वानी में हुई कार्यसमिति की बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी जल्द दायित्वों के बंटवारे को लेकर संकेत दिए। जिसकी शुरूआत कैलाश गहतोड़ी को दायित्व देने के साथ ही मानी जा रही है। अब संगठन में काम कर रहे एक दर्जन से अधिक पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी सरकार में दायित्वधारियों की लाइन में आने की कोशिश में जुटे हैं। पिछली सरकारों में सरकार और संगठन में सामंजस्य बनाने के लिए दायित्वधारियों की नियुक्ति की जाती रही है। जिससे संगठन में काम करने वाले पदाधिकारियों का मनौबल बढ़ा रहे। इस लिहाज से विभिन्न बोर्ड, निगम और आयोग में अध्यक्ष, उपाध्यक्षों की नियुक्ति की जाती है। जो कि सरकार के रहते काम करते हैं। ये दायित्व भी सरकार में अहम भूमिका निभाते हैं। पिछली सरकार में 85 से ज्यादा दायित्व बंटे थे। लेकिन दायित्व देरी में बंटने से कार्यकर्ता तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को लेकर खुलकर नाराजगी देखने को मिली। जिस के बाद त्रिवेंद्र को लेकर संगठन के अंदर विरोध भी देखने को मिला था। त्रिवेंद्र के हटने के बाद तीरथ सिंह रावत भी दायित्वधारियों को लेकर फैसला नहीं कर पाए। जिससे भाजपा सरकार को लेकर पार्टी के अंदर ही विरोध देखने को मिले। ऐसे में इस बार पार्टी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ये रिस्क नहीं उठाना चाहते हैं। जिसके लिए जल्द ही होमवर्क पूरा कर लिया जाएगा। इस बार ऐसे नाम भी रेस में बताए जा रहे हैं जो कि चुनाव हार गए लेकिन सीएम के काफी करीबी हैं इनमें स्वामी यतीश्वरानंद, संजय गुप्ता और राजेश शुक्ला का नाम भी लिया जा रहा है। जो कि सीएम के काफी करीबी माने जाते हैं।












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