सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर खुले केदरानाथ धाम के कपाट, सीएम धामी भी हुए विशेष पूजा में शामिल
देहरादून, 06 मई। आस्था के मानक केदारनाथ धाम के कपाट सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खोल दिए गए हैं। कोविड प्रकोप के कारण दो साल से धाम के कपाट आम लोगों के लिए खोले नहीं जा रहे थे लेकिन आज से आम लोग अपने बाबा केदारनाथ का दर्शन कर पाएंगे। बता दें कि वैदिक मंत्रोच्चार और खास पूजा के बाद आज सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर कपाट खोले गए है। इस पूजा अर्चना में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए। जिस वक्त कपाट खुला उस वक्त हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर के प्रागंण में मौजूद थे।

मंदिर को 15 क्विंटल फूलों से सजाया गया
आपको बता दें कि इस वक्त मंदिर को 15 क्विंटल रंग बिरंगे फूलों से सजाया गया है। मंदिर की सुंदरता अलौकिक है। जैसे ही कपाट खुला वैसे ही जय बाबा केदारनाथ के जयकारों से पूरा प्रांगण गूंज उठा।
केदारनाथ बाबा के दर्शन करने आने वालों के लिए प्रशासन और मंदिर परिसर ने कुछ नियम बनाए हैं, जो कि निम्नलिखित हैं...

चार धाम यात्रा पंजीकरण
भक्त गण चार धाम यात्रा ( गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ) की यात्रा के लिए पहले पंजीकरण कराएं, ये पंजीकरण निम्नलखित तरह से हो सकता है...
- ऑनलाइन:https://registrationandtouristcare.uk.gov.in/ पर लॉगइन करके रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।
- फोन:https://apps.apple.com/us/app/tourist-care-uttarakhand/id1574692609 पर लॉगइन करके रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

कैसे करें हेलीकॉप्टर का टिकट बुक
हेलीकॉफ्टर का टिकट बुक करने के लिए आपको सबसे पहले https://heliservices.uk.gov.in पर लॉग इन करें। यहीं पर आपको किराए के बारे में पता चल जाएगा।
ट्रेन सेवा: अगर आप रेल के जरिए केदारनाथ जाना चाहते हैं तो आपको ट्रेन से हरिद्धार आना होगा और फिर बॉय रोड केदारनाथ जाना होगा।
फ्लाइट सेवा : विमान सेवा दिल्ली से देहरादून तक है, फिर आपको बॉय रोड रूद्रप्रयाग होते हुए केदारनाथ जाना होगा।
खास बातें
- एक दिन में केवल 12 हजार लोग ही केदारनाथ के दर्शन कर सकते हैं।
- केदानाथ का शिवलिंग 12 ज्योतिलिंगों में से 5वां शिवलिंग है।
- भगवान शंकर का यह मंदिर 8वीं शताब्दी का बताया जाता है।
- यह मंदिर समुद्र तल से 3,581 मीटर की उंचाई पर स्थित है।
- यह मंदिर हिमपात के कारण हर साल अक्टूबर-नवंबर में बंद हो जाता है और अप्रैल-मई में दोबारा खोला जाता है।
- कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण तो पांडव वंश के जनमेजय ने कराया था लेकिन मंदिर का जीर्णाद्वार आदिशंकराचार्य ने कराया था।












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