उत्तर प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम के पेंच में फंसा है उत्तराखंड से परिसंपत्तियों का बंटवारा
21 साल में भी यूपी उत्तराखंंड में परिसंपत्तियों का बंटवारा नहीं
देहरादून, 17 सितंबर। केन्द्र, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड तीनों जगह भाजपा की सरकार होने के बावजूद भी उत्तरप्रदेश उत्तराखंड के बीच परिसंपत्तियों का बंटवारा नहीं हो पाया है। चुनावी साल में एक बार फिर उत्तराखंड की धामी सरकार ने परिसंपत्तियों के बंटवारे पर फोकस करने की बात की है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सभी सम्बन्धित विभागों को इस प्रकरण पर पूरा होमवर्क तैयार कर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने को कहा है, जिससे उच्चस्तर पर होने वाली बैठकों में संबंधित विषयों पर मजबूती से राज्य का पक्ष रखा जा सके। हालांकि जानकार बताते हैं कि जब तक उत्तर प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम में बदलाव नहीं होगा तब तक परिसंपत्तियों का बंटवारा नहीं हो सकता है।

धामी ने 10 अक्टूबर की दी है डेडलाइन
उत्तर प्रदेश से अलग हुए उत्तराखंड को 21 साल हो गए हैं। लेकिन परिसंपत्तियों के मामले में अब तक दोनों प्रदेशों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। योगी आदित्यनाथ के यूपी के सीएम बनने के बाद उत्तराखंड को डबल उम्मीदें बंधी थी, लेकिन उत्तराखंड सरकार बीते 4 साल में इसका फायदा नहीं उठा सकी। अब चुनावी साल में पुष्कर सिंह धामी ने लंबित प्रकरणों का निपटारा करने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने कहा है कि सभी विभाग अपनी कार्ययोजना 10 अक्टूबर तक तैयार कराना सुनिश्चित करें जिससे उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड के मुख्य सचिवों की आयोजित होने वाली बैठक में इन पर नीतिगत निर्णय लिये जाने के सम्बन्ध में आपसी सहमति बन सके। सीएम का कहना है कि मुख्य सचिवों की बैठक में होने वाले विचार विमर्श के बाद संबंधित विषयों पर अंतिम निर्णय लिये जाने के सम्बन्ध में वे स्वयं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से वार्ता करेंगे। सीएम का कहना है कि कहा कि लम्बे समय से लंबित प्रकरणों का निस्तारण राज्य हित में जरूरी है। उन्होंने भारत सरकार के स्तर पर लिये जाने वाले निर्णयों और हाईकोर्ट में लंबित प्रकरणों की प्रभावी पैरवी किये जाने के भी निर्देश दिये। टीएचडीसी में उत्तर प्रदेश सरकार की अंशपूजी उत्तराखण्ड को हस्तांतरित किये जाने का प्रकरण उच्चतम न्यायालय में लम्बित है।
जल संसाधन पर नहीं उत्तराखंड का हक
उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत का कहना है कि उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड को अलग हुए 21 साल गुजर गए लेकिन राज्य को अपना हक की पूरी परिसंपत्तियां, पैतृक राज्य उत्तर प्रदेश से नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि इन संपत्तियों के लिए दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच खानापूर्ति के लिए ही मीटिंग ही मीटिंग में चलती रहती हैं, मगर नतीजा नहीं निकल पाता है।
जय सिंह रावत का कहना है कि
उत्तर प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम में धारा 79,80, 81, 82 रहेंगी तब तक परिसंपत्तियों का निपटारा नहीं होगा। उनका कहना है कि उत्तरांचल राज्य के गठन के लिए बाजपेई सरकार द्वारा बनाए गए पुनर्गठन अधिनियम 2000 के चलते उत्तराखंड का अपने जल संसाधन पर मालिकाना हक नहीं है, इसलिए उत्तर प्रदेश उसे नहर है और जलाशय नहीं दे रहा है। उदाहरण के लिए राम गंगा जल विद्युत प्रयोजना में पावर हाउस उत्तराखंड का है और उसे चलाने वाला पानी उत्तर प्रदेश का यह पावर हाउस तभी चलता है जब उत्तर प्रदेश को सिंचाई के लिए पानी की जरूरत होती है । रावत का कहना है कि संयुक्त मोर्चा सरकार के गृह मंत्री इंद्रजीत गुप्त ने राज्य गठन के लिए जो एक्ट बनाया था उसमें ऐसे उत्तराखंड विरोधी प्रावधान नहीं थे।
इन मामलों में अटका है पेंच-
- सिंचाई विभाग उत्तराखण्ड को जनपद उधमसिंह नगर हरिद्वार एवं चम्पावत में कुल 379.385 हेक्टेयर भूमि के हस्तांतरण
- जनपद हरिद्वार में आवासीय/अनावासीय भवनों का हस्तांतरण
- गंग नहर से 665 क्यूसेक जल उपलब्ध कराने
- जनपद उधमसिंह नगर तथा हरिद्वार की नहरों को राज्य को दिये जाने
- नानक सागर, धौरा तथा बेंगुल जलाशय को पर्यटन एवं जल क्रीड़ा के लिए उपलब्ध कराये जाने
- टीएचडीसी में उत्तर प्रदेश की अंश पूंजी उत्तराखण्ड को हस्तांतरित करने
- मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना के लिए लिये गये ऋण के समाधान
- परिवहन, वित्त, आवास, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति वन कृषि से सम्बन्धित विषयों पर निर्णय












Click it and Unblock the Notifications