पिता के अधूरे ख्वाब को पूरा करने के लिए बेटी ने चढ़ाई अपने अरमानों की बलि, एक डेंटिस्ट की IAS बनने की कहानी

IAS Mudra Gairola Success Story In Hindi: खूबसूरत वादियों से घिरे उत्तराखंड के चमोली जिले के कस्बे कर्णप्रयाग की रहने वाली मुद्रा गैरोला की ख्वाहिश थी कि वो डेंटल सर्जन बनने। गोल्ड मेडलिस्ट मुद्रा अपने सपने के बेहद करीब थीं। लेकिन, पिता के सपने को पूरा करने के लिए वो अपनी मेडिकल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती है और यूपीएससी की तैयारी में जुट जाती है।

दरअसल, मुद्रा गैरोला के पिता अरुण गैरोला ने साल 1973 में एक सपना देखा था। वो भी कोई छोटा-मोटा सपना नहीं, सपना आईएएस अधिकारी बनने का। अपने सपने को पूरा करने के लिए अरुण गैरोला पूरी शिद्दत के साथ तैयारी करता है। लेकिन, जब रिजल्ट आता है तो पता चलता है कि वो फेल हो गया। उनका सपना टूट जाता है और सारे आरमान भी बिखर जाते हैं।

IAS Mudra Gairola Success Story In Hindi

ख्वाहिश थी डेंटल सर्जन बनने की
वक्त भी आगे बढ़ता है और अरुण गैरोला अपने परिवार को लेकर दिल्ली आ जाते है। अरुण गैरोला की बेटी मुद्रा गैरोला, जो बचपने से ही पढ़ाई में काफी तेज और होशियार थी, वो मुंबई से बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी यानी बीडीएस की डिग्री पहले ही ले चुकी थी। दरअसल, मुद्रा गैरोला की ख्वाहिश थी कि वो एक डेंटल सर्जन बने। वहीं, दूसरी तरफ मुद्रा के पिता अरुण गैरोला चाहते थे कि उनकी बेटी भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाए।

पिता के सपने को बनाया अपना सपना
एक दिन वो अपनी बेटी से अपना सपना पूरा करने के लिए कहते है। वो कहते है कि जो मैं ना कर पाया, वो तुम पूरा करो और आईएएस अधिकारी बनो। फिर क्या था...मुद्रा गैरोला अपने पिता के सपने को अपना सपना बना लेती है और मेडिकल की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर यूपीएससी की तैयारी में जुट जाती है। 2018 में वो पहली बार परीक्षा देती है, लेकिन फाइनल इंटरव्यू के दौर तक पहुंचने के बावजूद नाकामयाब हो जाती है।

तीन बार दिया एग्जाम, नहीं हो पाई सफल
मेरिट लिस्ट में उसका नाम नहीं आता। अगले साल यानी 2019 वो फिर परीक्षा देती है। इस बार इंटरव्यू राउंड तक पहुंचती है, लेकिन फाइनल सेलेक्शन नहीं हो पता। 2020 में तीसरी बार परीक्षा में बैठती है, लेकिन इस बार भी उसे सफलता नहीं मिलती। लगातार तीन नाकामयाबी और अपने पिता के सपने को पूरा करने का दबाव था...ऐसे में अच्छे-अच्छे इंसान हार मान जाते है।

IPS बनीं...लेकिन पिता का सपना रहा अधूरा
लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी...फिर से हिम्मत जुटाई और साल 2021 में एक बार फिर यूपीएससी की परीक्षा देने पहुंची। इस बार जो रिजल्ट सामने आया, उससे कहानी बदल गई। दरअसल, मुद्रा की मेहनत रंग लाई और उसे परीक्षा में 165वीं रैंक मिलती है। इस रैंक के आधार पर मुद्रा गैरोला को आईपीएस कैडर मिल जाता है। बेटी यूपीएससी क्लियर कर चुकी थी, लेकिन कर्णप्रयाग में 1973 में देखा गया उसके पिता का सपना अभी भी अधूरा था।

2023 में पूरा हुआ, 50 साल पहले देखा गया सपना
वो अगले साल फिर से परीक्षा में बैठती है और इस बार उसके पिता का सपना पूरा हो जाता है। 2023 में उनकी बेटी 53वीं रैंक के साथ आईएएस ऑफिसर बन जाती है। आईएएस अधिकारी बनने के साथ ही मुद्रा गैरोला अपने पिता के 50 साल पहले देखे गए सपने को पूरा कर दिखाती है। खबर के मुताबिक, मुद्रा गैरोला पश्चिम बंगाल कैडर से आईएएस अधिकारी है और शुरुआत से ही वो पढ़ाई में बहुत तेज थीं।

पढ़ाई में शुरू से ही तेज थी मुद्रा गैरोला
और यही वजह थी कि उनके पिता ने उनके अंदर उस सपने को पूरा करने का जुनून देखा, जो वो कई साल पीछे छोड़ आए थे। मुद्रा गैरोला ने 10वीं में 96% अंकों को हासिल किए थे। तो वहीं, 12वीं में उन्हें 97% नंबर मिले थे। 12वीं के बाद वो मुंबई चली गईं और बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी की पढ़ाई के लिए एडमिशन लिया। डेंटिस्ट में करियर बनाने की ख्वाहिश रखने वाली मुद्रा ने बीडीएस की पढ़ाई में बेहतरीन परफॉर्म करते हुए गोल्ड मेडल भी प्राप्त किया था।

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