तो क्या सीएम बने रहने के लिए 2007 और 2012 का इतिहास दोहराएंगे पुष्कर सिंह धामी, जानिए क्या है मामला

सीट छोड़ने के लिए कुमाऊं से विधायक भाजपा से संपर्क में

देहरादून, 30 मार्च। उत्तराखंड में धामी सरकार ने अपना कामकाज करना शुरू कर दिया है। मंत्रिमंडल के बीच विभागों के बंटवारे से लेकर विकास कार्यों पर सरकार का फोकस शुरू हो गया है। लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उपचुनाव लेक​र अब भी कयासबाजी जारी है। इधर भाजपा के अंदरखाने कांग्रेसी पाले से एक विधायक को अपने पाले में लाकर दोबारा इ​तिहास रचने की भी चर्चा तेज है। जिससे मुख्यमंत्री के लिए सीट छुड़वाई जा सके। उत्तराखंड के इतिहास में अब तक दो मुख्यमंत्री 2007 में भाजपा के बीसी खंडूरी और कांग्रेस के 2012 में विजय बहुगुणा ने दूसरे दलों में सेंधमारी कर सीट खाली करा चुके हैं, तो ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि क्या इस बार भी पुष्कर सिंह धामी इतिहास दोहराएंगे।

So will Pushkar Singh Dhami repeat the history of 2007 and 2012 to remain CM, know what is the matter

डीडीहाट से चुनाव लड़ना लग रहा मुश्किल
प्रदेश में पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री की कुर्सी तो संभाल ली। लेकिन विधायक का चुनाव कहां से लड़ेंगे इसको लेकर लगातार कयासबाजी जारी है। शुरूआत में धामी के डीडीहाट से चुनाव लड़ने को लेकर चर्चा हो रही थी। ​लेकिन जिस तरह मंत्रिमंडल में बिशन सिंह चुफाल को जगह नहीं​ मिली उसके बाद साफ हो गया कि धामी को चुफाल की सीट से चुनाव लड़ाया जा सकता है। लेकिन चुफाल की नाराजगी खुलकर सामने आ गई और उन्होंने किसी भी सूरत में सीट न छोड़ने की बात की है। इसके साथ ही चुफाल ने अब तक इस तरह के किसी प्रस्ताव से भी साफ इनकार कर दिया। हालांकि आधा दर्जन विधायक सीएम के लिए सीट छोड़ने का ऑफर कर चुके है।

कुमाऊं से एक विधायक के भाजपा से संपर्क
लेकिन भाजपा के अंदरखाने कांग्रेस के कुमाऊं से एक विधायक के भाजपा से संपर्क में होने की बात सियासी गलियारों में तेजी से उड़ रही है। जिसमें द्वाराहाट विधायक मदन सिंह बिष्ट का नाम भी लिया जा रहा है। हालांकि ये अभी साफ नहीं हो पाया है कि एक ही विधायक संपर्क में हैं या ​कोई ओर भी हैं। जिस पर आने वाले दिनों में तस्वीर साफ हो सकती है। इसके अलावा अगर कांग्रेस का कोई विधायक नहीं टूट पाता है तो भाजपा के पास अपने ही किसी विधायक की सीट खाली कराने का विकल्प बचा है। भाजपा के जो विधायक सीट छोड़ने के लिए तैयार हैं उनमें चंपावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी ने ऑफर किया। इसके बाद जागेश्वर से विधायक मोहन सिंह, कपकोट के विधायक सुरेश गड़िया, खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश शर्मा भी अपनी सीट छोड़ने का प्रस्ताव धामी को दे चुके हैं।

मुख्यमंत्री के लिए 4 बार हो चुका है उपचुनाव
उत्तराखंड में अब तक 4 बार मुख्यमंत्री उपचुनाव लड़ चुके हैं। जिनमें एनडी तिवारी और हरीश रावत के लिए अपनी ही पार्टी के विधायकों ने सीट छोड़ी जबकि बीसी खंडूरी के लिए कांग्रेस और विजय बहुगुणा के लिए तब भाजपा के विधायक ने सीट छोड़ी थी। उत्तराखंड के इतिहास में मुख्यमंत्री के लिए तक 4 बार उपचुनाव हो चुके हैं। 2002 में​ पहली कांग्रेस की सरकार में एनडी तिवारी को सीएम चुना गया। एनडी तिवारी ने रामनगर सीट से चुनाव लड़ा। इसके बाद 2007 में भाजपा सरकार में तत्कालीन सीएम बीसी खंडूरी के लिए कांग्रेस के विधायक टीपीएस रावत ने सीट छोड़ी थी। पहले खंडूरी के लिए निर्दलीय विधायक यशपाल बेनाम को सीट छोड़ने को कहा गया लेकिन जब वे नहीं माने तो भाजपा ने कांग्रेस में सेंधमारी कर धुमाकोट सीट से टीपीएस रावत को इस्तीफा दिलाकर चुनाव जीताया। उस समय पूर्व सीएम​ रमेश पोखरियाल निशंक की भी इस प्रकरण में अहम भूमिका मानी जाती है। 2012 में कांग्रेस के पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के लिए सितारगंज से भाजपा के विधायक किरण मंडल को इस्तीफा दिलवाकर कांग्रेस में शामिल किया और बहुगुणा इसी सीट से विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2014 में हरीश रावत के लिए कांग्रेस के​ही विधायक हरीश धामी ने धारचूला सीट छोड़ी थी। जिसके बाद वे विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे।

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