Silkyara Tunnel का नाम होगा बाबा बौखनाग टनल, जानिए क्यों खास है मंदिर और क्या है रहस्य
Silkyara Tunnel सिलक्यारा टनल का नाम बाबा बौखनाग के नाम पर रखा जाएगा। सीएम धामी ने सिलक्यारा सुरंग के ब्रेक थ्रु और बाबा बौखनाग मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की। 2023 में सिलक्यारा सुरंग निर्माण के दौरान 41 श्रमिक 17 दिनों तक भीतर फंस गये थे। इस दौरान सबसे बड़ा रेस्क्यू अभियान चला।
जब देश विदेश के बड़े एक्सपर्ट से लेकर संस्थाएं 17 दिन तक सिलक्यारा में फंसे रहे। इस अभियान में सबसे ज्यादा बाबा बौखनाग की भी भूमिका रही। तब स्थानीय लोगों का मानना था कि बाबा बौखनाग के प्रकोप से ही इस तरह की घटना का सामना करना पड़ा है।

जिसके बाद रेस्क्यू अभियान की सफलता के लिए मुख्यमंत्री ने बाबा बौखनाग से मन्नत मांगते हुए मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था। जिसका आज संकल्प पूरा हो गया। मुख्यमंत्री धामी ने सिलक्यारा टनल का नाम बाबा बौखनाग के नाम पर किये जाने की घोषणा की। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र गेंवला-ब्रह्मखाल को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनाने बौखनाग टिब्बा को पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित करने और स्यालना के निकट हेलीपैड का निर्माण करने का ऐलान किया।
Silkyara Tunnel
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बाबा बौखनाग मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भी प्रतिभाग किया। बौखनाथ मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के लिए देहरादून स्थित अपने घर से मुख्यमंत्री भेंट और पूजा सामग्री लेकर सिलक्यारा पहुंचे। सिलक्यारा सुरंग में फंसे श्रमिकों के सकुशल रेस्क्यू के लिए मुख्यमंत्री ने स्वयं सिल्क्यारा अभियान के दौरान कैम्प कर रेस्क्यू अभियान की निरंतर निगरानी और निर्देशन किया था। रेस्क्यू अभियान की सफलता के लिए मुख्यमंत्री ने बाबा बौखनाग से मन्नत मांगते हुए मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था।
मुख्यमंत्री ने बाबा बौखनाग से प्रदेश की खुशहाली और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि जब सुरंग के मुख पर बाबा बौखनाग को विराजमान किया, तभी फंसे हुए मजदूरों को बाहर निकाला जा सका। उस समय उन्होंने बाबा बौखनाग का भव्य मंदिर बनाने की घोषणा की थी। आज मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा होने से संकल्प भी पूरा हुआ है और श्रद्धालु भी बाबा बौखनाग का आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टनल निर्माण के दौरान 12 नवम्बर को अचानक हुए भूस्खलन में 41 श्रमिक इस सुरंग में फँस गए थे। उस समय देशभर से लोग इन श्रमिकों की कुशलता के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे। उस अँधेरी सुरंग में, जहाँ उम्मीद की किरणें भी धूमिल हो रही थी, बाबा बौखनाग ने पहाड़ों के रक्षक के रूप में शक्ति और विश्वास का संचार किया।
चार धाम यात्रा के ड्रीम प्रोजेक्ट सिलक्यारा सुरंग के ब्रेक थ्रु मिलने से आने वाले समय में श्रद्धालुओं को इसका फायदा होगा। लगभग 1384 करोड़ लागत की इस परियोजना से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के बीच की दूरी 25 किमी कम होगी। जिससे यात्रियों के कम से कम दो घंटे बच जाएंगे। सिलक्यारा सुरंग के बारे में लोगों को तब पता चला जब
सिलक्यारा सुरंग चारधाम यात्रा की दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना है। लगभग 1384 करोड़ लागत की डबल लेन की इस सुरंग परियोजना की लंबाई 4.531 किलोमीटर है। सुरंग निर्माण से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के बीच की दूरी 25 किलोमीटर तक कम हो जाएगी, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा और समय की बचत होगी।












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