Shankaracharya controversy हरिद्वार में साधु संतों ने किया प्रदर्शन, यूपी सरकार को दी चेतावनी, जानिए क्या कहा
Shankaracharya controversy शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रयागराज में गंगा स्नान न करने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। प्रयागराज से लेकर हरिद्वार तक साधु संत इस पूरे प्रकरण में प्रशासन के विरोध में आ गए हैं। पहले तीर्थ पुरोहितों ने शंकराचार्य का समर्थन किया अब हरिद्वार के साधु संत एक जुट हो गए हैं।
प्रकरण से नाराज होकर हरिद्वार के हरकी पैड़ी पर भारत साधु समाज और श्री अखंड परशुराम अखाड़े के कार्यकर्ताओं ने सांकेतिक धरना दिया। साधु संतों ने इसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही प्रशासन के दुर्व्यवहार पर कड़ी नाराजगी दर्ज की है।

श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि प्रयागराज की घटना सनातन प्रेमियों के लिए चिंता का विषय है। कहा कि प्रयागराज के प्रशासन ने सम्मानित पीठ के शंकराचार्य का अपमान किया है। शिष्यों से भी गलत व्यवहार हुआ है। उन्होंने ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की साथ ही ऐसा न करने पर आंदोलन की चेतावनी दे डाली। साधु संतों ने योगी सरकार से इस पर कार्रवाई की मांग की है।
स्वामी प्रबोधानंद गिरि, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, भारत साधु समाज ने शंकराचार्य विवाद पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ये सरकार तय नहीं करती कि शंकराचार्य कौन बनेगा। ये साधु संतों के बीच का मामला है।
बता दें कि बीती 18 जनवरी को प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के रथ को पुलिस ने संगम तट पर जाने से रोक दिया था, जिसको लेकर विरोध हो रहा है। इस दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की भी हुई। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर शिष्यों के साथ मौनी अमावस्या के दिन बैरिकेडिंग तोड़ने का आरोप लगाया गया है।
शंकराचार्य माघ मेला के सेक्टर 4 स्थित शिविर के बाहर अपने अनुयायियों के साथ पिछले तीन दिनों से पालकी पर ही बैठे हैं। वहीं, प्रयागराज माघ मेला विकास प्राधिकरण उनके शिविर के बाहर उनकी पदवी को लेकर नोटिस चस्पा किया गया है। इस पूरे प्रकरण पर उत्तराखंड के तीर्थ पुरोहित भी शंकराचार्य के समर्थन में खड़े हो गए हैं। साथ ही प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।












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