मुश्किल में स्वामी प्रसाद मौर्य, इन्होंने पुलिस को दी तहरीर कहा-हिंसा भड़क सकती है, जानिए क्यों?

स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने पुलिस को इस बयान के लिए तहरीर दी है। उन्होंने पुलिस से मौर्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। 28 जुलाई को स्वामी प्रसाद मौर्य ने बयान दिया था कि बोध मठ तोड़कर बदरीनाथ धाम बनाया गया था।

Samajwadi Party leader Swami Prasad Maurya समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य अपने विवादित बयानों से हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। लेकिन इस बार एक विवादित टिप्पणी से उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बदरीनाथ धाम को लेकर की गई विवादित टिप्पणी पर उत्तराखंड में मौर्य के खिलाफ लगातार विरोध जारी है।

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पहले सीएम पुष्कर सिंह धामी, फिर ​भाजपा, कांग्रेस और अब साधु संतो और पुरोहितों ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने पुलिस को इस बयान के लिए तहरीर दी है। उन्होंने पुलिस से मौर्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। 28 जुलाई को स्वामी प्रसाद मौर्य ने बयान दिया था कि बोध मठ तोड़कर बदरीनाथ धाम बनाया गया था। अच्युतानंद तीर्थ का आरोप है कि मौर्य बिना किसी साक्ष्य और आधार के हिन्दुओं की धार्मिक भावना भड़का रहे हैं।

अच्युतानंद तीर्थ का कहना है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री ने जिस तरह का बयान दिया है उससे हिंदू आस्था को ठेस पहुंची है। इस तरह के बयान से हिंसा भड़क सकती है। अच्युतानंद तीर्थ का कहना है कि हिंसा फैलाने की भावना और साजिश के तहत उक्त बयान दिया गया है। ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में एसआई सर्वे को लेकर जब मीडिया ने समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य से उनकी राय ली तो मौर्य ने हिंदूओं के आस्था के प्रतीक बद्रीनाथ को लेकर विवादित टिप्पणी कर दी। जिसके बाद से बवाल मचा हुआ है।

मौर्य ने दावा किया था कि बद्रीनाथ धाम पहले बौद्ध मठ था और उसे तोड़कर हिंदू मंदिर बनाया गया। बयान के सामने आते ही सबसे पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पलटवार करते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान की निंदा करते हुए उनकी सोच को देश और धर्म विरोधी बताया है। जब स्वामी प्रसाद मौर्य से सवाल जबाव किया गया तो स्वामी प्रसाद मौर्य ने ज्ञानवापी मंदिर मस्जिद परिसर के सर्वे को लेकर ही नाराजगी जताते हुए बद्रीनाथ धाम पर विवादित टिप्पणी की।

उन्होंने कहा कि आखिर क्यों मस्जिद में ही सर्वे किया जा रहा है। मैं कई ऐसे हिंदू धार्मिक स्थलों को जानता हूं जो कि पहले जो कि बौद्ध मठों को तोड़कर बनाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि "8वीं शताब्दी तक बदरीनाथ धाम भी बौध मठ था, आदि शंकराचार्य ने उसे हिन्दू मंदिर बनाया। उनके इसी बयान को लेकर अब सियासत तेज हो गई है।

स्वामी प्रसाद मौर्य इससे पहले कई विवादित बयान दे चुके हैं। एक बयान में मौर्य ने कहा था कि तुलसीदास रचित रामचरितमानस को प्रतिबंधित करना चाहिए। जिस साहित्य में पिछड़ों और दलितों को गाली दी गई हो उसे प्रतिबंधित होना चाहिए। मौर्य के इस बयान पर भी जमकर बवाल हो चुका है।

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