Risapana-Bindal elevated road project का विरोध, नितिन गडकरी को 150 से ज्यादा लोगों ने पत्र भेजकर की ये मांग
Risapana-Bindal elevated road project देहरादून में प्रस्तावित रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर नया विवाद सामने आया है। परियोजना के विरोध में देहरादून और मसूरी के नागरिकों ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र भेजकर इस परियोजना पर रोक लगाने की मांग की है।
देहरादून सिटीज़न्स फोरम और अन्य नागरिक समूहों से जुड़े 146 लोगों ने पत्र पर हस्ताक्षर कर विरोध जताया है। नागरिकों ने पत्र में स्पष्ट किया है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन 21 गंभीर कारणों के चलते 26 किलोमीटर लंबी इस एलिवेटेड रोड परियोजना को देहरादून के लिए नुकसानदेह बताया है।

उनका कहना है कि शहर पहले से ही अनियंत्रित शहरी विकास, स्थानीय ट्रैफिक जाम और बढ़ते पर्यावरणीय दबाव से जूझ रहा है। ऐसे में यह परियोजना समस्याओं का समाधान करने के बजाय पर्यावरणीय, भू-वैज्ञानिक, कानूनी, सामाजिक और आर्थिक जोखिमों को और बढ़ा देगी।
पत्र में कहा गया है कि देहरादून मेन बाउंड्री थ्रस्ट और हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट के बीच स्थित है, जो इसे भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बनाता है। पहले इस क्षेत्र को भूकंप जोन-4 में रखा गया था, लेकिन भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा हाल ही में जारी भूकंप जोखिम मानचित्र में इसे जोन-6 में शामिल किया गया है। रिस्पना और बिंदाल नदियाँ रेत, बजरी और गाद की परतों से होकर बहती हैं, जो हल्के भूकंप के दौरान भी तरल की तरह व्यवहार कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में एलिवेटेड रोड के खंभों के धंसने, झुकने या गिरने का गंभीर खतरा बना रहेगा।
पत्र में परियोजना की बढ़ती लागत पर भी गंभीर चिंता जताई गई है। नागरिकों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में परियोजना की लागत काम शुरू होने से पहले ही 4,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 6,200 करोड़ रुपये हो चुकी है। उनका अनुमान है कि परियोजना पूरी होने तक यह लागत 8 से 10 हजार करोड़ रुपये या उससे भी अधिक हो सकती है, जो खराब योजना और आर्थिक प्रबंधन को दर्शाता है।
इसके विपरीत नागरिकों ने उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन द्वारा तैयार कम्प्रिहेन्सिव मोबिलिटी प्लान-2024 का उल्लेख करते हुए कहा है कि उसमें इलेक्ट्रिक बसों, रोपवे, मौजूदा सड़कों के बेहतर उपयोग, पैदल-अनुकूल ज़ोन और हरित परिवहन पर ज़ोर दिया गया है। नागरिकों का मानना है कि यही दिशा देहरादून को अधिक सुरक्षित, हरित और स्मार्ट बना सकती है।
नागरिकों का कहना है कि देहरादून को एलिवेटेड रोड की नहीं, बल्कि एक ब्लू-ग्रीन कॉरिडोर की जरूरत है, जिसमें नदियों का संरक्षण, पैदल चलने के रास्ते, बस लेन, साइकिल ट्रैक और हरित पट्टियां विकसित की जाएं। बता दें कि रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड देहरादून की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य रिस्पना और बिंदाल नदियों के किनारे लगभग 26 किलोमीटर लंबा एक ऊंचा मार्ग बनाकर शहर के ट्रैफिक जाम को कम करना है,
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