कपाट खुलते ही केदारनाथ में बना रिकॉर्ड, जानिए इस बार केदारपुरी में भक्तों के लिए क्या है खास
पहले दिन केदारनाथ में 23 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे
देहरादून, 7 मई। केदारनाथ के कपाट खुलते ही पहले ही दिन दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड टूट गया है। पहले ही दिन केदारनाथ 23 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए हैं। दावा किया जा रहा है कि इससे पहले 2019 में 9 हजार भक्तों ने दर्शन किए थे। केदारपुरी में भक्तों की आस्था पहले से ही ज्यादा बढ़ती जा रही है। श्रद्धालुओं के लिए बाबा के दर्शन के साथ ही ध्यान गुफा, शंकराचार्य की समाधि स्थल भी काफी लोकप्रिय होती जा रही है।

हर तरफ भोले के जयकारे,पांव रखने भी जगह नजर नहीं आई
दो साल तक कोविड के प्रतिबंध के कारण बाबा केदार के दर्शन करने से दूर रहे भक्तों को इस बार पूरा मौका मिल रहा है। जिस वजह से पहले ही दिन भक्तों के जय भोले से पूरी केदारपूरी गूंज उठी है। जिस तरह की उम्मीद लगाई जा रही थी, उसी अनुरूप भक्तों की संख्या धामों में पहुंच रही है। 3 मई से गंगोत्री व यमुनोत्री के कपाट खुलते ही चारधाम यात्रा का आगाज हो गया। लेकिन सबसे ज्यादा उत्साह 6 मई को बाबा केदारनाथ के दर्शन को देखने को मिली। जहां पहले ही दिन 23 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचने का दावा किया जा रहा है। जो कि एक रिकॉर्ड है। केदारनाथ धाम में फिलहाल 12 हजार की एक दिन में लिमिट करने की बात की जा रही है, हालांकि धाम में 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं की ही व्यवस्था एक दिन में हो सकती है। ऐसे में 2 गुना भक्त पहुंचने से एक बार फिर अव्यवस्थाएं ही नजर आ रही हैं। जिसके लिए बद्री-केदार मंदिर समिति को अपनी व्यवस्थाएं और बढ़ानी होंगी। जिससे आने वाले समय में धाम में यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो।

शंकराचार्य की समाधि स्थल पर ध्यान लगा रहे भक्त
केदारपुरी में भक्तों की आस्था पहले से ही ज्यादा बढ़ती जा रही है। जो कि आपदा के बाद ओर गहरी होती जा रही है। ऐसे में जब केदारनाथ का पुर्ननिर्माण हो रहा है, तो श्रद्धालु बाबा के दर्शन के साथ ही केदारपुरी को देखने आ रहे हैं। जिसमें ध्यान गुफा, शंकराचार्य की समाधि स्थल भी काफी लोकप्रिय होती जा रही है। केदारनाथ यात्रा पर आने वाले सभी भक्त आदिगुरू शंकराचार्य की समाधिस्थल को देखने पहुंच रहे हैं। यह स्थल 2013 में बह गया था। अब एक बार फिर से इसे तैयार किया गया है, जहां भक्त पहुंचकर साधना भी कर रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी भी इसी स्थल पर पहुंचकर ध्यान लगा चुके हैं। केदारनाथ आने वाले श्रद्धालु नौ वर्ष बाद आदिगुरु शंकराचार्य समाधिस्थल के दर्शन कर रहे हैं। विशेष डिजायन व तकनीक के साथ निर्मित समाधिस्थल में आदिगुरु शंकराचार्य की 35 टन वजनी मूर्ति स्थापित की गई है, जिस पर मंदाकिनी व सरस्वती नदी का जल प्रवाहित हो रहा है। विशेष डिजायन व तकनीक से 16 करोड़ की लागत से निर्मित यह समाधि भूमिगत है, जो 38 मीटर गोलाकार व 6 मीटर गहरी है। इसमें प्रवेश व बाहर निकलने के लिए रैंप बनाई गई हैं।

केदारनाथ की धार्मिक मान्यता
केदारनाथ मन्दिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। जो कि बारह ज्योतिर्लिंग और पंच केदार में से भी एक है। पत्थरों से बने कत्यूरी शैली से बने इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पांडवों के पौत्र महाराजा जन्मेजय ने कराया था। यहां स्थित स्वयम्भू शिवलिंग अति प्राचीन है। आदि शंकराचार्य ने इस मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया। मान्यता है कि महाभारत के युद्ध में विजयी होने पर पांडव भ्रातृहत्या के पाप से मुक्ति पाना चाहते थे। इसके लिए वे भगवान शंकर का आशीर्वाद पाना चाहते थे, लेकिन वे उन लोगों से रुष्ट थे। वे लोग उन्हें खोजते हुए हिमालय तक आ पहुंचे। भगवान शंकर पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए वे केदार में जा बसे। पांडव भी उनका पीछा करते-करते केदार पहुंच ही गए। भगवान शंकर ने तब तक बैल का रूप धारण कर लिया और वे अन्य पशुओं में जा मिले।भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर दो पहाडों पर पैर फैला दिया। अन्य सब गाय-बैल तो निकल गए, पर शंकर रूपी बैल पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए। भीम बलपूर्वक इस बैल पर झपटे, लेकिन बैल भूमि में अंतर्ध्यान होने लगा। तब भीम ने बैल की त्रिकोणात्मक पीठ का भाग पकड़ लिया। भगवान शंकर पांडवों की भक्ति, दृढ संकल्प देख कर प्रसन्न हो गए। उन्होंने तत्काल दर्शन देकर पांडवों को पाप मुक्त कर दिया। उसी समय से भगवान शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में केदारनाथ में पूजे जाते हैं।












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