Ratan Tata ऐसे हुआ रतन टाटा और आम आदमी का सपना पूरा,नैनो कार के ड्रीम प्रोजेक्ट से उत्तराखंड का है खास कनेक्शन
Ratan Tata मशहूर उद्योगपति रतन टाटा के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। देश भर में आज हर वर्ग उन्हें याद कर रहा है। टाटा ने आम से खास कई वर्गों का सपना पूरा किया। रतन टाटा का सरल स्वभाव और उनकी आम आदमी के लिए सोच का ही परिणाम था कि नैनो कार को वे बाजार में लेकर आए।
एक आम आदमी के लिए लखटकिया कार के वादे को पूरा करने के लिए रतन टाटा ने एक बड़ी सोच सामने रखी और लाखों लोगों के कार लेने के सपने को पूरा किया। रतन टाटा के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने में उत्तराखंड की सबसे अहम भूमिका है।

रतन टाटा का ये ड्रीम प्रोजेक्ट ऊधमसिंह नगर के सिडकुल पंतनगर टाटा के प्लांट में पूरा हुआ। एक समय था जब ये प्रोजेक्ट खतरे में पड़ता हुआ दिखाई दे रहा था। लेकिन पंतनगर प्लांट में न सिर्फ इस प्रोजेक्ट को पूरा किया, बल्कि समय रहते पूरा किया। जिससे एक आम आदमी का सपना पूरा हो सका।
एक लाख रुपए में मिली कार
खास बात ये रही कि शुरूआत में नैनो कार एक लाख रुपए में ही लोगों के घर तक पहुंच गई। जो कि एक आम आदमी के लिए बहुत बड़ा सपना था। ऊधमसिंह नगर में प्लांट लगाकर टाटा ने हजारों लोगों को रोजगार भी दिया। पहले नैनो प्रोजेक्ट का काम पश्चिम बंगाल के सिंगूर में हो रहा था , लेकिन विवाद के बाद प्रोजेक्ट रोक दिया गया।
पंतनगर प्लांट में तैयार हुई नैनो
सिंगूर में नैनो प्लांट का काम अक्तूबर 2008 में रोकना पड़ा था। इसके बाद रतन टाटा ने पंतनगर प्लांट को चुना टाटा ने तब कंपनी के मिनी ट्रक बनाने वाले पंतनगर प्लांट में नैनो कार का उत्पादन शुरू करने का फैसला किया था और खुद प्लांट में पहुंचकर ड्रीम प्रोजेक्ट का सपना पूरा करते हुए देखा।
खुद आए थे प्लांट में
वे 16 अप्रैल, 2009 को वह विशेष विमान से पंतनगर प्लांट में आए थे। ट्रक बनाने वाले प्लांट में रतन टाटा के भरोसे पर नैनो कार का सफल उत्पादन किया गया। प्लांट से बनाकर तैयार हुई नैनो कार के मालिक अशोक विचारे को रतन टाटा ने जुलाई 2009 में अपने हाथ से चाबी सौंपी थी। बाद में वर्ष 2010 में गुजरात के सानंद में टाटा के प्लांट में नैनो कार का उत्पादन हुआ।












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