Rakshabandhan 2024: रक्षाबंधन पर्व पर बहनों से राखी बंधवाने के लिए एक दिन खुलता है ये मंदिर, क्या है रहस्य

Rakshabandhan 2024: आज रक्षाबंधन है बहनें अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधते हैं। उत्तराखंड में इस मौके पर मंदिरों में भी खासा उत्साह से इस खास पर्व को मनाया जाता है।

इन सबके बीच एक ऐसा मं​दिर है जो कि सिर्फ आज के दिन यानि रक्षाबंधन के दिन एक दिन के लिए खुलता है। इस मंदिर को लेकर सबसे बड़ी मान्यता ये है कि मंदिर सिर्फ एक दिन के लिए खुलता है।

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मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान नारद जी ने 364 दिन भगवान विष्णु की पूजा करते और एक दिन के लिए चले जाते थे ताकि लोग पूजा कर सकें।

रक्षाबंधन के दिन सूर्योदय के साथ खुलता है और सूर्यास्त होते ही मंदिर के कपाट अगले 365 दिन के लिए बंद कर दिए जाते हैं। लेकिन जैसे ही मंदिर का द्वार खुलता है वैसे ही महिलाएं भगवान को राखी बंधना शुरू कर देती हैं और बड़े धूम.धाम के साथ पूजा भी करती हैं।

चमोली जिले की उर्गम घाटी में बंशीनारायण मंदिर तक कई लोग ट्रैकिंग करते हुए पहुंचते हैं। जिस स्थान पर मंदिर है वहां बुग्याल भी है। स्थानीय लोगों का दावा है कि बंशी नारायण मंदिर की बनावट कत्यूरी शैली में बना है। जो कि छठवीं से दसवीं इसवीं के मध्य निर्मित किया गया है। यहां श्री कृष्ण और भोलेनाथ की प्रतिमा स्थापित हैं। दस फुट ऊंचे मंदिर में भगवान की चतुर्भुज मूर्ति विराजमान है।

वामन अवतार से मुक्त होने के बाद सबसे पहले यहीं प्रकट हुए थे विष्णु पौराणिक मान्यता है कि विष्णु अपने वामन अवतार से मुक्त होने के बाद सबसे पहले यहीं प्रकट हुए थे। इसके बाद से ही यहां देव ऋषि नारद भगवान नारायण की पूजा की जाती है। इसी वजह से यहां पर लोगों को सिर्फ एक दिन ही पूजा करने का अधिकार मिला हुआ है। मान्यता है कि राजा बलि के अहंकार को नष्ट करने के लिए भगवान विष्णु ने वामन का रूप धारण किया था और बलि के अहंकार को नष्ट करके पाताल लोक भेज दिया।

जब बलि का अहंकार नष्ट हुआ तब उन्होंने नारायण से प्रार्थना की कि आप मेरे सामने ही रहें। इसके बाद विष्णु जी बलि का द्वारपाल बन गए। जब बहुत दिनों तक विष्णु जी, मां लक्ष्मी के पास नहीं पहुंचे तो लक्ष्मी जी पाताल लोग पहुंच गईं और बलि की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें विष्णु जी को मांग और लौटकर अपने लोक में पहुंच गए। तब से इस जगह को वंशी नारायण के रूप में पूजा जाने लगा।

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