कौन हैं मोहन प्रकाश, जिन्हें उत्तराखंड चुनाव के लिए राहुल गांधी ने सौंपी सबसे अहम जिम्मेदारी
नई दिल्ली, 18 जनवरी। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इस बार वापसी की उम्मीद लगा रही है। पार्टी प्रदेश में वापसी के लिए हर कोशिश कर रही है। लेकिन जिस तरह से राहुल गांधी ने एक बार फिर से मोहन प्रकाश को उत्तराखंड का वरिष्ठ पर्यवेक्षक तैनात किया है उसको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल मोहन प्रकाश का ट्रैक रिकॉर्ड कुछ खास नहीं रहा है, एक के बाद उनके नेतृत्व में पार्टी को निराशाजनक नतीजे ही देखने को मिले हैं। बावजूद इसके आखिर क्यों राहुल गांधी ने एक बार फिर से मोहन प्रकाश पर भरोसा जताया है, यह एक बड़ा सवाल है। मोहन प्रकाश ने राहुल गांधी की तुलना जेपी से की थी और कहा था कि राहुल गांधी देश के युवाओं की बात करते हैं। हालांकि उनके इस बयान पर उनकी काफी आलोचना हुई थी।

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छात्र राजनीति से जुड़े रहे हैं
कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने खुद इस बात का ऐलान किया कि मोहन प्रकाश पार्टी के महासचिव देवेंद्र यादव के साथ मिलकर काम करेंगे। मोहन प्रकाश को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। इससे पहले भी मोहन प्रकाश को कई चुनावों की जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है, लेकिन वह पार्टी के लिए जीत का मंत्र नहीं तलाश सके थे। कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार मोहन प्रकाश छात्र राजनीति से जुड़े रह चुके हैं, वह राजस्थान के लीडर हैं और अधिकतर समय उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के साथ ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी में ही काम किया है।
हमेशा दिया राहुल गांधी का साथ
कांग्रेस पार्टी के भीतर जब पुराने नेताओं और नए नेताओं के बीच विवाद हुआ तो मोहन प्रकाश ने हमेशा ही राहुल गांधी का साथ दिया। मोहन प्रकाश को संगठन का आदमी कहा जाता है, उनकी उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति में काफी दिलचस्पी है। सूत्रों के अनुसर दिल्ली में कांग्रेस के नेतृत्व को उम्मीद है कि मोहन प्रकाश की जानकारी उत्तराखंड में पार्टी की मदद करेगी। कांग्रेस के एक नेता ने मोहन प्रकाश को लेकर कहा कि वह जहीन और समाजवादी पृष्ठभूमि स आते हैं, उन्होंने राजनीति में अपना करियर जनता दल और लोक दल से शुरू किया था।
चार बार लड़े चुनाव
कांग्रेस पार्टी के नेता ने बताया कि मोहन प्रकाश केंद्रीय नेतृत्व और गांधी परिवार की मांग को सामान्य तौर पर स्वीकार करते हैं, वह संगठन के आदमी हैं। बता दें कि मोहन प्रकाश राजस्थान विधानसभा के एक बार सदस्य रह चुके हैं। 1977 से 1990 के बीच उन्होंने राजाखेड़ा से चार बार चुनाव लड़ा, लेकिन एक बार ही जीत सके। पहले उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन चुनाव हार गए। 1985 में वह लोक दल के टिकट पर चुनाव जीते। इसके बाद अगले चुनाव में वह जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन हार गए। मोहन प्रकाश पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नाडीज के भी करीबी रह चुके हैं।
मोती लाल वोरा लेकर आए कांग्रेस में
मोहन प्रकाश 2002 में कांग्रेस में शामिल हो गए जबकि नीतीश कुमार ने जॉर्ज फर्नाडीज को हटाकर खुद को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। जदयू के पूर्व सांसद ने बताया कि मोहन प्रकाश लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के करीबी नहीं बन पाए जिनके लिए वह खास थे। मोहन प्रकाश को मोती लाल वोरा कांग्रेस में लेकर आए। मोती लाल वोरा न मोहन प्रकाश को मंझा हुआ और अनुभवी नेता बताया था।
कांग्रेस में अहम जिम्मेदारियां
कांग्रेस पार्टी में मोहन प्रकाश ने कई अहम भूमिकाएं निभाई हैं। उन्होंने बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र में अपनी सेवाएं दी हैं। वह कांग्रेस की वर्किंग कमेटी के भी सदस्य रहे हैं। राजस्था में सीपी जोशी के वह करीबी थे। ऐसा माना जा रहा था कि 2008 में अगर कांग्रेस जीतती है तो सीपी जोशी प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे और मोहन प्रकाश को प्रदेश में अहम पद मिलेगा। हालांकि कांग्रेस पार्टी को 2008 में जीत मिली लेकिन सीपी जोशी एक वोट से चुनाव हार गए।
पार्टी के भीतर से उठी आवाज
इसके बाद 2012 में मोहन प्रकाश यूपी और गुजरात में कांग्रेस पार्टी के इंचार्ज थे। दोनों ही जगह कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा था। उस वक्त शरद पवार ने कांग्रेस आला कमान से शिकायत की थी कि मोहन प्रकाश उनके उम्मीदवारों के खिलाफ गुजरात में उम्मीदवारों को खड़ा कर रहे हैं। मोहन प्रकाश को 2013 में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की जिम्मेदारी सौंपी गई, दोनों ही जगह कांग्रेस को हार मिली। 2018 में मोहन प्रकाश की जगह मल्लिकार्जुन खड़गे को महाराष्ट्र का जिम्मा मिला। 2017 में कमलनाथ की शिकायत पर प्रकाश मोहन को मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी से हटा दिया।












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