मिलिए पुष्कर सिंह धामी की पत्नी गीता से, जानिए किस बात की टीस है उनको?
देहरादून, 23 मार्च। पुष्कर सिंह धामी के दोबारा सीएम बनने पर पिथौरागढ़ में लोग मंगल-गीत गा रहे हैं और मिठाई बांट रहे हैं तो वहीं सीएम पुष्कर सिंह धामी की पत्नी गीता धामी ने पति के दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने पर खुशी जताते हुए कहा कि 'मैं सभी राज्यवासियों की तरह काफी खुश हूं और गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। मैं पीएम मोदी और केंद्रीय नेताओं को हृदय से धन्यवाद देती हूं कि उन्होंने एक बार फिर से पुष्कर सिंह धामी जी पर भरोसा किया है।'

'मुझे उनकी मेहनत और कोशिश पर पूरा भरोसा है'
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए गीता धामी ने कहा कि 'मुझे धामी जी पर विश्वास है कि वो हमेशा ऐसे ही जनता के हित के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने जिस तरह से 6 महीने के कार्यकाल में जनता के हित में जो कार्य किया वह आने वाले दिनों में और भी गति पकड़ेगा, मुझे उनकी मेहनत और कोशिश पर पूरा भरोसा है।'

क्या खटीमा की हार की टीस है?
जब उनसे पूछा गया कि क्या खटीमा की हार की टीस है? तो इस पर गीता धामी ने कहा कि 'हां, टीस तो है लेकिन पूरे उत्तराखंड में जिस तरह से पूर्ण बहूमत से बीजेपी जीती है, उसकी खुशी बहुत ज्यादा है। हो सकता है कि धामी जी अपनी बात को पूरी तरह से खटीमा के लोगों को समझा नहीं पाए , बतौर विधायक जितना वक्त उन्हें खटीमा में देना था, वो शायद वो वहां दे नहीं पाए और शायद यही वजह रही खटीमा की हार की।'
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28 जनवरी 2011 को पुष्कर सिंह धामी की शादी गीता से हुई थी
मालूम हो कि 28 जनवरी 2011 को पुष्कर सिंह धामी की शादी गीता धामी से हुई थी। दोनों को शादी से दो बेटे दिवाकर और प्रभाकर धामी हैं। गीता धामी की भी स्कूलिंग खटीमा से ही हुई है तो वहीं उन्होंने हेमवती नंदन बगुगुणा गवर्नमेंट कॉलेज से से स्नातक किया है। धामी के बिजी होने पर इस बार खटीमा में चुनावी प्रचार की जिम्मेदारी गीता धामी ने ही संभाली थी। वो अक्सर खटीमा आती-जाती भी रहती है, वो एक सोशल वर्कर भी हैं लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद धामी इस बार खटीमा से हार गए। उन्हें इस सीट पर कांग्रेस के भुवन कापड़ी ने 6951 मतों से हराया है।

भाजपा ने रचा इतिहास
आपको बता दें कि धामी के नेतृत्व में भाजपा ने उत्तराखंड में सत्ता वापसी की है।भाजपा को 70 सीटों में से 47 सीटें मिलीं हैं ,इस जीत के साथ ही भाजपा ने दोबारा से सत्ता में वापसी करने वाली पहली पार्टी बन गई है तो वहीं खटीमा से इस बार चुनाव हारने के बावजूद धामी फिर से सीएम बने हैं और वो जनरल बीसी खंडूड़ी के बाद दूसरे राजनेता हैं जिन्हें दूसरी बार उत्तराखंड के सीएम बनने का गौरव प्राप्त हुआ है।










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