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निशंक की नड्डा से मुलाकात के तलाशे जा रहे सियासी मायने, उत्तराखंड की सियासत में निशंक की हो सकती है वापसी

पूर्व सीएम निशंक की राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा से मुलाकात

देहरादून, 28 फरवरी। उत्तराखंड में मतगणना से पहले ही भाजपा में अंदरखाने घमासान मचा हुआ है। चुनाव में भितरघात के आरोपों के बाद से पार्टी की मुश्किलें बढ़ गई है। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता डॉ रमेश पोखरियाल निशंक की राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। इस बैठक के सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि पार्टी भितरघात के आरोपों के बाद से डेमेज कंट्रोल को लेकर गंभीर है। ऐसे में पार्टी को अपने पुराने खेवनहार निशंक की याद आ गई है। जो कि चुनाव बाद अहम भूमिका निभा सकते हैं।

भितरघात के आरोपों के बाद मुश्किल में भाजपा

भितरघात के आरोपों के बाद मुश्किल में भाजपा

सूबे में दोबारा सत्ता पाने के लिए भाजपा ने इस बार मिशन 60 प्लस का नारा दिया और दावा किया जा रहा है कि भाजपा इस बार इतिहास रचते हुए दोबारा सरकार बनाने जा रही है। लेकिन पार्टी के अंदर जिस तरह से भितरघात के आरोपों की झड़ी लगी हुई है। उससे पार्टी के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई है। इस बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक से मुलाकात के बाद प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। प्रदेश संगठन में जिस तरह से भितरघात के आरोप लगे हैं, उसके बाद प्रदेश संगठन स्तर पर बड़े स्तर पर फेरबदल होना तय माना जा रहा है। साथ ही अगर भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो पार्टी के पुराने रणनीतिकार निशंक को ही नेतृत्व आगे कर सकता है। 2007 और 2012 में भी निशंक ने पार्टी नेतृत्व के सामने ​परिस्थितियों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे में अब एक बार फिर हाईकमान निशंक को बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकता है। चर्चा ये भी है कि पार्टी 10 मार्च के बाद प्रदेश संगठन में बड़ा फेरबदल कर सकती है।

भितरघात के आरोपों की लगी पार्टी में झड़ी

भितरघात के आरोपों की लगी पार्टी में झड़ी

पार्टी में अंदरखाने भितरघात के आरोपों को लेकर काफी चर्चा हो रही है। जिस तरह के आरोप लगे हैं, उसके बाद से पार्टी बैकफुट पर है। साथ ही कार्रवाई भी करना तय है। अभी तक एक मंत्री व चार विधायक अपनी-अपनी सीटों पर भितरघात के आरोप लगा चुके हैं। विधायक संजय गुप्ता, कैलाश गहतौड़ी, हरभन सिंह चीमा व केदार सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने अपनी-अपनी सीटों पर भितरघात के आरोप लगाए हैं। वर्ष 2009 में लोकसभा की हरिद्वार सीट से भाजपा प्रत्याशी रहे जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरी ने वीडियो जारी कर प्रदेश भाजपा संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जाहिर की है। जिसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने निशंक को दिल्ली बुलाकर मंथन किया है।

पुराने दिग्गज और खेवनहार हैं निशंक

पुराने दिग्गज और खेवनहार हैं निशंक

प्रदेश की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक भाजपा के पुराने त्रिमूर्ति में से एक हैं। जो कि विपरीत परिस्थितियों में भी पार्टी की रणनीति को तैयार करने में माहिर माने जाते हैं। पार्टी ने चुनाव के घोषणा पत्र की जिम्मेदारी भी निशंक को सौंपी हुई थी। इसके बाद भी निशंक चुनाव में प्रचार-प्रसार में भी अहम भूमिका में रहे हैं। अब पार्टी निशंक की चुनाव परिणाम के बाद की भूमिका के लिए तैयारी में जुटी है।

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