धराली आपदा के एक माह: मलबे में जमींदोज कई बहुमंजिला भवन, 62 लोग दबे, दो शव मिले, 9 जवान लापता, अब कैसे हैं हाल

Dharali disaster उत्तरकाशी के धराली गांव में 5 अगस्त को करीब डेढ़ बजे हारदूध मेले की तैयारी चल रही थी। ग्रामीण मेले को लेकर उत्साहित थे, इस बीच जोर जोर से भागो और सीटी बजाने की आवाज आने लगी। जब तक लोग कुछ समझ पाते चंद मिनटों में तबाही मच गई।

पूरा गांव सैलाब में बह गया। बच गई तो बस यादें। धराली आपदा को एक माह पूरे हो गए हैं। खीर गंगा में आई भीषण आपदा ने कई घरों को जिंदगी भर न भूलने वाली यादें और गम दे दिया। आपदा के कारणों की जांच के लिए कई टीमें गठित की गई हैं। जो कि अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है।

One month Dharali disaster multi-storey buildings razed ground 62 people buried two bodies how now

करीब 20 से 25 फीट मलबे में कई बहुमंजिला भवन जमींदोज हो गए और इस आपदा में करीब 62 लोग दब गए, जिसमें धराली गांव के आठ लोग भी शामिल हैं। हर्षिल में तेलगाड़ में आई आपदा में सेना के 9 जवान लापता हो गए। अब तक एक माह में दो ही शव बरामद हुए। घटना के करीब दो दिन बाद एक युवक का शव धराली में मलबे से मिला, जबकि 15 दिन बाद हर्षिल से लापता एक जवान का शव झाला के समीप मिला था।

आपदा के बाद प्रशासन की टीम दो दिन बाद धराली पहुंच पाई, एसडीआरएफ और सेना की टीम पहले दिन ही मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू कर पाई। इस बीच कई किमी पैदल चलकर ही लोग धराली पहुंच रहे थे। नेताला, हीना और भटवाड़ी में भी लैंडस्लाइड होने के चलते रेस्क्यू में काफी परेशानी हुई। इसके बाद लेम्छागाढ़ में पुल बहने से संपर्क नहीं हो पाया।

तीसरे दिन ओवर ब्रिज लगने के बाद आवाजाही शुरू हो पाई। इसके बाद करीब एक हफ्ते डबराणी प्वाइंट पर काम हुआ। करीब 20 दिन बाद गंगोत्री हाईवे पर छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू होने पर रसद सामग्री सड़क मार्ग से हर्षिल घाटी में पहुंची। इस दौरान चिन्यालीसौड़ और मातली से हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू हुआ। जिसमें यात्रियों को रेस्क्यू करने के साथ ही स्थानीय लोगों को हेलीकॉप्टर से लाया गया और रसद सामग्री पहुंचाई गई।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कई दिनों तक उत्तरकाशी के मातली में कैंप कर रेस्क्यू अभियान को लीड़ किया। सरकार ने आपदा पीड़ितों को 5-5 लाख रुपए आर्थिक मदद देने का ऐलान किया। हालांकि लोगों ने धराली को विशेष आर्थिक पैकेज देने की मांग की है। स्थानीय लोगों का मानना है कि खीर गंगा के ऊपर ​हिमस्खलन या झील बनने से भयानक मंजर हुआ। जिसने पूरे गांव को ही तबाह कर दिया।

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