नवरात्र स्पेशल: धारी देवी मंदिर, यहां दिन में तीन बार बदलता है मां का रूप, चारधाम की मानी जाती है रक्षक
उत्तराखंड:श्रीनगर से करीब 14 किमी दूरी पर धारी देवी मंदिर
देहरादून, 26 सितंबर। आज से नवरात्र शुरू हो गए हैं। नवरात्र में भक्त माता के मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उत्तराखंड में माता के कई मंदिर हैैं। लेकिन एक मंदिर सबसे खास माना जाता है। वो है श्रीनगर गढ़वाल का धारी देवी मंदिर। इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि यहां देवी मां दिन में तीन स्वरूप बदलती हैं। साथ ही इस देवी को चारधाम की रक्षक देवी कहा जाता है।

मूर्ति दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है
उत्तराखंड के श्रीनगर से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर अलकनंदा नदी के किनारे है धारी देवी मंदिर। यहां माता की मूर्ति दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है। मूर्ति सुबह में एक कन्या की तरह दिखती है, दोपहर में युवती और शाम को एक बूढ़ी महिला की तरह नजर आती है।

गांव वालों को उस जगह पर मूर्ति स्थापित करने का निर्देश
माता के इस चमत्कार को लेकर यहां भक्त दूर-दूर से आते हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भीषण बाढ़ से मंदिर बह गया था। साथ ही साथ उसमें मौजूद माता की मूर्ति भी बह गई और वह धारो गांव के पास एक चट्टान से टकराकर रुक गई। कहते हैं कि उस मूर्ति से एक ईश्वरीय आवाज निकली, जिसने गांव वालों को उस जगह पर मूर्ति स्थापित करने का निर्देश दिया।

मूर्ति के मूल स्थान से हटते ही केदारनाथ में भयानक तबाही
माना जाता है कि धारा देवी की प्रतिमा को 16 जून 2013 की शाम को हटाया गया था और उसके कुछ ही घंटों बाद मूर्ति के मूल स्थान से हटते ही केदारनाथ में भयानक तबाही आई। बाद में उसी जगह पर फिर से मंदिर का निर्माण कराया गया। यह मंदिर देवी काली को समर्पित है।

मंदिर के पास एक प्राचीन गुफा भी
हर साल नवरात्रों के अवसर पर देवी कालीसौर को विशेष पूजा की जाती है। चारधाम यात्रा करने वाले भक्त धारी देवी मंदिर में जरूर माथा टेकते हैं। यहां कई लोग मन्नतें भी मांगते है, मन्नतें पूरी होने पर घंटी भी चढ़ाते हैं। मंदिर के पास एक प्राचीन गुफा भी मौजूद है ।

प्राचीन मंदिर से अपलिफ्ट कर वहां से हटा दिया गया था
6 जून 2013 को आई केदारनाथ आपदा से ठीक पहले धारी देवी की मूर्ति को प्राचीन मंदिर से अपलिफ्ट कर वहां से हटा दिया गया था। श्रीनगर में बन रहे हाइडिल पॉवर प्रोजेक्ट के लिए ऐसा किया गया था। बाद में मूल स्थान पर फिर से मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर के पौराणिक मान्यता और चमत्कार को देखते हुए यहां साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। नवरात्र में यहां ज्यादा भीड़ रहती है।












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