योग के क्षेत्र में 23 हजार से अधिक रोजगार, धामी सरकार का मास्टरस्ट्रोक, युवाओं और महिलाओं को ये बड़ी सौगातें

उत्तराखंड की धामी सरकार ने योग नीति को मंजूरी दे दी है। जो कि देश की पहली योग नीति होगी। इसके माध्यम से राज्य में लगभग 13 हजार से अधिक रोजगार सृजित होंगे, 2500 योग शिक्षकों के लिए योगा सर्टिफिकेशन बोर्ड से प्रमाणित होंगे।

राज्य में 10 हजार से अधिक योग अनुदेशकों को होमस्टे, होटल आदि में रोजगार मिलने की संभावना है। योग पर्यटन को बढ़ावा मिलने से राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम मिलेगा, जन सामान्य में स्वास्थ्य संवर्धन के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, योग शिक्षा में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।

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राज्य को योग के क्षेत्र में वैश्विक पहचान मिलेगी। राज्य सरकार का कहना है कि इस नीति का सबसे बड़ा उद्देश्य है कि योग को केवल एक आध्यात्मिक या व्यक्तिगत साधना तक सीमित न रखते हुए उसे एक सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और पर्यटन-आधारित मॉडल के रूप में विकसित करना है। नीति का विज़न - उत्तराखंड को योग और वेलनेस का वैश्विक केंद्र बनाना है। इस नीति से राज्य को कई प्रकार के सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कैबिनेट द्वारा राज्य की जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड अधिप्राप्ति (प्रोक्योरमैन्ट) नियमावली में संशोधन करते हुए राज्य में 10 करोड़ तक के कार्य अब राज्य के स्थानीय व्यक्तियों या स्थानीय पंजीकृत फर्मों के माध्यम से कराए जाने का निर्णय लिया गया है। इसमें राज्य के स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे तथा उनकी आर्थिकी मजबूत होगी।

कैबिनेट के द्वारा स्वयं सहायता समूहों एवं एमएसएमई को प्रोत्साहित करने तथा स्थानीय उत्पादों को बढावा देने के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूहों एवं एवं एमएसएमई को क्रय वरीयता प्रदान करने के लिए भी नीति का अनुमोदन प्रदान किया गया है। स्वयं सहायता समूहों के लिए पहले इस तरह की कोई विशेष व्यवस्था नहीं थी।

अभी तक स्थानीय स्तर पर स्वयं सहायता समूहों को रू 05 लाख तक की लागत के कार्य दिए जा सकते थे। क्रय वरीयता की नीति लागू होने से राज्य के सरकारी विभागों की निविदा प्रक्रिया में स्वयं सहायता समूहों एवं एमएसएमई को न्यूनतम दर की निविदा से 10 प्रतिशत की सीमा तक क्रय वरीयता मिलेगी। यह निर्णय भी स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने तथा मातृशक्ति को आर्थिक संबल प्रदान करने में मददगार होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये उत्तराखण्ड मेगा इण्डस्ट्रियल एवं इन्वेस्टमेंट नीति-2025 (मेगा पॉलिसी-2025) को भी मंजूरी प्रदान की गयी है। इस योजना का उद्देश्य उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पूंजी निवेश हेतु प्रतिस्पर्धी गंतव्य के रूप में स्थापित करने तथा वृहत श्रेणी के विनिर्माणक उद्यम में पूंजी निवेश के लिये अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करते हुये राज्य का आर्थिक विकास एवं अतिरिक्त रोजगार अवसरों का सृजन करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्थानीय उत्पादों के उत्पादन विपणन एवं गुणवत्ता परीक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। राज्य में जल संरक्षण, जल संचय एवं वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम आयोजित कर एक पेड़ मां के नाम कार्यक्रम के तहत इस दिशा में प्रभावी पहल किए जाने के प्रति भी संकल्प व्यक्त किया गया है।

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