BSP Chief Mayawati के नए सियासी कदम का सियासत में क्या पड़ेगा असर, युवा नेतृत्व के साथ हाथी चढ़ेगा पहाड़!
BSP Party Chief Mayawati News मायावती ने अपने भतीजे और पार्टी के नेशनल कोआर्डिनेटर आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है। हालांकि बसपा के सबसे जनाधार वाले राज्य उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कमान मायावती के हाथ में ही रहेगी। मायावती के इस निर्णय का लोकसभा या आने वाले समय पर उत्तराखंड की सियासत पर क्या पड़ेगा। इसको लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। हालांकि युवा नेतृत्व को लेकर बसपा के कार्यकर्ता काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।

लक्सर विधायक शहजाद ने मायावती के इस फैसले का स्वागत किया है। वन इंडिया से बातचीत में विधायक शहजाद का कहना है कि युवा नेतृत्व के आने से पार्टी में नई ऊर्जा का संचार होगा। उन्होंने कहा कि आकाश आनंद युवा हैं जिसका फायदा पार्टी को जरुर होगा। उन्होंने इस बात का भी स्वागत किया कि यूपी और उत्तराखंड को मायावती का मार्गदर्शन मिलता रहेगा। शहजाद ने लोकसभा चुनाव की तैयारियां को लेकर भी प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में बेहतर प्रदर्शन करने की बात कही।
उत्तराखंड में बहुजन समाज पार्टी का जनाधार हरिद्वार और उधमसिंह नगर जिलों में है। लेकिन पहाड़ पर बसपा अब तक कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाई है। पार्टी का जनाधार सीटों के मामले में पिछले विधानसभा चुनाव में यूपी से बढ़ा है। बसपा के दो विधायक लक्सर से मोहम्मद शहजाद जीते मंगलौर से सरवत करीम अंसारी विजयी हुए। हालांकि सरवत करीम अंसारी का बीते दिनों बीमारी की वजह से निधन हो गया। इस सीट पर जल्द ही उपचुनाव होना है। इसके साथ ही बसपा हरिद्वार जिले की दो अन्य सीटों खानपुर और भगवानपुर पर दूसरे स्थान पर रही।
उत्तराखंड में 70 सीटों में से बसपा ने 2 सीट हासिल की हैं। भाजपा 47, कांग्रेस 19, बसपा 2 और निर्दलीय 2 सीटें जीतकर आए हैं। बसपा को यहां पर 2,59,371 वोट मिले। जो कि 4.82 परसेंट है। बसपा उत्तराखंड में 2002 से 2012 तक शानदार प्रदर्शन करती आ रही है। 2017 में पार्टी का उत्तराखंड में खाता नहीं खुला। लेकिन इस बार बसपा ने उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे।
जिनमें से 2 विधायक चुने गए। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि उत्तराखंड की एक मात्र क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल ने 51 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी सीट जीतकर नहीं आए है। आम आदमी पार्टी ने भी 70 सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतारे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाए। आप ने उत्तराखंड में 3.31 परसेंट वोट हासिल किए हैं।
उत्तराखंड में 2002 से 2012 तक तीसरे दल ने किंगमेकर की भूमिका निभाई है। जिसमें बसपा और यूकेडी दोनों ही शामिल रही हैं। उत्तराखंड में पहला चुनाव 2002 में हुआ। तब भाजपा, कांग्रेस और बसपा में त्रिकोणीय मुकाबला हुआ। कांग्रेस 36, भारतीय जनता पार्टी ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की, बहुजन समाज पार्टी 7 सीट जीती।
2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने और भी बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई। इस चुनावों में बसपा के 8 विधायक जीते। 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा 3 विधायकों पर सिमट गई, लेकिन इस बार बसपा ने किंग मेकर की भूमिका निभाई और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सरकार में शामिल हुई।
2017 में बसपा का उत्तराखंड से सूपड़ा साफ हो गया। इस बार बसपा ने अपना प्रदर्शन सुधारते हुए 2 सीटें जीत ली हैं। क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल का भी हर चुनाव में प्रदर्शन गिरता रहा। 2002 के विधानसभा चुनाव में यूकेडी के चार विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2007 के चुनाव में 3 यूकेडी के 3 विधायक ही जीतकर आए। जबकि 2012 में एक और 2017 में कोई विधायक चुनाव जीतकर नहीं आया। इस बारभी यूकेडी का सुपड़ा साफ हो गया है।
उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद वर्ष 2002 में राज्य के पहले चुनावों में बसपा ने 11.2 फीसदी वोट शेयर हासिल करते हुए सात सीटें जीतीं। इसमें हरिद्वार से पांच और उधम सिंह नगर जिले की दो सीटें शामिल थी। वर्ष 2007 में यह बढ़कर 11.7 फीसदी हो गया और पार्टी ने आठ सीटों पर जीत हासिल की। यह अब तक का बसपा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
2012 के चुनाव में बसपा का वोट शेयर बढ़कर 12.3 फीसदी हो गया। लेकिन, पार्टी को केवल सिर्फ तीन सीटें मिल सकीं। ये सभी हरिद्वार से मिली। वर्ष 2017 में बसपा इस राज्य में अपना खाता भी खोलने में कामयाब नहीं हुई। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने प्रदेश की 70 में से 54 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इन सीटों पर पार्टी को 4.8 फीसदी का वोट शेयर मिला। पार्टी दो सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल हुई।












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