दिवाली के एक माह बाद यहां मनाई जाएगी मंगसीर की बग्वाल, जानिए क्या है परंपरा और इस बार आकर्षण
उत्तरकाशी में तिब्बत विजय का उत्सव मंगसीर की बग्वाल कार्तिक दीपावली से एक माह बाद मनाया जाता है। दिवाली पर्व के ठीक एक माह बाद उत्तरकाशी जिले में मंगसीर बग्वाल मनाई जाती है। इस साल 12 दिसम्बर को बडी बग्वाल मनाई जाएगी जिसमें कई जानी-मानी हस्तियों के उत्तरकाशी पहुंचकर प्रतिभाग करने की उम्मीद है।

उत्तरकाशी में इस बार 10, 11 व 12 दिसम्बर 2023 को मनाया जाएगा। कार्यक्रम के संयोजक अजय पुरी ने बताया कि इस वर्ष भी गढ भोज, गढ संग्रहालय के साथ ही बाल वर्ग मे राज, मुर्गा झपट, पिट्ठू गरम जैसे पुराने खेलों का आयोजन किया जायगा वहीं ओपन वर्ग मे 12 दिसम्बर को रस्साकशी प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र होगी। जिसमें पुलिस, आईटीबीपी, आर्मी, पूर्व सैनिकों, एनआईएम आदि टीमों द्वारा प्रतिभाग किया जाएगा। इस बार बाल वाद्य यंत्र प्रतियोगिता भी कार्यक्रम का आकर्षण का केंद्र रहेगी.
स्थानीय लोग बताते हैं कि वर्ष 1632 में गढ़वाल नरेश राजा महिपत शाह के शासनकाल में तिब्बत के दावा घाट में गढ़वाल और तिब्बत की सेना के बीच युद्ध हुआ था। गढ़वाल की ओर से सेनापति लोदी रिखोला और माधो सिंह भंडारी के नेतृत्व में गढ़वाल की सेना युद्ध लड़ने गई थी।
युद्ध लंबा चलने पर सेना दीपावली तक घर नहीं लौट पाई थी। तब सेनापति माधो सिंह भंडारी ने संदेश भिजवाया था कि तिब्बत पर विजय हासिल कर लौटने के बाद ही बग्वाल मनाई जाएगी। गढ़वाल की सेना दीपावली के ठीक एक माह बाद तिब्बत पर विजय हासिल कर लौटी थी। तभी से मंगसीर की बग्वाल मनाने की परंपरा चली आ रही है।
उत्तराखंड के टिहरी जनपद के बूढ़ाकेदार क्षेत्र में मंगशीर की दीपावली धूमधाम से मनाई जाती है। स्थानीय लोग कार्तिक की दीपावली के बजाय मंगशीर की दीपावली के लिए गांव आते हैं। इस दीपावली को मनाने की पीछे यहां के ईष्ट देवता गुरु कैलापीर हैं। उन्हीं के नाम से यहां पर मेला भी होता है। बग्वाल के लिए भैले तैयार किए जाते हैं। इसे गांव में पास खेतों में सामूहिक रूप से खेला जाता है।












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