उत्तराखंड के इन कर्मचारियों से सीखें, आंदोलन के समय भी दे रहे प्रकृति संरक्षण का संदेश
संयुक्त कर्मचारी महासंघ आंदोलन के साथ कर रहे पौधरोपण
देहरादून,4 सितंबर। उत्तराखंड में कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर आए दिन सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन कर कामकाज भी ठप करते हैं। लेकिन संयुक्त कर्मचारी महासंघ कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) और गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन)के कर्मचारियों ने अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर एक अनूठी पहल की है। कर्मचारी सरकार से अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए दो घंटे का कार्यबहिष्कार करने के साथ ही पौधरोपण का काम भी कर रहे हैं। इतना ही नहीं कर्मचारी कार्यबहिष्कार करने के अलावा उतने ही समय अतिरिक्त काम भी कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उत्तराखंड को हड़ताली प्रदेश के नाम से नहीं पुकारा जाना चाहिए, ऐसे में उन्होंने ये पहल की है। अब कर्मचारियों ने ज्ञापन देने के साथ अधिकारियों को भी एक-एक पौधा देने और पौधारोपण करने के अलावा पौधों को संरक्षित करने का निर्णय लिया है।

जिलेवार कर रहे प्रदर्शन
बीते 26 अगस्त से अपनी 12 सूत्री मांगों के लिए संयुक्त कर्मचारी महासंघ के बैनर तले संयुक्त कर्मचारी महासंघ कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) और गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन)के साढ़े 4 हजार कर्मचारी आंदोलनरत हैं। कर्मचारी जिलेवार कार्यबहिष्कार कर रहे हैं। लेकिन इन कर्मचारियों ने पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल पेश की है। कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुरुरानी ने कहा कि उत्तराखंड को हड़ताली प्रदेश कहा जाने लगा है। जो कि सही नहीं है। ऐसे में उनके संगठन ने आंदोलन के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश देने का निर्णय लिया। साथ ही कोरोनाकाल में सभी कर्मचारियों ने कोरोना वॉरियर्स के रुप में काम किया तो जिस तरह से लोगों को आॅक्सीजन की कमी हुई। ऐसे में पौधे लगाना समय की आवश्यकता बन गई है। जिसके लिए वे सभी कर्मचारी अपनी सामाजिक उत्तरदायित्व को समझते हुए पौधरोपण करवा रहे हैं। साथ ही सभी अधिकारी कर्मचारियों से भी पौधारोपण करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब सभी कर्मचारी न केवल पौधारोपण करेंगे बल्कि उनकी देखभाल का जिम्मा संभालेंगे।
संयुक्त कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुरुरानी ने कहा कि
उत्तराखंड को हड़ताली प्रदेश कहा जाने लगा है। जो कि सही नहीं है। हमनें संगठन ने आंदोलन के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश देने का निर्णय लिया। सभी कर्मचारी अपनी सामाजिक उत्तरदायित्व को समझते हुए पौधरोपण कर रहे हैं। साथ ही सभी अधिकारी कर्मचारियों से भी पौधारोपण करवा रहे हैं। हम सिर्फ फोटो खिंंचवाने के लिए पौधराेपण नहीं कर रहे हैं, हम पौधोंं की देखभाल भी करेंगे। हम अपने आंदोलन से मिसाल पेश करेंगें। आंदोलन के साथ यह काम भी चलता रहेगाा
ये हैं मांगें-
-दोनों निगमों का एकीकरण कर उत्तराखंड पर्यटन परिषद में समायोजन किया जाए।
-पर्यटक आवास गृह या निगम की इकाइयों को निजी क्षेत्र में न देने की मांग
-दोनों निगमों की वेतन विसंगति सुलझाएं
-दैनिक वेतन पर वर्षों से काम कर रहे निगम कर्मियों का नियमितीकरण ---संविदा कर्मियों का न्यूनतम वेतन 25 हजार करने की मांग
-कोरोना काल में दोनों निगमों को पर्यटन क्षेत्र में हुए नुकसान के मद्देनजर सेवानिवृत्त कर्मियों के देयकों के भुगतान करने के लिए 50-50 करोड़ का पैकेज
- निगम की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए एफएलटू, रेत खनन, परीक्षण के निर्माण संबंधी कामों का आवंटन।
- कोरोना योद्धा घोषित कर अतिरिक्त मानदेय दिया जाए।












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