जानिए कौन हैं प्रेमचंद अग्रवाल, चार बार के ​MLA, स्पीकर, कैबिनेट मंत्री होने के बाद भी विवादों से रहा खास नाता

Premchand Agarwal controversies: उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने सीएम पुष्कर सिंह धामी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। बजट सत्र के दौरान अग्रवाल के एक विवादित बयान के बाद से प्रदेश भर में बवाल मचा हुआ था। हर तरफ अग्रवाल के इस्तीफे को लेकर प्रेशर बनाया जा रहा था।

आखिरकार आज प्रेमचंद अग्रवाल ने इस्तीफा सौंप दिया। अग्रवाल धामी सरकार में वित्त और संसदीय कार्य जैसे अहम विभाग संभाल रहे थे। ये पहली बार नहीं है जब अग्रवाल किसी विवाद में फंसे और इस्तीफे की मांग हुई। इससे पहले भी कई बार अग्रवाल विवादों में फंसते रहे। हालांकि इस बार उत्तराखंड को लेकर दिए उनके एक विवादित बयान से मामला बिगड गया।

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इससे पहले प्रेमचंद अग्रवाल पर मारपीट का मुकदमा तक दर्ज हो चुका है। मई 2023 में अग्रवाल पर एक व्यक्ति के साथ मारपीट करने का वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हुआ था। प्रेमचंद्र अग्रवाल के ऋषिकेश में एक स्थानीय व्यक्ति के साथ मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हुआ। जिसमें पहले मंत्री ने एक व्यक्ति के साथ मारपीट की इसके बाद मंत्री के सुरक्षाकर्मियों ने भी जमकर हाथ पांव चलाए।

हालांकि तब अग्रवाल का आरोप था कि व्यक्ति पर गाली गलौज करने के साथ ही अभद्रता करने का आरोप लगाया। इससे पहले भी कई बार अग्रवाल धामी सरकार को मुश्किल में डाल चुकें हैं। विधानसभा में हुई तदर्थ नियुक्तियां रद्द होने के बाद,र इस्तीफे का दबाव बना इससे पहले विधानसभा में 2021 व 2022 में हुई तदर्थ नियुक्तियां रद्द होने के बाद तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल पर इस्तीफे का दबाव बना। कांग्रेस, यूकेडी व अन्य दलों से उनके इस्तीफे मांग की।

विधानसभा में बैक डोर भर्ती विवाद के गरमाने के बाद तत्कालीन स्पीकर व कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल लगातार चर्चाओं में आते गए। बैकडोर नियुक्तियों पर पहले उनका विवादित बयान आया और उसके बाद शहरी विकास विभाग में 70 से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों के तबादला आदेश पर मुख्यमंत्री की ओर से रोक लगाने का मामला गरमाया। फिर एक कंपनी के खर्च पर उनकी और उनके विभाग के अफसरों की जर्मनी यात्रा को लेकर भी खूब चर्चाएं हुईं।

सितंबर 2022 में शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के अनुमोदन के बाद नगर निकायों में केंद्रीयत सेवा के 74 कार्मिकों के तबादले होने के बाद राज्य सरकार ने इस पर एक्शन लेते हुए तबादलों को 24 घंटे के अंदर स्थगित कर दिए गए। ये तबादले मंत्री ने विदेश दौरे पर जाने से ठीक पहले किए। ऐसे में ये पूरी कार्रवाई सवालों के घेरे में रही। मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल तबादले करने के बाद सात दिवसीय दौरे पर जर्मनी रवाना हो गए थे। साल 2018 में स्पीकर रहते हुए उन पर अपने बेटे को जल संस्थान में नौकरी दिलाने का भी मामला सामने आया था।

जानिए कौन हैं प्रेमचंद अग्रवाल
चार बार के विधायक प्रेमचंद्र अग्रवाल उत्तराखंड में बीजेपी के पुराने और कद्दावर नेता माने जाते हैं। अग्रवाल मूल रूप से देहरादून जिले के डोईवाला के रहने वाले है। जिनकी संघ से खास रिश्ता रहा है। छात्र जीवन में उन्होंने एबीवीपी के साथ अपनी राजनीति शुरू की थी। साल 1980 में वह डोईवाला में एबीवीपी के अध्यक्ष थे। प्रेमचंद्र अग्रवाल साल 1995 में देहरादून जिला में बीजेपी के प्रमुख रहे।

इसके अलावा वह उत्तराखंड आंदोलन के काफी सक्रिय नेता रहे हैं। साल 2007 में वह पहली बार ऋषिकेश से बीजेपी के विधायक बने। सरकार ने उन्हं संसदीय सचिव भी बनाया। साल 2012 में वह फिर चुनाव लड़े और जीते। 2017 और 2022 के चुनाव में भी उन्होंने अपनी सीट से जीत दर्ज की। वह उत्तराखंड विधानसभा के स्पीकर भी रह चुके हैं। वर्तमान में वह वित्त और संसदीय कार्य मंत्री समेत कई विभाग संभाल रहे थे।

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