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जानिए क्या है केदारनाथ रूप छड़ विवाद, जिसको लेकर मचा है बवाल, क्या है परंपरा, रावल और मंदिर समिति के क्या दावे

Kedarnath Roop Chhad controversy केदारनाथ धाम के रूप छड़ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया में रूप छड़ को महाराष्ट्र ले जाने के दावे को लेकर सरकार और प्रशासन हरकत में आ गया है। सरकार की ओर से इस प्रकरण की जांच करने की बात की जा रही है।

केदारनाथ मंदिर के रावल भीमाशंकर लिंग ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया देकर स्थिति साफ करने की कोशिश की है। परंपरा के अनुसार धर्म प्रचार के लिए रावल को रूप छड़ी, मुकुट और अन्य धार्मिक सामग्री अपने साथ ले जाने का अधिकार है।

Kedarnath Roop Chhad controversy caused stir tradition claims Rawal temple committe Bhimashankar

कपाट बंद होने के बाद शीतकाल में उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में मुकुट धारण की परंपरा निभाई जाती है। इसी परंपरा के तहत वे धार्मिक कार्यक्रमों में रूप छड़ी और मुकुट के साथ शामिल होते रहे हैं। रावल ने बताया कि इसी परंपरा के तहत वर्ष 2016 में महाराष्ट्र के नांदेड़ में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में भी वे रूप छड़ी और मुकुट के साथ शामिल हुए थे।

इसी क्रम में इस वर्ष भी पांच से 12 फरवरी तक नांदेड़ (महाराष्ट्र) में आयोजित शिव कथा और विश्व शांति यज्ञ कार्यक्रम में वे इन धार्मिक प्रतीकों के साथ सम्मिलित हुए थे। उन्होंने कहा कि फरवरी माह में रूप छड़ी की विधिवत साधना की गई और बाद में इसे नियमानुसार जमा कर दिया गया है। इसलिए सोशल मीडिया में रूप छड़ी के गायब होने की जो बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं।

बदरी केदार मंदिर समिति के अनुसार नांदेड़ ( महाराष्ट्र) में आयोजित शिव कथा तथा विश्व शांति यज्ञ धार्मिक समारोह में भी रावल भीमाशंकर लिंग मुकुट और रूप छड़ी के साथ शामिल हुए। वर्तमान में भीमाशंकर लिंग ही केदारनाथ धाम के रावल हैं, इसलिए वह धार्मिक परंपराओं के तहत इन प्रतीकों के साथ कार्यक्रमों में सम्मिलित हुए। बीकेटीसी ने कहा कि कार्यक्रम के बाद उनके द्वारा मुकुट और रूप छड़ी को सुरक्षित रूप से शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर के कार्यालय में जमा कर दिया गया है।

बताया गया है कि साल 2016 में इसको लेकर बदलाव हुआ है। जिसके अनुसार रूपछड़ को विशेष परिस्थितियों में धाम से बाहर ले जाने की अनुमति पहले ही दी जा चुकी थी। केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग के अनुसार, धार्मिक परंपराओं के अनुसार रावल के कुछ विशेष आभूषण और प्रतीक होते हैं, जिनका उपयोग धार्मिक कार्यक्रमों में किया जाता है। भीमाशंकर लिंग ने कहा कि रूप छड़ रावल का एक आभूषण है और इसे धार्मिक कार्यक्रम में ले जाना परंपरा का उल्लंघन नहीं है। उनका कहना है कि यह रावल के सम्मान का प्रतीक है और परंपरा के अनुरूप ही इसका उपयोग किया जाता रहा है।

बता दें कि कुछ दिन पहले केदारनाथ मंदिर से जुड़े धार्मिक प्रतीक रूप छड़ को एक धार्मिक कार्यक्रम के लिए महाराष्ट्र ले जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस मामले में कुछ लोगों ने इसे परंपरा के खिलाफ बताते हुए विरोध जताया था। कहा गया था कि साल 2000 के बाद से ऐसी परंपरा नहीं रही और रूप छड़ को धाम से बाहर ले जाना नियमों के विरुद्ध है।

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