Kedarnath के क्षेत्रपाल भकुंट भैरव के कपाट शीतकाल के लिए बंद, यहां दर्शन किए बिना यात्रा है अधूरी, ये है रहस्य

केदारनाथ धाम के क्षेत्रपाल भगवान भकुंट भैरव के कपाट विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। शनिवार को दोपहर एक बजे से भकुंड भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू हुई। इस मौके पर भगवान भैरवनाथ जी का आह्वान करते हुए पूजा-अर्चना के साथ ही उनका अभिषेक कर आरती की गई। इसके साथ ही विश्व कल्याण के लिए यज्ञ-हवन किया गया। इसके बाद अपराह्न 3 बजे विधि-विधान से क्षेत्रपाल के रूप में पूजनीय भगवान भकुंड भैरव के विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए।

Kedarnath Kshetrapal Bhakunt Bhairav doors closed winter journey incomplete without visiting mystery.

भगवान शिव के 12 ज्योर्तिलिंग में से एक केदारनाथ धाम के प्रति भक्तों की असीम आस्था है। पौराणिक मान्यता है कि केदारनाथ से पहले भुकुंट भैरव भैरवनाथ की पूजा की जाती है। साथ ही इनके बिना भगवान शिव का दर्शन अधूरा माना गया है। मान्यता है कि ये शीतकाल में केदारनाथ मंदिर की रखवाली करते हैं।

हिंदू धर्म की मान्‍यताओं के अनुसार, देश में जहां-जहां भगवान शिव के सिद्ध मंदिर हैं, वहां-वहां कालभैरवजी के मंदिर भी हैं। भक्‍त भगवान शिव के दर्शन के साथ भैरव जी के मंदिर में आकर सिर झुकाते हैं तब उनकी तीर्थ यात्रा पूर्ण मानी जाती है। इसी तरह केदारनाथ में भी भुकुंट भैरव भैरवनाथ का मंदिर है।

केदारनाथ का पहला रावल यहां हर साल केदारनाथ के कपाट खुलने से पहले भैरव मंदिर में पूजापाठ की जाती है। भुकुंट बाबा को केदारनाथ का पहला रावल माना जाता है। उन्‍हें यहां का क्षेत्रपाल माना जाता है। बाबा केदार की पूजा से पहले केदारनाथ भुकुंट बाबा की पूजा किए जाने का विधान है और उसके बाद विधिविधान से केदानाथ मंदिर के कपाट खोले जाते हैं।

बिना छत के स्‍थापित की गई मूर्तियां भुकुंट भैरव का यह मंदिर केदारनाथ मंदिर से आधा किमी दूर दक्षिण दिशा में स्थित है। यहां मूर्तियां बाबा भैरव की हैं जो बिना छत के स्‍थापित की गई हैं। भैरव को भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है।

श्रीकेदारनाथ धाम के कपाट भैयादूज के पावन पर्व पर 15 नवंबर को बंद कर दिए जाएंगे। इसी दिन बाबा केदार की चल उत्सव विग्रह डोली धाम से अपने शीतकालीन गद्दीस्थल के लिए प्रस्थान करते हुए रात्रि प्रवास के लिए पहले पड़ाव रामपुर पहुंचेगी।

श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कार्यधिकारी रमेश चंद्र तिवारी व मीडिया प्रभारी डा. हरीश चंद्र गौड़ ने बताया कि भगवान भकुंड भैरव जी के कपाट बंद होने के बाद भी केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद होने तक बाबा केदार की विधिवत पूजा-अर्चना और सांयकालीन आरती होती रहेगी।

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