केदारनाथ उपचुनाव: जानिए परिणाम के क्या हो सकते हैं मायने,क्यों सियासी तस्वीर बदलने की हो रही चर्चा

केदारनाथ उपचुनाव के लिए वोटिंग होने के बाद अब सबकी निगाहें 23 नवंबर पर टिक गई हैं। जब उपचुनाव की मतगणना होगी। दोपहर तक परिणाम सामने होंगे। इस बीच सब हार जीत की गणित में जुटे हैं। मतदान कम हुआ है लेकिन उपचुनाव के लिहाज से मत प्रतिशत को कम नहीं माना जा रहा है।

ऐसे में परिणाम चौंकाने वाले भी हो सकते हैं। जो कि प्रदेश के साथ ही देश की सियासत की तस्वीर को भी बदल सकते हैं। ऐसा क्यों माना जा रहा है कि आइए जानते हैं केदारनाथ उपचुनाव परिणाम के मायने।

Kedarnath by-election Know what results could mean why talk of changing the political picture

लोकसभा चुनाव में जब भाजपा अयोध्या सीट हारी तो विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया। विपक्ष का दावा था कि सनातन की बात करने वाली भाजपा अयोध्या सीट हार गई। ये चुनाव ऐसे समय में हुए सालों से श्री राम के मंदिर का इंतजार कर रहे सनातनियों का सपना पूरा हुआ और अयोध्या में रामलला विराजमान हो गए। ये भाजपा सरकार में हुआ। लेकिन जिस तरह से लोेकसभा सीट हारी उसके बाद कई तरह के सवाल खड़े होने लगे।

इसके बाद अचानक लोकसभा चुनाव के दौरान बदरीनाथ सीट से कांग्रेस के विधायक राजेंद्र भंडारी ने इस्तीफा देकर भाजपा ज्चाइन कर ली। उपचुनाव में राजेंद्र भंडारी ने भाजपा से फिर चुनाव लड़ा लेकिन वे कांग्रेस के लखपत बुटोला से चुनाव हार गए। कांग्रेस को फिर से भाजपा पर हमला करने का मौका मिल गया। बदरीनाथ सीट जीतने पर कांग्रेस ने हिंदू और सनातनी वोट का भाजपा से मोहभंग होने का दावा किया।

ये जीत इस मायने में भी महत्वपूर्ण है, अयोध्या व बदरीनाथ हिंदू और सनातन धर्म के आस्था का केंद्र है। अब केदारनाथ में दिवंगत विधायक शैलारानी रावत के निधन के बाद उपुचनाव हुआ। जिसके परिणाम पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। माना जा रहा है कि केदारनाथ की जीत और हार प्रदेश सरकार का भविष्य भी तय करेगा। इसके साथ ही कांग्रेस का उत्तराखंड में भविष्य भी परिणाम पर निर्भर करेगा।

कांग्रेस के लिए राहत की बात ये जरुर है कि इस बार उपचुनाव में सारे गुट एक होकर केदारघाटी में नजर आए। जो कि आने वाले चुनाव के लिए अच्छे संकेत माने जा रहे हैं। अब बात परिणाम के बाद सियासत पर क्या असर पड़ेगा।

उत्तराखंड विधानसभा के 2022 में जब चुनाव हुए तो 70 में से भाजपा ने 47 सीटें जीती, जबकि कांग्रेस ने 19 और 4 सीटें अन्य के खाते में गई। वर्तमान में भाजपा की 69 सीटों में से 46, कांग्रेस की 20 और अन्य की तीन सीटें हैं। केदारनाथ सीट उपचुनाव के परिणाम इस तस्वीर को बदल सकते है। भाजपा जीती तो भाजपा पहले की तरह मजबूत हो जाएगी और कांग्रेस जीती तो विपक्ष मजबूत हो जाएगा।

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