कैंची धाम के 60वां स्थापना दिवस पर उमड़ा आस्था का सैलाब,विराट से लेकर ये विदेशी हस्तियां हैं बाबा के भक्त
कैंची धाम का आज 60वां स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। आज सुबह से ही नीब करौरी बाबा के दरबार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है।
बाबा के दर्शन को सुबह 5 बजे से ही भक्तों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। प्रशासन और मंदिर समिति को इस बार दो लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने का अनुमान जताया है।

कैंची धाम में सुबह 5.30 बजे बाबा नीब करौरी महाराज को भोग लगाने के बाद मालपुए का प्रसाद बंटना शुरू हो गया है। रात 9 बजे तक मालपुए का प्रसाद बंटेगा। उन्होंने कहा कि इस बार 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
20 हजार श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा का पाठ किया
शुक्रवार की शाम को देश के कोने-कोने से पहुंचे 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने रात भर हनुमान चालीसा का पाठ किया। बाबा के जयकारों से कैंची धाम गूंज उठा। कैंची मेले की यातायात और सुरक्षा व्यवस्था के लिए एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा खुद मोर्चा संभाले हुए नजर आए।
मार्क जुकरबर्ग और स्टीव जॉब्स भी भक्त
कैंची धाम आश्रम के बाबा नीम करोली महाराज की ख्याति देश ही नहीं विदेशों तक है। मान्यता है कि यहां आने वाले हर भक्त की मुराद पूरी होती है और कोई खाली हाथ नहीं लौटता है। नीम करोली बाबा को उनके भक्त हनुमान जी का अवतार मानते हैं। विराट कोहली ही नहीं फेसबुक से संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और एपल के फाउंडर स्टीव जॉब्स भी उनके भक्त हैं।
1964 में कैंची धाम की स्थापना
नीम करोली पहली बार 1961 में यहां आए थे और उन्होंने 1964 में कैंची धाम की स्थापना अपने मित्र पूर्णानंद के साथ मिलकर की थी। नैनीताल से लगभग 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है 'कैंची धाम'। बाबा की चमत्कारिक कहानियां प्रचलित बाबा नीम करोली के बारे में कई चमत्कारिक कहानियां प्रचलित हैं। उनको मानने वाले कई घटनाएं बताते हैं।
'मिराकल ऑफ लव' में है बाबा के चमत्कार
बताया जाता है कि एक बार उनके भंडारे में घी कम पड़ गया था। बाबा ने अपने भक्तों से शिप्रा नदी से पानी लाकर कड़ाही में डालने के लिए कहा और फिर उन्होंने इसे घी में बदल दिया था। बाबा नीम करोली के जीवन से जुड़ी चमत्कारिक घटनाओं के बारे में किताब भी लिखी गई है जिसका नाम 'मिराकल ऑफ लव' है।
स्टीव जॉब्स 1973 में भारत की यात्रा पर आए
फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग भी नैनीताल स्थित बाबा नीम करोली के मंदिर में माथा टेकने गए थे। मार्क को बाबा नीम करोली के आश्रम जाने की सलाह स्टीव जॉब्स ने दी थी। एप्पल के सीईओ स्टीव जॉब्स 1973 में भारत की यात्रा पर आए थे।
धाम में आया एपल का आइडिया
कई असफलताओं के बाद जॉब्स ने सन्यास लेने के मन बना लिया था। वह नीम करोली बाबा के दर्शन करने पहुंचे थे, लेकिन बाबा देहांत हो चुका था। बताया जाता है स्टीव जॉब्स कुछ दिन आश्रम में रुके और ध्यान- योग किया। इसी दौरान उन्हें एपल का आइडिया आया।












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