Joshimath sinking: आपदा को एक माह पूरे, प्रभावितों को पुर्नवास और विस्थापन का इंतजार, सरकार ने उठाए ये कदम
जोशीमठ में 2 जनवरी की रात दरारें बड़ी नजर आने लगी। आपदा प्रभावित एक माह से राहत शिविर में रह रहे हैं। अब सरकार की रिपोर्ट का इंतजार है। जिसके बाद पुर्नवास और विस्थापन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

जोशीमठ में भू धंसाव और दरार की समस्या का एक माह समय पूरा हो चुका है। हालांकि समस्या पहले से भी नजर आ रही थी, लेकिन 2 जनवरी की रात दरारें बड़ी नजर आने लगी। जिस कारण इस समस्या पर सबकी नजर पड़ी और जोशीमठ की आपदा पूरे देश के लिए एक बड़ी आपदा बन गई। आपदा प्रभावित एक माह से राहत शिविर में रह रहे हैं। अब सरकार की रिपोर्ट का इंतजार है। जिसके बाद पुर्नवास और विस्थापन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

2 जनवरी की रात सामने अचानक बड़ी-बड़ी दरारें
पहले से भू धंसाव और दरार की समस्या से जूझ रहे जोशीमठ के लोगों के लिए 2 जनवरी की रात बड़ी चिंता बनकर सामने आई। जब मनोहर बाग, सिंहधार और सुनील वार्ड के कई मकानों में अचानक बड़ी-बड़ी दरारें आ गई थीं। कुछ लोगों ने रात में ही घर छोड़ दिए थे। दो जनवरी की रात को ही मारवाड़ी वार्ड के जेपी कॉलोनी में पानी का रिसाव शुरू हुआ और जिसके बाद कई भवन रहने लायक नहीं रहे। प्रशासन ने अगले दिन यहां के कई परिवारों को राहत शिविरों में भेजना शुरू कर दिया था।
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प्रशासन ने सरकार को 3 विकल्प सुझाए हैं
प्रशासन ने सरकार को 3 विकल्प सुझाए हैं। लेकिन ये विकल्प पहले कैबिनेट के सामने रखे जाएंगे। इसके बाद ही इन पर निर्णय होगा। हालांकि इन विकल्पों से अभी कोई भी संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। प्रशासन की ओर से उद्यान विभाग की जमीन पर प्री फेब्रिकेटेड भवन के मॉडल बनाने का काम अंतिम चरण में है। 8 एजेंसियों की टीमें जोशीमठ में जांच के लिए पहुंचीं थीं लेकिन अभी किसी भी संस्था की रिपोर्ट नहीं आई है। होटल माउंट व्यू और मलारी इन भू-धंसाव के कारण दिसंबर महीने में ही तिरछे हो गए थे जिससे इनकी छतें आपस में मिल गई थीं।

2 जनवरी से होटलों के ध्वस्तीकरण का काम शुरू
प्रशासन ने 12 जनवरी से होटलों के ध्वस्तीकरण का काम शुरू किया था और दोनों होटलों को तोड़ने का काम अभी भी जारी है। इसके साथ ही एक माह में दो आवासीय भवन और लोक निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस ध्वस्त किया गया है। वहीं, जेपी कॉलोनी में भी 15 आवासीय भवनों को तोड़ा जा रहा है।

NDMA की बैठक चार फरवरी को दिल्ली में
जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति का धरना एक माह से जारी है। आपदा प्रभावितों की मांग है कि जल्द से जल्द पुनर्वास कर मुआवजा दिया जाए। साथ ही एनटीपीसी की परियोजना और हेलंग मारवाड़ी बाईपास के निर्माण को बंद किया जाए। जोशीमठ को लेकर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की बैठक चार फरवरी को दिल्ली में होने जा रही है। इस बैठक में वर्चुअल माध्यम से प्रदेश के मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू, सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा के अलावा जोशीमठ का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

भूधंसाव की बारीकी से अध्ययन करने के लिए 8 संस्थानों को जिम्मेदारी
एनडीएमए की ओर से जोशीमठ में हो रहे भूधंसाव की हर पहलू से बारीकी से अध्ययन करने के लिए आठ संस्थानों सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई), रुड़की, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (डब्ल्यूआईएचजी), देहरादून, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी), रुड़की, नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनजीआरआई) हैदराबाद, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (एनआईएच), रुड़की, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई), देहरादून, सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी), देहरादून, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (आईआईआरएस), देहरादून को जिम्मेदारी सौंपी हुई है। इन संस्थानों ने अपनी प्राथमिक रिपोर्ट एनडीएमए को सौंप दी थी।

धामी सरकार से लेकर मोदी सरकार लगातार मॉनिटरिंग कर रही
जोशीमठ प्रकरण को लेकर प्रदेश की धामी सरकार से लेकर केन्द्र की मोदी सरकार लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोशीमठ की समस्या को देखते हुए खुद जोशीमठ में प्रवास किया और हाईलेवल की मीटिंग की। पीएमओ ने भी इस प्रकरण पर बैठक कर जरुरी गाइडलाइन दी। इसके साथ ही सीएम धामी ने जोशीमठ की पूरी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को दी है।

धामी सरकार ने अब तक जोशीमठ को लेकर कई निर्णय लिए
- एनटीपीसी की जल विद्युत परियोजना, हेलंग मारवाड़ी बाईपास समेत अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स पर रोक
- पुनर्वास के लिए पांच स्थानों पर कोटी फार्म, पीपलकोटी, गोचर, गौख सेलंग, ढाक गांव का जीएसआई से सर्वे कराने को मंजूरी
- चयनित भूखंडों पर सर्वे के बाद प्री-फेब्रीकेटेड स्ट्रक्चर्स बनाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
- भू स्वामी प्रभावितों के किराये के मकान में निवास करने पर 4000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। यह किराया उन्हें छह माह तक मिलेगा।
- राहत शिविरों में प्रत्येक प्रभावित को भोजन के लिए रोजना 450 रुपये
- राहत शिविरों में रह रहे प्रभावितों में से यदि कोई सदस्य वहां भोजन करने के इच्छुक नहीं होगा तो उसे प्रति दिन 450 रुपये भोजन के लिए मिलेंगे। इसमें बच्चे भी शामिल हैं।
- राहत कैंप बनाए गए होटल, गेस्ट हाउस के मालिकों को प्रभावितों को ठहराए जाने पर वास्तविक खर्च या 950 रुपये प्रतिदिन प्रतिकक्ष जो भी कम हो, दिया जाएगा।
- पशुओं को शिफ्ट करने के लिए 15 हजार हजार दिए जाएंगे। बड़े पशुओं के चारे के लिये 80 रुपये प्रतिदिन तथा छोटे पशुओं के चारे के लिये 45 रुपये प्रति दिन की धनराशि दी जाएगी।
- जोशीमठ नगर के तलहटी में अलकनंदा नदी से भू कटाव को रोकने के लिए गुरुग्राम की वेबकॉज एजेंसी व सिंचाई विभाग में से जो भी पहले डीपीआर तैयार करेगा, उसे ये कार्य दे दिया जाएगा।
- आपदा के कारण जिन परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है, उनके दो व्यस्क सदस्यों को एसडीआरएफ के नए मानक के अनुसार, मनरेगा मजदूरी की दरों पर राहत राशि दी जाएगी।
- आपदा से जुड़े फैसले लेने के लिए सीएम को अधिकार
- कैबिनेट ने मुख्यमंत्री को जोशीमठ आपदा से संबंधित प्रस्तावों पर फैसला लेने के लिए अधिकृत कर दिया है ताकि तेजी से फैसले हो सकें।
- प्रभावितों की मदद के लिए सभी मंत्री मुख्यमंत्री राहत कोष में अपना एक माह का वेतन देंगे। बैठक में यह निर्णय हुआ।
- आपदा प्रभावित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के भी बिजली / पानी के बिल 06 माह हेतु माफ किए जाने की कार्यवाही।
- 235 भूस्वामियों को 3.53 करोड़ रूपये तथा 121 किरायेदारों को 60.50 लाख रूपये की धनराशि वितरित की गयी।
- जोशीमठ में प्रारम्भ में निकलने वाले पानी का डिस्चार्ज जो कि 06 जनवरी 2023 को 540 एलपीएम था, वर्तमान में घटकर 67 एलपीएम हो गया है।
- दरारग्रस्त भवनों की संख्या 863 ही है।
- जोशीमठ में 235 भूस्वामियों को 3.53 करोड़ रूपये की धनराशि तथा 121 किरायेदारों को 60.50 लाख रूपये की धनराशि वितरित की जा चुकी है।
- 181 भवन असुरक्षित क्षेत्र में है। 253 परिवार सुरक्षा की दृष्टि से अस्थायी रूप से विस्थापित किये गये है।
- विस्थापित परिवार के सदस्यों की संख्या 920 है।












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