Joshimath sinking घरों और औली रोपवे के प्लेटफॉर्म दरार भी चौड़ी होने से बढ़ी मुश्किलें, पीएमओ से टीम पहुंची

सचिव आपदा प्रबन्धन डा. रंजीत कुमार सिन्हा ने जोशीमठ नगर क्षेत्र में पहुंचकर औली रोपवे, आदि भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। पीएमओ से सचिव मंगेश घिल्डियाल जोशीमठ पहुंच गए हैं।

Joshimath sinking landslide Cracks more houses,platform Auli ropeway widened team reached from PMO

जोशीमठ के कई और घरों में दरारें आने और औली रोपवे के प्लेटफॉर्म में आई दरार भी चौड़ी होने की खबरें सामने आने के बाद सरकार और प्रशासन एक बार फिर अलर्ट हो गया है। इस बीच सचिव आपदा प्रबन्धन डा. रंजीत कुमार सिन्हा ने जोशीमठ नगर क्षेत्र में पहुंचकर औली रोपवे, मनोहरबाग, शंकराचार्य मठ, जेपी कालोनी आदि भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। पीएमओ से सचिव मंगेश घिल्डियाल जोशीमठ पहुंच गए हैं। जिसके बाद जोशीमठ में एक बार फिर हलचल तेज देखी जा रही है। सीबीआरआई के वैज्ञानिकों की देखरेख में होटल माउंट व्यू और मलारी इन को ढहाने की कार्रवाई जारी है।

मकानों मे पड़ी दरारों, भू-धंसाव के पैटर्न रूट की निरंतर मॉनिटरिंग की जाए
जोशीमठ में भू धंसाव और दरारों की समस्या बढ़ती जा रही है। इस बीच सचिव आपदा प्रबन्धन डा. रंजीत कुमार सिन्हा ने जोशीमठ नगर क्षेत्र में औली रोपवे, मनोहरबाग, शंकराचार्य मठ, जेपी कालोनी आदि भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ भू-वैज्ञानिक तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। सचिव आपदा प्रबंधन ने औली रोपवे तथा शंकराचार्य मठ के निकट के क्षेत्र तथा घरों में पड़ी दरारों का निरीक्षण किया। सचिव डॉ रंजीत कुमार सिन्हा ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि मकानों मे पड़ी दरारों तथा भू-धंसाव के पैटर्न रूट की निरंतर मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने औली रोपवे के टावर पर दरारों की मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। डॉ सिन्हा ने संबंधित अधिकारियों को दरारों के पैटर्न तथा बढ़ोतरी की निरंतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने जानकारी दी कि राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान ( एनजीआरआई ) हैदराबाद द्वारा प्रभावित क्षेत्र का भू-भौतिकीय अध्ययन किया जा रहा है। एनजीआरआई अंडर ग्राउंड वाटर चैनल का अध्ययन कर रही है। अध्ययन के बाद एनजीआरआई द्वारा जियोफिजिकल तथा हाइड्रोलॉजिकल मैप भी उपलब्ध कराया जायेगा। यह मैप जोशीमठ के ड्रेनेज प्लान तथा स्टेबलाइजेशन प्लान में काम आएंगे।

अभी तक 782 भवन चिन्हित

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    सचिव आपदा प्रबंधन डॉ रंजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि भू-धंसाव से प्रभावित जोशीमठ क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की दिशा में हम कदम दर कदम आगे बढ़ रहे हैं। प्रभावित लोगों को त्वरित राहत एवं बचाव पहुंचाना राज्य सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। प्रभावित परिवारों को तात्कालिकता के साथ सुरक्षित स्थानों में भेजा जा रहा है। प्रभावित भवनों के चिन्हीकरण का कार्य निरन्तर जारी है। भूवैज्ञानिकों तथा विशेषज्ञों की टीमें भूधसांव के कारणों की जांच के कार्य में लगी है। प्रशासन प्रभावितों के निरन्तर सम्पर्क में है। राहत शिविरों में उनकी मूलभूत सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि सीबीआरआई, आईआईटी रुड़की, वाडिया इन्संटीयूट, जीएसआई, आईआईआरएस तथा एनजीआरआई जोशीमठ में कार्य कर रही है। सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजित सिन्हा ने बताया कि अभी तक 782 भवन चिन्हित किए गए हैं, जिनमें दरारें आई हैं। जोशीमठ के कई और घरों में भी रविवार को नए सिरे से दरारें आने से औली रोपवे के प्लेटफॉर्म में दरार के चौड़ी होने से भी सरकार की चिंता बढ़ी हुई है। इस बीच होटल स्नो क्रेस्ट और कोमेट तेजी से झुक रहे हैं। सीबीआरआई के वैज्ञानिकों की देखरेख में होटल माउंट व्यू और मलारी इन को ढहाने की कार्रवाई जारी है।

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