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उत्तरकाशी का जखोल गांव साहसिक पर्यटन में पूरे देश में नंबर-1, ट्रैकिंग के साथ ही ऐसे करें प्रकृति का दीदार

Jakhol village Uttarkashi उत्तरकाशी जिले के टोंस घाटी का दूरस्थ जखोल गांव साहसिक पर्यटन में पूरे देश में नंबर 1 पर आया है। जखोल गांव को साहसिक पर्यटन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया है। करीब 3 हजार की आबादी वाले जखोल गांव और उत्तराखंड के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

उत्तरकाशी जिले के टोंस घाटी का दूरस्थ जखोल गांव तेजी से विलेज टूरिज्म व ईको टूरिज्म के रूप में बढ़ रहा है। यहां बड़ी संख्या में एडवेंचर के शौकीन भी पहुंचते हैं। यहां से लेकाटॉप ट्रेक, सोम घाटी ट्रेक, बिनासु देवी ट्रेक, भराड़सर लैक, सरूताल लैक समेत अन्य कई छोटे-बड़े ट्रेक किये जा सकते हैं।

Jakhol village Uttarkashi number one award in adventure tourism in entire country trekking nature

जखोल गांव इन ट्रेकों का बेस कैंप है। यहां हिमांचल व गढ़वाल की लोक संस्कृति का अनूठा समागम भी देखने को मिलता है। जखोल गांव में अब 100 से ज्यादा होम स्टे बन चुके हैं। जिससे यहां के लोगों को रोजगार भी​ मिलने लगा है। यहां के लोगों के लिए खेती और पर्यटन ही रोजगार का मात्र साधन है।

खेती और पर्यटन रोजगार का साधन
जखोल गांव के क्षेत्र पंचायत सदस्य संजय सिंह रावत बताते हैं कि जखोल गांव में खेती और पर्यटन ही लोगों के लिए रोजगार का साधन है, जिस पर लोग काफी मेहनत करते हैं। उन्होंने बताया कि गांव में राजमा, सेब और मिलेट्स काफी मात्रा में होते हैं। जो कि देहरादून ही नहीं दूसरे जगह भी फेमस है। ये इलाके हिमाचल से लगे हुए हैं। ऐसे में यहां की संस्कृति और परिवेश काफी कुछ मिलता जुलता है।

एक हजार रूपए प्रति व्यक्ति खर्चा
गाम प्रधान विनोद कुमार ने बताया कि जखोल गांव में अब पर्यटक ठंड के सीजन में भी घूमने और रूकने के लिए पहुंचते हैं। यहां होम स्टे में एक हजार में आसानी से रूकना और खाना पीना हो जाता है। जिसके साथ ही पर्यटकों को यहां के आसपास का वातावरण और खूबसूरती काफी पसंद आती है। गंगा होम स्टे के मालिक गंगा सिंह रावत ने बताया कि देहरादून से जखोल गांव सीधे बस या कार से पहुंचा जा सकता है। जिसकी दूरी 220 किमी है।

सोमेश्वर देवता का प्रसिद्ध मेला

पूर्व प्रधान सूरज रावत ने कहा कि जखोल गांव में सोमेश्वर देवता का प्रसिद्ध मेला लगता है। जिन्हें 22 गांवों के लोग ईष्ट देवता के रूप में पूजते हैं। सावन के महीने में सोमेश्वर देवता के मेले 22 गांव के मंदिर और थानों में लगते हैं, लेकिन सूर्य उत्तरायण पर्व पर देवगोत मेला जखोल गांव यानी देवता के मूल थान में लगता है। भगवान सूर्य के उत्तरायण होने के अवसर पर हर साल जखोल स्थित सोमेश्वर देवता के मूल थान में माघ देवगोत मेले का आयोजन किया जाता है।

2019 का ट्रेक ऑफ द ईयर
जखोल गांव से देवक्यारा बुग्याल का ट्रैक सबसे फेमस है। जिसे वर्ष 2019 का ट्रेक ऑफ द ईयर घोषित किया गया। साहसिक पर्यटन व दूरस्थ गांवों को विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा ट्रेक ऑफ द ईयर योजना शुरू की गई है, जिसके तहत बीते कुछ सालों में चाईंशील बुग्याल, हरकीदून व दयारा बुग्याल को ट्रेक ऑफ द ईयर बनाया जा चुका है। इसी क्रम में वर्ष 2019 के लिए देवक्यारा बुग्याल को चुना गया है।

देवक्यारा बुग्याल
रूपीन-सुपीन घाटी में समुद्र तल से 3745 मीटर की ऊंचाई पर स्थित देवक्यारा बुग्याल करीब चार किमी की परिधि में फैला है। बुग्याल तक पहुंचने के लिए जखोल गांव से दो अलग ट्रेक हैं। पहले ट्रेक में करीब 40 किमी की दूरी तय कर पर्यटक होम फातरा, चरोटा, ढोखरी व रौकाई ताल होते हुए देवक्यारा पहुंच सकते हैं।

40 किमी लंबे ट्रेक का प्रयोग
30 किमी लंबा ट्रेक ओबरा, देवाका, रौकाई ताल होते हुए देवक्यारा पहुंचता है। हालांकि ग्रामीण प्रत्येक 10 साल में होने वाली सोमेश्वर महादेव यात्रा के दौरान 40 किमी लंबे ट्रेक का प्रयोग करते हैं। देवक्यारा बुग्याल में एक प्राचीन गुफा है, जिसके बाहर सोमेश्वर देवता की मूर्ति बनाने वाले हरकनाथ बाबा की समाधि है। गिप्सन पास से हरकीदून व यमुनोत्री व महिंदा पास से किनौर जा सकते हैं।

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