भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) —89 साल का सफर, 63 हजार 668 युवा सैन्य अफसर, जानिए पूरा इतिहास
आईएमए में पासिंग आउट परेड (पीओपी) परेड आयोजित, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंंद ने किया शिरकत
देहरादून, 11 दिसंबर। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में पासिंग आउट परेड (पीओपी) परेड आयोजित हुई। रिव्यूइंग अफसर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जेंटलमैन कैडेट्स की सलामी ली। इस बार आईएमए से 387 जेंटलमैन कैडेट पासआउट हुए हैं, जिनमें से 319 बतौर अफसर भारतीय सेना से जुड़े। इस बार मित्र देशों के 68 जेंटलमैन कैडेट भी पासआउट हुए। जो कि आठ मित्र देशों अफगानिस्तान, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, मालद्वीव, म्यांमार, तंजानिया व तुर्किमेनिस्तान के शामिल रहे। इस तरह से आईएमए के नाम देश-विदेश की सेना को 63 हजार 668 युवा सैन्य अफसर देने का गौरव जुड़ गया है। इनमें मित्र देशों को मिले 2624 सैन्य अधिकारी भी शामिल हैं।

रिव्यूइंग अफसर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ली परेड की सलामी
आईएमए के ऐतिहासिक चेटवुड भवन के सामने ड्रिल स्क्वायर पर परेड शनिवार सुबह साढ़े सात बजे से शुरू हुई। इस दौरान कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल हरिन्द्र सिंह और डिप्टी कमांडेंड आलोक जोशी ने परेड की सलामी ली। इससे बाद जनरल कमांडिंग ऑफिसर ले.जनरल राज शुक्ला ने परेड की सलामी ली। राज्यपाल गुरमीत सिंह और सीएम पुष्कर सिंह धामी भी परेड में पंहुचे। परेड के दौरान ड्रिल स्क्वायर पर मार्चपास्ट, अवार्ड ड्रिस्ट्रीब्यूशन, पीपिंग व ओथ सेरेमनी की रस्म तो निभाई गई, लेकिन जश्न नहीं मनाया गया।रिव्यूइंग अफसर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बतौर निरीक्षण अधिकारी परेड की सलामी ली। उनके साथ में कमांडेंड लेफ्टिनेंट जनरल हरिंद्र सिंह और स्वाॅर्ड ऑफ ऑनर विजेता आनमोल गुरुंग भी मौजूद रहे। समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कैडेट्स को अवॉर्ड से सम्मानित किया।

सादगी से मनाया कार्यक्रम
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने सभी को राष्ट्र की सेवा के लिए खुद को समर्पित करने का आह्वान किया। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा झंडा दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत जैसे बहादुर पुरुषों के कारण हमेशा ऊंचा रहेगा। उन्होंने यहां आईएमए में प्रशिक्षित प्राप्त किया था। आईएमए से पास आउट होने वाले कैडेट ऐसे ही हमेशा भारत के सम्मान की रक्षा करेंगे। वर्ष 1971 के भारत- पाक युद्ध में भारतीय सशस्त्र सेनाओं की जीत के पचास साल पूरे होने के अवसर पर परेड को यादगार बनाने की तैयारी की गई थी लेकिन तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलीकॉप्टर हादसे में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत 13 अधिकारियों व जवानों की मौत के बाद कार्यक्रम को सादगी से मनाया गया।
राज्यवार कैडेटों की संख्या
उत्तर प्रदेश -45
उत्तराखंड -43
हरियाणा- 34
बिहार- 26
राजस्थान -23
पंजाब- 22
मध्य प्रदेश -20
महाराष्ट्र -20
हिमाचल प्रदेश- 13
जम्मू कश्मीर -11
दिल्ली-11
तमिलनाडु -7
कर्नाटक- 6
केरल -5
आंध्र प्रदेश- 5
चंडीगढ- 5
झारखंड -4
पश्चिम बंगाल -3
तेलंगाना- 3
मणिपुर- 2
गुजरात -2
गोवा- 2
उड़ीसा- 2
असम -2
मिजोरम- 2
छत्तीसगढ़- 2
मिजोरम -2

1932 में हुआ था उद्घाटन
एक अक्तूबर 1932 में स्थापित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) का 89 वर्ष का गौरवशाली इतिहास है। अकादमी 40 कैडेट्स के साथ शुरू हुआ था, जो कि अब 1650 कैडेट्स तक पहुंच गया है। अब तक अकादमी देश-विदेश की सेना को 63 हजार 381 युवा अफसर दे चुकी है। इनमें 34 मित्र देशों के 2656 कैडेट्स भी शामिल हैं। 1932 में ब्रिगेडियर एलपी कोलिंस प्रथम कमांडेंट बने थे। इसी में फील्ड मार्शल सैम मानेक शॉ और म्यांमार के सेनाध्यक्ष रहे स्मिथ डन के साथ पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष मोहम्मद मूसा भी पास आउट हुए थे। आईएमए ने ही पाकिस्तान को उनका पहला आर्मी चीफ भी दिया है। 10 दिसंबर 1932 में भारतीय सैन्य अकादमी का औपचारिक उद्घाटन फील्ड मार्शल सर फिलिप डब्लू चैटवुड ने किया। उन्हीं के नाम पर आईएमए की प्रमुख बिल्डिंग को चैटवुड बिल्डिंग के नाम से जाना जाने लगा। आजादी के बाद पहली बार किसी भारतीय ने सैन्य अकादमी की कमान संभाली। 1947 में ब्रिगेडियर ठाकुर महादेव सिंह इसके पहले कमांडेंट बनें। 1949 में इसे सुरक्षा बल अकादमी का नाम दिया गया और इसका एक विंग क्लेमेनटाउन में खोला गया। बाद में इसका नाम नेशनल डिफेंस अकेडमी रखा। पहले क्लेमेनटाउन में सेना के तीनों विंगों को ट्रेनिंग दी जाती थी। बाद में 1954 में एनडीए के पुणे स्थानांतरित हो जाने के बाद इसका नाम मिलेट्री कॉलेज हो गया। फिर 1960 में संस्थान को भारतीय सैन्य अकादमी का नाम दिया गया। 10 दिसंबर 1962 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ.एस राधाकृष्णन ने स्वतंत्रता के बाद पहली बार अकादमी को ध्वज प्रदान किया। साल में दो बार (जून और दिसंबर माह के दूसरे शनिवार को) आईएमए में पासिंग आउट परेड का आयोजन किया जाता है।












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