Ground report: युवाओं ने किए शिक्षा,सुरक्षा, चिकित्सा को लेकर सवाल खड़े,पूछा- देश आजाद लेकिन मानसिक रूप से कब?

independence day 2024 dehradun Ground report: देश आजादी का 78वां जश्न मना रहा है। बीते सालों में देश ने विकास के कई आयामों को छुंआ है और भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।

देश का यूथ भी मानता है कि ​भारत ने प्रगति की है। लेकिन जिस तरह की बंगाल, कोलकाता जैसी घटनाएं आए दिन सुनने को मिलती है उससे देश में शिक्षा,सुरक्षा और चिकित्सा को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।

independence day 2024 dehradun Ground report Youth raised questions regarding education security medical care asked- When will the country be free but mentally

आजादी के 78वें साल में देश का युवा क्या सोचता है। इसको लेकर वन इंडिया ने देहरादून के युवाओं से खास बातचीत की है।

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    युवाओं ने किए शिक्षा,सुरक्षा, चिकित्सा को लेकर सवाल खड़े,पूछा- देश आजाद लेकिन मानसिक रूप से कब?

    देहरादून में जॉब कर रही तान्या जटवानी ने आजादी को लेकर अपनी बात रखते हुए कोलकाता घटना का सबसे पहले जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो घटना हुई है, उससे पता चलता है कि लड़कियां सेफ नहीं है। सेफ्टी आज भी सबसे बड़ा मु्द्दा है। लोगों की मेंटलटी लड़कियों को लेकर धीरे धीरे खत्म होती जा रही है। ल​ड़कियों की रिस्पेक्ट नहीं होती है। इसके लिए एजुकेशन सिस्टम को भी सुधारने की जरूरत है।

    महिमा चौहान मानती हैं कि डॉक्टर वर्कप्लेस पर ही सेफ नहीं है। लड़कियों के पहनावे पर कमेंट किए जाते हैं। सरकार को चाहिए कि सख्त कानून बनने चाहिए।

    अदिति ने आजादी को लेकर कहा कि आज भी देश मेंटली तौर पर आजाद नहीं हुआ है। पुरूष प्रधान समाज की सोच अब भी नहीं बदली, लड़कियों को आजादी कब मिलेगी। लड़कियों को ही टारगेट किया जाता है।

    विशाखा चौहान मानती है कि हम काफी चीजों से आजाद हुए हैं, विकास भी हुआ है, लेकिन कहीं कहीं आजादी का गलत इस्तेमाल हो रहा है। कानून का और सख्त बनाने की आवश्यकता है।

    युवा रितेश कहते हैं कि आजादी के 78 साल बाद कोलकाता की तरह की घटना हो रही है तो इस पर गहत चिंतन की आवश्यकता है। मुझे लगता है कि इस तरह की घटना को रोकने के लिए एजुकेशन सिस्टम को सुधारने की आवश्यकता है। इससे सोच, नजरिया बदल सकता है।

    अनिरूद्ध कहते हैं कि आज के समय में खेल में हम काफी पीछे हैं। स्कूलों में ग्राउंड न​हीं है। बच्चों को सिर्फ पढ़ाई करने का दवाब बनाया जाता है और हम उम्मीद करते हैं कि हम खेल में अच्छा करें।

    हर्षित बताते हैं कि देश ने तरक्की की है, लेकिन क्रिकेट के अलावा कोई भी खेल आजाद नहीं हुआ है। पेपरलीक सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है।

    जितेंद्र ने कहा कि मुझे लगता है कि जब तक हम आर्थिक रूप से समान विकसित नहीं होंगे तब तक हम आजाद नहीं होंगे। यहां गरीब गरीब और अमीर अमीर होते जा रहे हैं।

    बालकृष्ण ने आजादी को लेकर कहा कि आज समाज को डेवलेप होना होगा। सोच बदलनी होगी। इसके लिए एजुकेशन बेहतर होनी चाहिए। मुस्कान ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आज एजुकेशन और फाइनेंस लेक होने की वजह से लड़कियां ही नहीं लड़के भी सेफ नहीं है।

    गगनदीप आजादी को परिभाषित करते हुए कहते हें कि सिर्फ जहां चाहें जा सकते हैं घूम फिर सकते हैं सिर्फ ये आजादी नहीं है। अंग्रेजों को भगाया था लेकिन वो हमसे ज्यादा विक​सित हुए हैं। सरदारों का सेना में कम होना सबसे बड़ी चिंता का विषय है।

    विवेक कहते हैं कि गरीबी से हम कब आजाद होंगे। प्रियंका का मानना है कि सेफ्टी को लेकर बचपन से ही एजुकेशन के जरिए बच्चों को इसकी सीख देनी होगी। देहरादून में फिलहाल हम सेफ हैं, लेकिन क्राइम बढ़ता जा रहा है। ये बड़ी चिंता है।

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