उत्तराखंड में कर्मचारियों का सरकार के खिलाफ हल्ला बोल, 18 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन
उत्तराखण्ड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति ने अपनी 18 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू किया विरोध
देहरादून, 6 सितंबर। उत्तराखंड में चुनावी साल में पुष्कर सिंह धामी सरकार के लिए चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राज्य सरकार की कई कोशिशों के बाद भी पहली बार एक मंच पर आए सभी कर्मचारी और शिक्षकों के उत्तराखण्ड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति ने अपनी 18 सूत्रीय मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ हल्ला बोल कर दिया है। आंदोलनकारियों ने पहले चरण में गेट मीटिंग कर सरकार को चेतावनी दी है, कि यदि उनकी मांगों पर सरकार ने जल्द कोई फैसला नहीं लिया तो आने वाले समय में आंदोलन उग्र किया जाएगा।

मुख्यालयों पर गेट मीटिंग कर विरोध
सीएम पुष्कर सिंह धामी के कर्मचारियों के हित में लिए गए फैसलों से राज्य के कर्मचारियों को सरकार से उम्मीदें बढ़ गई है। ऐसे में अब राज्य कर्मचारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया है।
उत्तराखण्ड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के प्रवक्ता प्रताप पंवार एवं अरूण पाण्डे ने बताया कि आज समन्वय समिति के संयोजक मंडल द्वारा पूर्व में लिये गये निर्णयानुसार घोषित आंदोलन के प्रथम चरण का प्रारम्भ सिंचाई एवं लोक निर्माण विभाग के मुख्यालयों पर गेट मीटिंग कर की गई। समन्वय समिति के संयोजक मंडल के समस्त सदस्य यमुना कॉलोनी स्थित यमुना भवन में एकत्र हुए और पूर्व में लिये गये निर्णयानुसार गेट मीटिंग का आयोजन कर कर्मचारियों के मध्य जन-जागरण कार्यक्रम प्रारम्भ किया।
एक मंच पर आए हैं सभी संघ
गेट मीटिंग में वक्ताओं ने सरकार व शासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों से लम्बित समस्याओं का निराकरण न किये जाने के कारण प्रदेश के तमाम बडे परिसंघ एवं संघ समन्वय समिति के बैनर तले एकत्र होकर समान रूप से प्रभावित करने वाले प्रकरणों को मांगपत्र में शामिल कर चरणबद्ध रूप से आन्दोलन की घोषणा की है, जोकि सरकार व शासन के लिए एक चेतावनी है कि यदि शीघ्र मांगपत्र में अंकित प्रकरणों का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेश में एक बडी श्रमिक अशान्ति उत्पन्न हो सकती है, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी सरकार व शासन की होगी।
सीएम की तारीफ, शासन से नाराजगी
गेट मीटिंग में वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश के कार्मिक शिक्षक समुदाय को वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अत्यधिक उम्मीदें हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री जमीन से जुडे हुए नेता हैं एवं उन्होंने हर तरह की कठिनाईयों का सामना किया है, किन्तु खतरा यह है कि प्रदेश के शासन में बैठे कर्मचारी विरोधी मानसिकता वाले अधिकारी उन्हें भी अपने आंकडों के जाल में फंसा न लें। इसलिए शीघ्रातिशीघ्र समन्वय समिति के प्रतिनिधियों के साथ शासन के अधिकारियों की उपस्थिति में एक बैठक आयोजित कर मांगपत्र में अंकित समस्याओं का निराकरण किये जाने हेतु निर्णय लिया जाना चाहिए।
ये है कर्मचारियों की मुख्य मांगें-
-प्रदेश के समस्त राज्य कार्मिकों/शिक्षकों/निगम/निकाय/पुलिस कार्मिकों को पूर्व की भांति 10, 16, व 26 वर्ष की सेवा पर पदोन्नति न होने की दशा में पदोन्नति वेतनमान अनुमन्य किया जाये।
-राज्य कार्मिको हेतु निर्धारित गोल्डन कार्ड की विसंगतियों का निराकरण करते हुये केन्द्रीय कर्मचारियों की भांति ब्ण्ळण्भ्ण्ैण् की व्यवस्था प्रदेश में लागू की जाय। प्रदेश एवं प्रदेश के बाहर उच्चकोटि के समस्त अस्पतालों को अधिकृत किया जाये, तथा सेवानिवृत्त कार्मिकों से निर्धारित धनराशि में 50 परसेंट कटौती कम की जाये।
-3-पदोन्नति हेतु पात्रता अवधि में पूर्व की भांति शिथिलीकरण की व्यवस्था बहाल की जाये।
-केन्द्र सरकार की भांति प्रदेश के कार्मिकों हेतु 11ः मंहगाई भत्ते की घोषणा शीघ्र की जाये।
--प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की जाये।
-मिनिस्टीरियल संवर्ग में कनिष्ठ सहायक के पद की शैक्षिक योग्यता इण्टरमिडिएट के स्थान पर स्नातक की जाये, तथा एक वर्षीय कम्प्यूटर ज्ञान अनिवार्य किया जाये।
-वैयक्तिक सहायक संवर्ग में पदोन्नति के सोपान बढ़ाते हुये स्टाफिंग पैर्टन के अन्तर्गत ग्रेड वेतन 4800 रुपए में वरिष्ठ वैयक्तिक अधिकारी का पद सृजित किया जाये।
-राजकीय वाहन चालकों को ग्रेडवेतन 2400 रुपए इग्नोर करते हुए स्टाफिंग पैर्टन के अन्तर्गत ग्रेडवेतन 4800.00 रुपए तक अनुमन्य किया जाये।
-चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को भी वाहन चालकों की भांति स्टाफिंग पैर्टन लागू करते हुए ग्रेडवेतन 4200 रुपए तक अनुमन्य किया जाये।
-समस्त अभियन्त्रण विभागों में कनिष्ठ अभियन्ता (प्राविधिक)/संगणक के सेवा प्राविधान एक समान करते हुए इस विसंगति को दूर किया जायें।
-सिंचाई विभाग को गैर तकनीकी विभागों (शहरी विकास विभाग, पर्यटन विभाग, परिवहन विभाग, उच्चशिक्षा विभाग आदि) के निर्माण कार्य हेतु कार्यदायी संस्था के रूप में स्थाई रूप से अधिकृत कर दिया जाये।
-राज्य सरकार द्वारा लागू ए0सी0पी0/एम0ए0सी0पी0 के शासनादेश में उत्पन्न विसंगति को दूर करते हुये पदोन्नति हेतु निर्धारित मापदण्डों के अनुसार सभी लेवल के कार्मिकों के लिये 10 वर्ष के स्थान पर 05 वर्ष की चरित्र पंजिका देखने तथा "अतिउत्तम" के स्थान पर "उत्तम" की प्रविष्टि को ही आधार मानकर संशोधित आदेश शीघ्र जारी किया जाये।
-जिन विभागों का पुर्नगठन अभी तक शासन स्तर पर लम्बित है, उन विभागों का शीघ्र पुनर्गठन किया जाये।
-31 दिसम्बर तथा 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों को 06 माह की अवधि पूर्ण मानते हुये एक वेतन वृद्धि अनुमन्य कर सेवानिवृत्ति का लाभ प्रदान किया जाये।
-स्थानान्तरण अधिनियम-2017 में उत्पन्न विसंगतियों का निराकरण किया जाये।
-राज्य कार्मिकों की भांति निगम/निकाय कार्मिकों को भी समान रूप से समस्त लाभ प्रदान किये जाये।
-तदर्थ रूप से नियुक्त कार्मिकों की विनियमितिकरण से पूर्व तदर्थ रूप से नियुक्ति की तिथि से सेवाओं को जोड़ते हुये वेतन/सैलेक्शन ग्रेड/ए0सी0पी0/पेंशन आदि समस्त लाभ प्रदान किया जाये।
-समन्वय समिति से सम्बद्ध समस्त परिसंघों के साथ पूर्व में शासन स्तर पर हुई बैठकों में किये गये समझौते/निर्णयो के अनुरूप शीघ्र शासनादेश जारी कराया जाये।
उपनल कर्मियों ने भी शुरू किया कार्यबहिष्कार
इधर उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने भी अपनी मांगों की लगातार अनदेखी को लेकर कार्यबहिष्कार शुरू कर दिया है। उपनल संविदा कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों की सेवा के बावजूद उपनलकर्मियों को मात्र 10 से 12 हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा है। यह मानदेय भी उन्हें समय पर नहीं मिलता।
आंदोलनरत कर्मचारियों ने सरकार से मांग की कि सरकार उपनल कर्मचारियों के मसले पर हाईकोर्ट के वर्ष 2018 में आए फैसले पर अमल करते हुए इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एसएलपी को वापस ले। साथ ही किसी भी कर्मचारी की सेवा समाप्त न की जाए, हटाए गए कर्मचारियों को बहाल किया जाए, कर्मचारियों के मानदेय से टैक्स न काटकर उन्हें इसका सीधा भुगतान किया जाए। इसके अलावा उपनल एवं अन्य संविदा कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य के लिए सरकार कोई ठोस नीति बनाए।












Click it and Unblock the Notifications