उत्तराखंड कांग्रेस में 'किशोर' के कदम को लेकर बढ़ी धड़कनें, क्या खुलकर कांग्रेस की ​कलह आ चुकी है सामने

उत्तराखंड कांग्रेस में किशोर के कदम को लेकर बढ़ी धड़कनें, कांग्रेस की ​कलह आ चुकी है सामने

देहरादून, 22 दिसंबर। उत्तराखंड कांग्रेस में चुनाव से पहले गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। पूर्व सीएम हरीश रावत की नाराजगी सामने आने से एक दिन पहले किशोर उपाध्याय भी कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा चुके हैं। किशोर उपाध्याय ने कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी के सामने किसी भी सीट से दावेदारी नहीं की है। किशोर उपाध्याय टिहरी सीट से दावेदारी करते आ रहे हैं। लेकिन इस बार किशोर के टिहरी सीट से दावेदारी न करने से कांग्रेस में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

In Uttarakhand Congress, there has been an increase in the tussle over Kishors move, has the Congress discord openly come to the fore

कांग्रेस के लिए पहेली बन रहे किशोर
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके किशोर उपाध्याय लगातार कांग्रेस के लिए पहेली बने हुए हैं। पहले भाजपा में जाने की अटकलें फिर लखनऊ में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश से मुलाकात और अब टिहरी से स्क्रीनिंग कमेटी के सामने दावेदारी पेश न करना, कांग्रेस के लिए नई मुसीबत बन सकती है। ऐसे में किशोर के कदम का आने वाले दिनों में बेसब्री से इंतजार है। दिसंबर की शुरूआत में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय अचानक लखनऊ पहुंच गए। उन्होंने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। जिसके बाद किशोर उपाध्याय के अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद सियासी मायने तलाशे जाने लगे। हालांकि समाजवादी पार्टी ने इसका खंडन किया, सपा के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र चौधरी ने बताया कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं वनाधिकार आंदोलन के प्रणेता किशोर उपाध्याय ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। उन्होंने गंगा-यमुना एवं हिमालय को बचाने व वनवासियों को वनों पर उनके पुश्तैनी अधिकार दिलाने आदि मुद्दों पर चर्चा की।
हरदा से नाराजगी है कारण
किशोर उपाध्याय पूर्व सीएम हरीश रावत के कारण कांग्रेस की लीडरशिप से नाराज चल रहे हैं। किशोर और हरदा के बीच कई बार ​सोशल मीडिया में वार-पलटवार हो चुका है। किशोर हरदा पर आरोप लगा चुके हैं कि 2012 में कांग्रेस सरकार बनने पर अपने विधानसभा क्षेत्र टिहरी में सक्रिय नहीं होने देने का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। 2012 से 2016 के बीच किशोर उपाध्याय हरीश रावत के करीबियों में से एक रह चुके हैं। लेकिन 2017 में सहसपुर से चुनाव हारने के बाद किशोर और हरदा में दूरियां आ गई। अब चुनाव आते ही किशोर ने हरीश रावत पर निशाना साधा। किशोर ने कहा था कि 2017 में सहसपुर सीट से चुनाव वह बड़ी साजिश के चलते हारे थे। इसके जवाब में हरीश रावत ने टिहरी से लेकर कई विधानसभा क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा था कि सहसपुर से टिकट किशोर ने ही तय कराया था। सहसपुर सीट से किशोर की हार का कारण कांग्रेस का विद्रोह माना जाता है जब एक बागी नेता ने किशोर के खिलाफ बगावत की। इस पूरे प्रकरण के लिए किशोर ने हरीश रावत को दोषी करार दिया था।
खुलकर सामने आई गुटबाजी
किशोर उपाध्याय के कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी के सामने आवेदन न करना कांग्रेस की गुटबाजी को दर्शाता है। किशोर कांग्रेस को अब खुलकर चुनौती देने के मूड में है। इधर हरीश रावत का प्रदेश प्रभारी और संगठन को लेकर सीधे मोर्चा खोलना कांग्रेस के लिए अच्छे संकेत नहीं है। जो कि आने वाले दिनों में कांग्रेस की कलह का कारण बन सकता है।

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