उत्तराखंड में विभागों के बंटवारे में बढ़ा धन सिंह का कद, सुबोध का कम किया भार, नए चेहरों को भी बड़ी जिम्मेदारी

धन सिंह को शिक्षा,उच्च ​शिक्षा,चिकित्सा और चिकित्सा शिक्षा

देहरादून, 30 मार्च। लंबे इंतजार के बाद उत्तराखंड के मंत्रियों को विभागों का बंटवारा हो चुका है। मंत्रिमंडल में शामिल 8 मंत्रियों में से धन सिंह रावत का कद बढ़ाया गया है। धन सिंह रावत को विद्यालयी शिक्षा से लेकर उच्च ​शिक्षा तक का जिम्मा सौंपा गया है। इसके साथ ही धन सिंह के पास चिकित्सा और चिकित्सा शिक्षा की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मुख्यमंत्री ने खुद को रखा हल्का

मुख्यमंत्री ने खुद को रखा हल्का

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने पास 23 पोर्टफोलियो रखे हैं, जिसमे गृह मंत्रालय, एक्साइज, खनन और सिविल एविएशन आदि शामिल हैं। इस तरह से मुख्यमंत्री ने खुद का भार हल्का ही रखा है। पूर्व में मुख्यमं​त्रियों के पास वित्त, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ आदि अहम विभाग रहे हैं। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री ने भारी भरकम विभागों को दूसरे मंत्रियों को सौंपकर मॉनिटरिंग पर फोकस करने ​की कोशिश है। कैबिनेट में सबसे सीनियर मंत्री सतपाल महाराज एक बार फिर लोक निर्माण विभाग जैसे भारीभरकम विभाग लेने में कामयाब हुए हैं। इसके अलावा महाराज के पास पुराने विभाग भी आ गए हैंं, जिसमें पंचायती राज, ग्रामीण निर्माण, संस्कृति, धर्मस्व, पर्यटन, जलागम प्रबंधन, सिंचाई एवं लघु सिंचाई शामिल है।

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    प्रेमचंद और चंदनराम दास को भी अहम विभाग

    प्रेमचंद और चंदनराम दास को भी अहम विभाग

    पहली बार कैबिनेट मंत्री बने प्रेम चंद्र अग्रवाल को भी दूसरे नंबर के सबसे भारी भरकम विभाग दिए गए हैं। जिसमें वित्त और शहरी विकास एवं आवास शामिल हैं। इसके अलावा अग्रवाल पहले से ही विधायी एवं संसदीय कार्य मंत्री का जिम्मा संभाल रहे हैंं, अग्रवाल पुनर्गठन एवं जनगणना भी देखेंगे। गणेश जोशी को भी इस बार कृषि एवं कृषक कल्याण, ग्राम्य विकास का अतिरिक्त विभाग मिला है। जबकि वे पहले की तरह सैनिक कल्याण भी संभालेंगे। धामी सरकार- 2 में सबसे भारीभरकम और हेवीवैट विभाग धन सिंह रावत को मिला है। पहली बार विद्यालयी शिक्षा बेसिक, विद्यालयी शिक्षा माध्यमिक, संस्कृत शिक्षा, उच्च शिक्षा का एक ही मंत्री बनाया गया है। साथ ही धन सिंह के पास सहकारिता, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। विभागों के बंटवारे में इस बार सबसे पीछे सुबोध उनियाल रह गए हैं। उन्हें वन विभाग के अलावा भाषा, निर्वाचन, तकनीकी शिक्षा का जिम्मा सौंपा गया है। सुबोध उनियाल के कद को बढ़ाने का दावा किया जा रहा था, लेकिन सुबोध को वन और तकनीकी शिक्षा से ही संतोष होना पड़ रहा है। रेखा आर्या के भी विभागों में थोड़ा सा अतिरिक्त भार दिया गया है। वे पहले की तरह महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास के अलावा इस बार खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, खेल एवं युवा कल्याण को भी संभालेंगे। जो कि काफी अहम विभाग हैं। पहली बार मंत्री बने चंदन राम दास को भी समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, परिवहन, लघु एवं सूक्ष्म मध्यम उद्यम जैसे अहम विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जो कि उनके लिए काफी चुनौती साबित हो सकती है। इसके साथ ही सौरभ बहुगुणा ​के पास पशुपालन, दुग्ध विकास एवं मत्स्य पालन, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग, प्रोटोकॉल, कौशल विकास एवं समायोजन की जिम्मेदारी रहेगी।

    पहली बार बने मंत्रियों को अहम जिम्मेदारी

    पहली बार बने मंत्रियों को अहम जिम्मेदारी

    धामी सरकार में पहली बार मंत्री बने प्रेमचंद अग्रवाल, चंदनराम दास और सौरभ ब​​हुगुणा के पास कम समय में खुद को प्रुफ करने की चुनौती है। तीनों के पास अहम विभागों की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जो कि चुनौती के रुप में देखी जा रही है। भाजपा के 47 विधायक जीतकर आए हैं। ऐसे में इस बार कैबिनेट में जगह न पाने वाले सीनियर विधायकों को भी आने वाले समय में मौका दिया जा सकता हे। ऐसे में जो पहली बार मंत्री बनाए गए हैं या जिनके पास सबसे भारीभरकम विभाग हैं।उनकी परफोर्मेंस पर भी सबकी नजर रहेगी। इसके साथ ही 3 मंत्रियों की सीट अब भी खाली है। जिनको भरने के बाद इनमें से ही कुछ विभाग दिए जाएंगे।

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