भारत-चीन बॉर्डर पर होम स्टे होने जा रहे शुरू, जानिए कब और कहां होंगे प्रकृति के दीदार
वाइब्रेंट विलेज की तरह सरकार बॉर्डर के गांवों को दोबारा से आबाद कर डेवलप करने में जुटी है। इसके साथ ही इन गांवों में स्वरोजगार और होम स्टे योजना के जरिए मुख्य धारा में जोड़ने की पहल कर रही है। साथ ही गांवों को पर्यटन से भी जोड़ने की कोशिश जारी है।
इसी के तहत चीन सीमा से लगे जादूंग गांव में होम स्टे तैयार हो रहे हैं। जिसका जल्द ही आम लोग दीदार कर सकेंगे। इन गांवों को वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के चलते खाली करवाया गया था। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सीमावर्ती जादूंग गांव में पहले चरण में इसी साल सितंबर से छह होमस्टे का निर्माण शुरू हुआ है।

सभी होम स्टे पहाड़ी शैली में तैयार किए जा रहे हैं। अब इन होमस्टे के साथ वहां पर मेला स्थल के निर्माण की कवायद की भी जा रही है। मैदान बनने से लोग अपने रीति-रिवाज और संस्कृति से जुड़े आयोजन भी कर सकेंगे। तीन माह में छह में से तीन होमस्टे की नींव का निर्माण पूरा कर लिया गया है।
चौथे होमस्टे की नींव निर्माण का काम जारी है। 21 सितंबर से छह होमस्टे का निर्माण शुरू किया था। 30 नवंबर को गंगोत्री नेशनल पार्क के गेट बंद होने के चलते यह काम अब 29 नवंबर को बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद अगले साल जून में दोबारा शुरू किया जाएगा। पर्यटन विभाग के अनुसार, दूसरे चरण में यहां 17 होमस्टे बनाए जाएंगे। इसके लिए डीपीआर तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है।
जादूंग में कुल 23 परिवार रहते थे। प्रत्येक के लिए होमस्टे बनाया जा रहा है। पहले चरण में छह होमस्टे बनने के बाद दूसरे चरण में 17 का काम शुरू हो जाएगा।जादुंग गांव में होमस्टे बनने के बाद पर्यटक यहां आसपास की प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद ले सकेंगे। करीब 10 किमी का जनकताल ट्रेक भी प्रकृति के अभुद्ध नजारों के बीच रोमांच को और बढ़ाएगा।












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