HOLI 2026 उत्तरकाशी के प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर में शिवभक्तों की भस्म होली, जानिए क्यों खास है परंपरा
HOLI 2026 होली रंगों का त्योहार है। जिसको मनाने का हर जगह का अपना अंदाज है। उत्तराखंड देवभूमि है, ऐसे में यहां भगवान की भी होली होती है, जो कि खास होती है। कुछ ऐसा ही अलग नजारा नजर आता है। उत्तरकाशी के प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर में। जहां शिवभक्त 'भस्म होली' मनाते हैं।
होलिका दहन के दिन आयोजित इस अनूठी परंपरा में शिव भक्त एक दूसरे के साथ भस्म लगाकर उत्सव मनाते हैं। बीते कई वर्षों से यह परंपरा निभाई जा रही है। इससे पहले भगवान के शिवलिंग पर भी भस्म लगाई जाती है। सुबह की आरती के बाद स्वयंभू शिवलिंग पर हवन कुंड व धूनी की भस्म लगाई जाती है।

इसके बाद मंदिर प्रांगण में ही भोले के जयकारों के बीच श्रद्धालु भस्म होली खेलते हैं। जिसमें हर कोई शामिल होती है। जप्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर में उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर पिछले करीब 9-10 वर्षों से भस्म होली का आयोजन किया जा रहा है। इस होली के लिए मंदिर में होने वाले यज्ञ व हवन कुंडों की वर्षभर की राख को एकत्रित किया जाता है।
सबसे पहले स्वयंभू शिवलिंग पर भस्म
छोटी होली के दिन मंदिर में सुबह की आरती के बाद सबसे पहले स्वयंभू शिवलिंग पर हवन कुंड व धूनी की भस्म लगाकर आशीर्वाद लिया जाता है। इसके बाद मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं के बीच स्वस्ति वाचन के साथ मंदिर के महंत हवा में भस्म उड़ाकर भस्म होली की शुरुआत करते हैं।
2 मार्च को भस्म होली का आयोजन
ढोलक की थाप पर कुमाऊंनी होली गीत की धुनों पर श्रद्धालु जमकर भस्म होली का आनंद लेते हैं। ऐसी मान्यता है कि भस्म होली खेलने से लोगों के सभी कष्ट दूर होते है। इस बार 2 मार्च को भस्म होली का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें क्षेत्रीय विधायक समेत शहर के कई जनप्रतिनिधि और संगठन से जुड़े लोगों के साथ शिवभक्त मौजूद रहेंगे।
देश के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक
उत्तरकाशी स्थित प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर देश के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक है। बाबा काशी विश्वनाथ के मंदिर भारत में दो ही स्थानों पर मौजूद हैं। पहला मंदिर बनारस तो दूसरा उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में। पुराणों में उल्लेख है कि कलयुग में भगवान काशी विश्वनाथ स्वयंभू लिंग के रूप में जनपद मुख्यालय में विराजमान हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम ने की
मान्यता है कि प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम ने की थी। यहां तप करने से उनका क्रोध शांत हुआ था। इस कारण उत्तरकाशी को सौम्यकाशी नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में अनादि काल से 56 सेंटीमीटर ऊंचा स्वंभू शिवलिंग मौजूद है, जो कि दक्षिणावर्त यानि कि दक्षिण की ओर झुका हुआ है।
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