High court uttarakhand: IPS अरुण मोहन और नीरू गर्ग का मामला, केंद्र सरकार से मांगा शपथ पत्र जानिए क्यों
High court uttarakhand उत्तराखंड हाई कोर्ट में आईजी स्तर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुण मोहन और नीरू गर्ग के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर डीआईजी पद पर भेजने के प्रकरण पर सुनवाई की। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से सोमवार 23 मार्च तक शपथपत्र पेश करने को कहा है।
मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ती सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने मामले में सुनवाई की। सुनवाई पर केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया कि उनकी प्रति नियुक्ति होने के बाद उनके वेतन में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

उनको अभी जो वेतन राज्य में मिल रहा है वह केंद्र में भी मिलेगा। जिस पर कोर्ट ने इस आशय का शपथ पत्र सोमवार 23 मार्च तक कोर्ट में पेश करने को कहा है। 2005 की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन भारत तिब्बत सीमा पुलिस में उप महानिरीक्षक व 2006 के आईपीएस व आईजी.स्तर के अधिकारी अरुण मोहन जोशी को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन बीएसएफ में डीआईजी बनाया गया है।
5 मार्च 2026 को आदेश जारी
गृह मंत्रालय की ओर से 5 मार्च 2026 को इसके आदेश जारी हुए। आदेश के बाद उत्तराखंड सरकार ने 6 मार्च 2026 को इन अधिकारियों को कार्यमुक्त करने का आदेश पारित किया था। जिसे इन अधिकारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। मामले की सुनवाई के बाद खण्डपीठ ने केंद्र सरकार से सोमवार 23 मार्च तक शपथपत्र पेश करने को कहा है।
हाईकोर्ट में चुनौती
उत्तराखंड के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को बगैर उनके आवेदन के और अनिच्छा जाहिर किए जाने के बावजूद वर्तमान से नीचे के पद पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। आईजी स्तर की अधिकारी नीरू गर्ग को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में डीआईजी पद पर जबकि आईजी अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में डीआईजी के पद पर तैनात किया गया था।
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन नहीं किया
अधिकारियों ने कहा था कि उन्होंने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन नहीं किया था। वे आईजी के पद पर हैं और उन्हें जबरन नीचे के डीआईजी पद पर भेजा जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से आइपीएस अरुण मोहन जोशी, नीरू गर्ग व मुख्तार मोहसिन की केंद्र में प्रतिनियुक्ति के आदेश जारी किए थे।
आइपीएस नीरु 2005 बैच
आइपीएस नीरु 2005 बैच की है और तीन अक्टूबर 2022 को आइजी बनी थी। चार फरवरी को उनकी ब्यूरो आफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट में डीआइजी पद पर प्रतिनियुक्ति के आदेश हुए थे। चार जनवरी को ही पहले राज्य सरकार की ओर से अरुण मोहन जोशी को डेपुटेशन पर भेजने का आदेश जारी किया गया, फिर उसी दिन आदेश वापस ले लिया गया।
2006 बैच के अरुण
अरुण को डीआइजी बीएसएफ बनाया गया था। तीन फरवरी को उन्हें अगले पांच साल के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की सूची से बाहर कर दिया। अधिकारियों का कहना था कि जब उनका नाम केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से बाहर कर दिया था फिर उनका डिमोशन क्यों कर दिया गया। जबकि 2006 बैच के अरुण भी अक्टूबर 2022 में ही आइजी बने थे। अब दोनों अधिकारी कोर्ट की शरण में है।
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