क्या उत्तराखंड कांग्रेस में खत्म हुआ हरीश रावत युग? हाईकमान ने अपने फैसले से दे दिए साफ संकेत
प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष ,उपनेता में नया प्रयोग
देहरादून, 11 अप्रैल। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव परिणाम के ठीक एक माह बाद कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति कर दी है। कांग्रेस हाईकमान ने नया प्रयोग करते हुए तीनों चेहरे कुमाऊं मंडल से लिए हैं। ऐसे में गढ़वाल के नेताओं में फैसले के तुरंत बाद नाराजगी भी दिखने लगी है। लेकिन इन सभी फैसलों में एक बात तो साफ है कि इस बार हाईकमान ने अपने फैसलों में पूर्व सीएम हरीश रावत से राय नहीं ली है। जिससे साफ है कि कांग्रेस में अब हरदा युग का अंत माना जा रहा है। हाईकमान ने तीनों पदों पर चयन में गुटबाजी को खत्म करने की कोशिश भी की है।

विधायक का चुनाव हारे, लेकिन हाईकमान ने जताया भरोसा
प्रदेश में कई दिनों से चल रही सियासी उठापटक के बीच कांग्रेस हाईकमान ने उत्तराखंड के लिए तीन पद प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और उप नेता प्रतिपक्ष का चयन कर दिया है। तीनों पदों पर कांग्रेस ने चौंकाने वाले नामों पर मुहर लगाई है। प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी रानीखेत से विधायक रह चुके और उपनेता सदन रहे करन माहरा को सौंपी गई है। प्रदेश अध्यक्ष पर करन माहरा की ताजपोशी सबके लिए हैरान करने वाली जरुर है। करन माहरा इस बार विधायक का चुनाव हार गए थे। ऐसे में उनकी अभी कोई दावेदारी नहीं मानी जा रही थी। लेकिन हाईकमान ने माहरा को बड़ी जिम्मेदारी देकर खेमेबाजी को खत्म करने की कोशिश की है। हालांकि करन माहरा प्रीतम सिंह के करीबी माने जाते हैं।

नेता प्रतिपक्ष पर दलित चेहरा, प्रीतम खेमे को झटका
नेता प्रतिपक्ष पर कांग्रेस हाईकमान ने यशपाल आर्य को नियुक्त किया है। यशपाल आर्य की तैनाती कुमाऊं के दलित चेहरे के रुप में मानी जा रही है। ऐसे में प्रीतम सिंह खेमे को झटका लगा है। प्रीतम सिंह नेता प्रतिपक्ष के लिए सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे थे। लेकिन हाईकमान ने सभी दावेदारी को दरकिनार कर यशपाल आर्य को जिम्मा सौंपा है। यशपाल आर्य चुनाव से ठीक पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस मे आए थे। ऐसे में कांग्रेस के अंदर उनको लेकर कई तरह के सवाल उठने तय हैं। कांग्रेस ने समीकरणों को साधने के लिए भुवन कापड़ी को उप नेता प्रतिपक्ष बनाया है। भुवन कापड़ी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खटीमा से चुनाव हराया है। कापड़ी युवा चेहरे हैं। ऐसे में पार्टी ने युवाओं की टीम पर भी भरोषा जताया है।

हरीश रावत हुए किनारे
चुनाव में कांग्रेस अभियान की कमान संभाल चुके पूर्व सीएम हरीश रावत पहले ही हार की जिम्मेदारी ले चुके हैं। हरीश रावत के बाद प्रदेश अध्यक्ष रहे गणेश गोदियाल से भी इस्तीफा मांगा गया। गणेश गोदियाल भी हरीश रावत के करीबी रहे हैं। अब कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और उप नेता प्रतिपक्ष पर नए चेहरों को बिठाकर कांग्रेस के अंदर चली आ रही गुटबाजी को खत्म करने का संदेश दिया है। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष और उप नेता प्रतिपक्ष के चेहरे प्रीतम सिंह के करीबी बताए जा रहे हैं। लेकिन खुद प्रीतम को नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी न मिलना भी बड़े संकेत है। हरीश रावत के लिए ये चुनाव आखिरी चुनाव माना जा रहा था। अब हरदा को हाईकमान ने भी किनारा करने की कोशिश की है। जो कि हरदा कई दिनों से आशंका जता रहे थे।












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