हरीश रावत की प्रेशर पॉलिटिक्स कर गई काम, प्रदेश प्रभारी को हटाकर डेमेज कंट्रोल की तैयारी में कांग्रेस
हरीश रावत की प्रेशर पॉलिटिक्स कर गई काम, प्रदेश प्रभारी को हटाकर डेमेज कंट्रोल की तैयारी में कांग्रेस
देहरादून, 24 दिसंबर। उत्तराखंड कांग्रेस में मचे घमासान को थामने के लिए हाईकमान ने दिल्ली में प्रदेश के नेताओं के साथ अब बीच का रास्ता तलाशना शुरू कर दिया है। पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी दिल्ली जाने से पहले कांग्रेस में ही रहने के संकेत देकर साफ कर दिया कि जो वे चाह रहे हैं, पार्टी ने उनकी मांग को मान लिया है। ऐसे में प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव के हटाने की चर्चाएं तेज हो गई है। हालांकि पार्टी हाईकमान सभी असंतुष्ट नेताओं से संवाद कर बीच का रास्ता भी निकालने में जुटी है।
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हरीश रावत का दांव कर गया काम
उत्तराखंड में टिकट बंटवारे से पहले ही पूर्व सीएम हरीश रावत ने हाईकमान के सामने सोशल मीडिया के जरिए नाराजगी जताकर प्रेशर पॉलिटिक्स का दांव खेला है, जिसमें हरीश रावत काफी हद तक सफल बताए जा रहे हैं। हरीश रावत की नाराजगी को देखकर हाईकमान ने उत्तराखंड के सीनियर नेताओं को दिल्ली तलब किया। जिसमें पार्टी हाईकमान बीच का रास्ता निकालने में जुट गई है। ऐसे में तय माना जा रहा है कि हाईकमान हरीश रावत की चाहत में से एक मांग को पूरा कर देगी। जिससे नाराजगी दूर हो सके। पूर्व सीएम हरीश रावत ने अभी तक मीडिया से बातचीत में किसी तरह की नाराजगी का सीधे जिक्र नहीं किया लेकिन हरीश रावत के प्रवक्ता सुरेंद्र अग्रवाल सीधे प्रभारी देवेन्द्र यादव के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। इसके अलावा हरदा कैंप हरीश रावत को सीएम फेस बनाने की मांग पर अड़े हैं। ऐसे में डेमेज कंट्रोल के लिए पार्टी हाईकमान प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव को हटा सकती है। कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस महासचिव मुकुल वासनिक को उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

खुलकर बेटिंग करेंगे हरदा
प्रदेश प्रभारी के हटने के बाद हरीश रावत की टिकट बंटवारे से लेकर हर वो इच्छा पूरी हो सकती है। जो वो चाह रहे हैं। हालांकि ऐसे में अब प्रीतम सिंह रावत और किशोर उपाध्याय हाईकमान के सामने नाराजगी दर्ज करा सकते हैं। जिसके लिए हाईकमान सभी को संतुष्ट करने के लिए बीच का रास्ता निकाल सकती हैा ऐसे में सीएम फेस को लेकर पार्टी अभी जल्दबाजी नहीं दिखाएगीा लेकिन इस समय जिस तरह से सर्वे और मीडिया रिपोर्ट में हरीश रावत बतौर सीएम पहली पसंद के रूप में निकलकर सामने आए हैं। ऐसे में पार्टी किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहेगी।

उत्तराखंड को पंजाब नहीं बनने देगी हाईकमान
हरीश रावत जिला स्तर के संगठनों में फेरबदल के लिए हाईकमान को मंजूर कर सकते हैं। इस बहाने प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और खुलकर संगठन में फेरबदल कर पाएंगे। हालांकि चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में बदलाव कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकते हैं। पूर्व सीएम हरीश रावत को मनाकर कांग्रेस के जिला स्तरों पर नुकसान हो सकता है। इसके अलावा प्रदेश प्रभारी के तौर पर देवेन्द्र यादव जिस तरह से संगठन स्तर पर एक जुट होकर कार्यकर्ताओं को साथ लाने में जुटे थे, उस रणनीति को कांग्रेस को अब नए तरीके से शुरुआत करनी होगी। हालांकि हाईकमान अगर हरीश रावत कैंप के आगे झुकता है तो दूसरे खेमों की नाराजगी का सामना भी करना पड़ सकता है। लेकिन ये भी तय है कि कांग्रेस हाईकमान उत्तराखंड को पंजाब नहीं बनाना चाहते हैं। जहां पार्टी के हाथ से सीनियर नेता फिसल जाए।












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