पंजाब का विवाद सुलझाकर हाईकमान की उम्मीदों पर खरे उतरे हरीश रावत, अब उत्तराखंड में चला नया दांव
पंजाब की रणनीति का असर उत्तराखंड की राजनीति पर पढना तय
देहरादून, 20 सितंबर। पंजाब में नए सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के कार्यभार संभालने के साथ पंजाब में कांग्रेस के अंदर लंबे समय से चल रही खींचतान में चुनाव तक विराम लग गया है। नए सीएम बन जाने से पंजाब ही नहीं उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस को बड़ी कामयाबी मिली है। खासकर पूर्व सीएम हरीश रावत को। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी के तौर पर हरीश रावत की संगठनात्मक पकड़ और मजबूत हो गई है। हाईकमान के सामने एक बार फिर हरीश रावत ने खुद को प्रुफ कर दिया है। ऐसे में अब एक बार फिर हरीश रावत का कद दिल्ली से लेकर उत्तराखंड में बढ़ गया है। हालांकि विपक्ष हरीश रावत को पंजाब में हुए राजनीतिक उठापटक के लिए जिम्मेदार बताकर उन्हें घेरने में जुटी है।

पंजाब विवाद सुलझा, ली राहत की सांस
उत्तराखंड में सत्ता में आने के लिए कांग्रेस ने चुनाव अभियान की कमान हरीश रावत को सौंपी हुई है। लेकिन सीएम का फेस हरीश रावत को कांग्रेस ने अभी तक घोषित नहीं किया। जिसके बाद से हरीश रावत के समर्थक और खुद हरीश रावत सीएम फेस को लेकर हाईकमान से अपना पक्ष रखते हुए नजर आ चुके हैं। इतना ही नहीं हरीश रावत कई बार हाईकमान से पंजाब का प्रभारी पद किसी और नेता को सौंपने की मांग भी करते आ रहे हैं। हालांकि हालिया प्रकरण के बाद से अब पंजाब में कुछ स मय के लिए राजनीतिक उठापटक बंद होने के आसार नजर आ रहे हैं। जिसका श्रेय काफी हद तक हरीश रावत को मिलना तय है। जिससे एक बार फिर से हरीश रावत हाईकमान की उम्मीदों पर खरा उतरे हैं। खासकर राहुल गांधी ने जो विश्वास हरीश रावत पर किया, वो अंतिम समय तक पंजाब में रहकर हरीश रावत ने पूरा किया है। पंजाब में दलित सीएम बनाने के फैसले को हरीश रावत चुनावी साल में पंजाब के जरिए यूपी और उत्तराखंड में लेकर जा रहे हैं।
परिवर्तन रैली के समापन में पहुंचे हरदा
17 सितंबर से 20 सितंबर तक हरिद्वार जिले में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा निकली। लेकिन इस दौरान हरीश रावत पंजाब के सियासी घटनाक्रम में व्यस्त रहे। हालांकि परिवर्तन यात्रा के समापन के दौरान हुई रैली में हरीश रावत ने आकर दूसरे चरण में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। हरीश रावत ने समापन रैली में आकर प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को बधाई दी। रावत ने पंजाब में नए सीएम चन्नी को दलित का बेटा बताया। साथ ही इसे ऐतिहासिक फैसला बताया। उन्होंने कहा कि लंबे सालों बाद उत्तर भारत में किसी दलित को सीएम बनाया गया है। साफ है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस यूपी और उत्तराखंड में दलित कार्ड खेलने जा रही है।
हरदा के दलित कार्ड से भाजपा में बैचेनी
पंजाब प्रकरण के बाद उत्तराखंड में भी सियासी पारा बढ़ गया है। हरीश रावत के दलित कार्ड को लेकर अब भाजपा ने रावत को घेरा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने कहा कि पंजाब में कांग्रेस का नेतृत्व परिवर्तन उसका अंदरूनी मसला है,लेकिन उसका दलित प्रेम का आडम्बर भी बाहर आ गया। कौशिक ने कहा कि पंजाब प्रभारी चुनाव तक दलित चेहरे के रुप में मुख्यमंत्री चन्नी की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस का महिमामंडन कर रहे हैं,लेकिन आगामी चुनाव में सिधू को चेहरे के रूप में घोषित कर यह साफ कर चुके हैं कि द्लित समुदाय को महज चुनाव तक ही सीमित रखा जाएगा। यह सरासर दलित समाज का अपमान भी है। उन्होंने कहा कि देश भर में कांग्रेस दलितों की भावनाओ के साथ खिलवाड़ करती आयी है और पंजाब इसका ताजा उदाहरण है। वोट बैंक के लिए किसी की भावनाओं के साथ खेलना अन्याय है और झूठ की बुनियाद पर जो सपने दिखाने का ख्वाब कांग्रेस दिखाना चाहती है वह पूरा नहीं होगा।
परिवर्तन यात्रा हरिद्वार में हो गया पंजाब में
कांग्रेस 2022 चुनाव में वापसी के लिए परिवर्तन यात्रा निकाल रही है। लेकिन जिस तरह से पंजाब में परिवर्तन हुआ, उससे भाजपा को हरीश रावत पर हमला करने का मौका मिल गया है। उत्तराखंड प्रदेश मुख्यालय में सोमवार को मीडिया से बातचीत करते हुए पार्टी के पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी ने कहा कि हमें इस बात की खुशी है कि हरीश रावत को मां गंगा का आशीर्वाद मांग कर परिवर्तन यात्रा करना चाह रहे थे, लेकिन मां गंगा ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि जाओ परिवर्तन करो और उन्होंने पंजाब में जाकर परिवर्तन कर दिया। पंजाब की सरकार बदल गई है। कांग्रेस के हरीश रावत झूठी वाह वाही के लिए अनावश्यक बयानबाजी करते हैं।












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