Uttarakhand : धामी के चौके पर हरीश रावत ने मारा छक्का,भाजपा का बड़ा विकेट गिराकर बाजी पलटने की कोशिश
चुनाव से पहले बडा उलटफेर, कांग्रेस में यशपाल आर्य की घर वापसी
देहरादून, 11 अक्टूबर। उत्तराखंड की राजनीति में चुनाव से पहले बड़े उलटफेर दिखने शुरू हो गए हैं। भाजपा का लगातार कांग्रेस के कुनबे में सेंधमारी करने के जबाव में हरीश रावत ने बड़ा दांव खेल दिया है। चुनाव से पहले दलित कार्ड खेलने में जुटे हरीश रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चौके का जबाव सिक्सर मारकर दिया है। उत्तराखंड के बड़े दलित चेहरे कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य को अपने पाले में लाकर हाथ मजबूत कर दिया है। इतना ही नहीं यशपाल आर्य के साथ उनके विधायक पुत्र संजीव आर्य ने भी भाजपा का दामन छोड़ दिया है।

यशपाल आर्य की घर वापसी
उत्तराखंड में कांग्रेस ने नवरात्र के शुभ मुहूर्त आते ही भाजपा के अंदर खलबली मचा दी है। 2017 चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में अपने बेटे के साथ ज्वाइन करने वाले कद्दावर नेता यशपाल आर्य ने अपने बेटे के साथ घर वापसी की है। कांग्रेस के अंदर लंबे समय से भाजपा में सेंधमारी का दावा किया जा रहा है। इस बीच भाजपा ने भी 3 विधायकों प्रीतम पंवार, राजकुमार और राम सिंह कैड़ा को अपने पाले में लाकर कांग्रेस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की। जिसके लिए कांग्रेस ने 15 अक्टूबर तक का समय मांगा था। लेकिन कांग्रेस ने इस बीच बड़ा उलटफेर करते हुए कांग्रेस के दो बार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके यशपाल आर्य की घर वापसी करा दी। यशपाल आर्य वर्तमान सरकार में परिवहन, समाज कल्याण जैसे भारी भरकम मंत्रालय संभाल रहे थे। अब चुनाव से पहले आर्य ने भाजपा को झटका देकर कांग्रेस का दामन थाम लिया।

कांग्रेस को मिला दलित चेहरा
यशपाल आर्य उत्तराखंड के दलित चेहरों पर बड़ा चेहरा है। कांग्रेस में दो बार प्रदेश अध्यक्ष और 6 बार विधायक चुनकर आ चुके हैं। इतना ही नहीं उत्तराखंड में पहली चुनी हुई सरकार में वे स्पीकर की भूमिका भी निभा चुके हैं। 2017 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपने बेटे के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। भाजपा में आने के बाद वे विधायक बने और बेटे को भी पहली बार विधायक का टिकट दिलवाकर विधानसभा तक पहुंचवाया। भाजपा सरकार में आर्य परिवहन और समाज कल्याण जैसे बड़े मंत्रालय संभाल रहे थे। यशपाल की छवि शांत और सादगी वाले नेता की है। उनकी नाराजगी कभी चेहरे पर नजर नहीं आती। लेकिन बीते दिनों जब अचानक सीएम पुष्कर सिंह धामी यशपाल आर्य के घर पहुंचे और नाश्ता तक साथ किया तो यशपाल आर्य की नाराजगी की खबरें सामने आने लगी। हालांकि तब यशपाल आर्य ने किसी तरह की नाराजगी होने से इनकार कर दिया। लेकिन सत्ता के गलियारों में यशपाल आर्य की अपने बेटे के साथ कांग्रेस जाने की चर्चा तेज हो गई है। जो कि सोमवार को सच साबित हुई।

19 परसेंट वोट पर कांग्रेस की नजर
चुनाव से पहले हरीश रावत के दलित प्रेम को लेकर इन दिनों उत्तराखंड में खासा चर्चाएं हैं। उत्तराखंड में 19 परसेंट दलित वोटर है। जो कि 2017 चुनाव में भाजपा की तरफ ज्यादा झुका था। अब 2022 में दलित वोट को अपने पाले में लाने के लिए कांग्रेस लगातार कोशिश कर रही है। इसके लिए यशपाल आर्य मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकते हैं। यशपाल आर्य की कुमाऊं क्षेत्र में अच्छी पकड़ हैं। साथ ही कांग्रेस में दलित चेहरों की कमी भी है। कांग्रेस के अंदर प्रमुख दलित चेहरों में सांसद प्रदीप टम्टा, कार्यकारी अध्यक्ष प्रो जीतराम हैं। ऐसे में हरीश रावत ने दलित कार्ड का दांव खेलकर यशपाल आर्य को अपने खेमे में लाने के लिए दांव खेला है।












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