Uttarakhand तो हरिद्वार से आखिरी दांव आजमाना चाहते हैं हरीश रावत, तलाशे जा रहे सक्रियता के सियासी मायने

हरीश रावत का हरिद्वार में सक्रिय होने के पीछे लोकसभा चुनाव !

उत्तराखंड के पूर्व सीएम और कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत की हरिद्वार में लगातार सक्रियता के सियासी मायने तलाशे जाने लगे हैं। हरीश रावत की अचानक सक्रिय होने के पीछे लोकसभा चुनाव 2024 को भी माना जा रहा है। हरीश रावत पहले भी हरिद्वार को लेकर खासे एक्टिव नजर आते रहते हैं।

हरीश रावत का ये चुनाव आखिरी दांव माना जा रहा

हरीश रावत का ये चुनाव आखिरी दांव माना जा रहा

हरिद्वार संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हरीश रावत का ये चुनाव आखिरी दांव माना जा रहा है। हालांकि 2022 में उत्तराखंड विधानसभा चुनाव का हरीश रावत के नेतृत्व में लड़े जाने को भी उनका आखिरी चुनाव माना जा रहा था। लेकिन हरीश रावत की राजनीति करने का तरीका और हमेशा सोशल मीडिया में एक्टिव होने की वजह से हरदा राजनीति से दूर हो पाएंगे, ये लगना अभी मुश्किल है।

हरदा ने दिल्ली में सक्रिय होने का सोशल मीडिया के जरिए ऐलान किया

हरदा ने दिल्ली में सक्रिय होने का सोशल मीडिया के जरिए ऐलान किया

2022 में उत्तराखंड में हुए विधानसभा चुनाव में हरीश रावत के हाथों विधानसभा चुनाव की कमान रही है। लेकिन पार्टी बुरी तरह हार गई। इतना ही नहीं हरीश रावत अपना चुनाव नहीं जीत पाए। इसके बाद हार का ठीकरा हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष रहे गणेश गोदियाल पर फूटा। इसके बाद हरदा ने दिल्ली में सक्रिय होने का सोशल मीडिया के जरिए ऐलान किया। लेकिन इस बीच हरीश रावत हरिद्वार की सियासत में सक्रिय नजर आए।ये बात अलग है कि पंचायत चुनाव में हरदा को किसी तरह से पार्टी स्तर पर सक्रिय नहीं देखा गया। जिस वजह से हरदा खुद को अलग भी करते नजर आए।

बहादराबाद थाने के बाहर प्रदर्शन, वो हरीश रावत का बड़ा सियासी दांव

बहादराबाद थाने के बाहर प्रदर्शन, वो हरीश रावत का बड़ा सियासी दांव

लेकिन जिस तरह से हरीश रावत ने हरिद्वार क्षेत्र में कांग्रेसी कार्यकर्ताआंें के पक्ष में आकर सरकार के खिलाफ बिगुल बजाया और बहादराबाद थाने के बाहर टैंट लगाकर प्रदर्शन किया, वो हरीश रावत का बड़ा सियासी दांव माना जा रहा है। अपनी बेटी और हरिद्वार ग्रामीण की विधायक अनुपमा रावत के समर्थन में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न को लेकर वे खुलकर विरोध कर रहे हैं। ऐसे में साफ है कि हरिद्वार की सियासत में हरदा की सक्रियता इस बात का संकेत हैं कि हरीश रावत हरिद्वार लोकसभा से आखिरी दांव खेलने का मन बना चुके हैं या फिर वे हरिद्वार से ही किस्मत आजमाना चाहेंगे।

74 वर्षीय हरीश रावत पांच बार सांसद और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके

74 वर्षीय हरीश रावत पांच बार सांसद और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके

74 वर्षीय हरीश रावत पांच बार सांसद और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। हरीश रावत ने 2013 का लोकसभा चुनाव हरिद्वार से जीता और दिल्ली की राजनीति में भी सक्रिय हो गए। इसी के बाद वे उत्तराखंड की सीएम की कुर्सी तक पहुंचे। लेकिन 2017 में बतौर मुख्यमंत्री किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण दोनों विधानसभा सीटें हार गए। 2019 में नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन यहां भी हार गए। 2022 का विधानसभा चुनाव भी लालकुआं से हार गए।

हरिद्वार ग्रामीण से 2017 में चुनाव हारे, उसी सीट से बेटी विधायक

हरिद्वार ग्रामीण से 2017 में चुनाव हारे, उसी सीट से बेटी विधायक

लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में उनकी बेटी अनुपमा हरिद्वार ग्रामीण सीट से विधायक बन गई। जो कि हरीश रावत के पक्ष में गया इतना ही नहीं हरिद्वार से कांग्रेस को 5 सीटें मिली और जिस हरिद्वार ग्रामीण सीट से हरीश रावत 2017 में विधानसभा चुनाव हारे, उसी सीट से बेटी का विधायक बनना हरदा के लिए एक आखिरी उम्मीद बन गई। हरिद्वार के समीकरणों को देखते हुए हरीश रावत के 2024 में हरिद्वार से लोकसभा चुनाव लड़ने की उम्मीद के साथ देखा जा रहा है।

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